गोरखपुर - सिक्कों की समस्या

Gorakhpur Bureauगोरखपुर ब्यूरो Updated Thu, 18 Jul 2019 01:27 AM IST
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इलाहाबाद बैंक की पाती
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स्लग::बैंकों का आया पक्ष
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हेडिंग: बैंकों का रोना, आरबीआई भी आदेश करके सोया
एसबीआई के करेंसी चेस्ट में करीब एक करोड़ मूल्य के सिक्के
पीएनबी ने भी आरबीआई की भूमिका पर सवाल उठाए
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। सिक्के जमा करने में मनमानी पर बैंकों का पक्ष भी सामने आया है। बैंकों का रोना
है, कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) आदेश करके सो जाता है। बैंकों की करेंसी चेस्ट में
सिक्के भरे पड़े हैं, जिन्हें आरबीआई नहीं ले रहा। हालांकि इस तर्क की आड़ में बैंक प्रबंधन सिक्के लेने से इंकार नहीं कर सकते हैं। उन्हें सिक्के जमा करने ही पड़ेंगे। बैंकों का जो पक्ष आया, उसे वैसे ही रखा जा रहा है। आम आदमी के हक की इस लड़ाई को अमर उजाला आगे भी जारी रखेगा।
सिक्के जमा करने में मनमानी का मामला उठाया गया तो बैंक प्रबंधन का भी दर्द फूट पड़ा। स्टेट
बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की तरफ से कहा गया कि बैंक की तीन करेंसी चेस्ट में करीब एक करोड़ रुपये मूल्य के सिक्के हैं। पांच रुपये के 52.55 लाख मूल्य के सिक्के पड़े हैं। इन सिक्कों को आरबीआई के करेंसी चेस्ट में जमा कराने की कोशिश की गई, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। आरबीआई ने डेढ़ वर्षों में सिक्कों से संबंधित कई सर्कुलर जारी किए हैं। इसका अनुपालन आरबीआई खुद नहीं कर रहा है। पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के अफसरों का कहना है कि आरबीआई सिक्कों को वापस नहीं लेता है। इस वजह से दिक्कत होती है। पीएनबी की करेंसी चेस्ट में भी सिक्के पड़े हैं, जिसे आरबीआई स्वीकार नहीं कर रहा है।
कोट-
करेंसी चेस्ट के अलावा बैंक की कई शाखाओं में सिक्के जमा कराए गए हैं। पंजाब नेशनल बैंक का कोई भी शाखा प्रबंधक सिक्के लेने से इंकार नहीं कर सकता है। एक हजार रुपये मूल्य के सिक्के आराम से जमा कराए जा सकते हैं। इससे ज्यादा की रकम भी जमा कराई जा सकती है, बशर्ते कि उस वक्त बैंक शाखा में भीड़ कम हो। बैैंक रोड स्थित शाखा में 10 हजार मूल्य के सिक्के जमा कराए गए हैं। इससे संबंधित सर्कुलर समय-समय पर शाखा प्रबंधकों को भेजे जाते हैं। - राकेश अरोड़ा, उपमहाप्रबंधक पीएनबी
सिक्के बड़ी समस्या बने हुए हैं। वैसे किसी भी शाखा में सिक्के जमा करने पर रोक नहीं है। एसबीआई के हर शाखा प्रबंधक को सिक्का स्वीकार करना है। अब आरबीआई को नया सर्कुलर जारी करना चाहिए। इसके माध्यम से सभी संस्थाओं को सिक्का स्वीकार करने का आदेश दिया जाना चाहिए। -पीसी बरोड़, उपमहाप्रबंधक एसबीआई
... तो सिक्कों पर नई रणनीति बनाने की जरूरत
आम जनता की परेशानी का संज्ञान भाजपा के नगर विधायक डॉ. आरएमडी अग्रवाल ने लिया
है। नगर विधायक ने बुधवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और आरबीआई गवर्नर को
ट्वीट किया और कहा कि सिक्कों को लेकर नई रणनीति बनाने की जरूरत है। जिस तरह से 10,
20 और 25 पैसे को नान लीगल टेंडर घोषित किया गया था, उसी तरह 50 पैसे, एक और दो
रुपये के सिक्कों को भी नान लीगल टेंडर घोषित कर दिया जाना चाहिए। छोटे मूल्य के सिक्कों
को वापस लेकर बड़े मूल्य के सिक्के बनाने की जरूरत है। बैंक अफसरों की आपत्ति है कि नागरिक
अब धार्मिक अनुष्ठान के समय ही सिक्के खोजते हैं। कोई अपने पास सिक्के नहीं रखना चाहता
है। बैंकों में जमा सिक्कों को आरबीआई भी नहीं लेता है। इससे आम जनता को परेशानी होती है।
सोशल मीडिया पर भी सिक्के की खनक
सिक्के जमा करने में मनमानी का मामला सोशल मीडिया पर छाया है। कुंअर युवराज सिंह ने
लिखा है कि बात भले ही छोटी लगे पर गंभीर है। सिक्के का निर्माण भारत सरकार ने कराया
है। बैंक कर्मी या फिर कोई और, इसे लेने से मना करे तो तत्काल देशद्रोह का मुकदमा कराया
जाना चाहिए। इसी बीच एक बैंक के शाखा प्रबंधक विवेक सिंह ने भी कमेंट किया। विवेक ने
फेसबुक पर लिखा कि सिक्के लेने में कैसा ऐतराज है? जमा कराके उसे थोड़ा थोड़ा ग्राहकों को
दिया जाना चाहिए। सिक्के लेने से कोई मना नहीं कर सकता है, क्योंकि यह लीगल टेंडर है।
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मंशा सिक्कों के समाधान का
गोरखपुर। ‘अमर उजाला’ की मंशा सिक्कों की समस्या के समाधान की है, न कि किसी तरह का विद्वेश फैलाने की। अमर उजाला की बैंक कर्मियों से गुजारिश है कि वह इस महत्वपूर्ण अभियान से जुड़ें। सिक्के के साथ बैंक में आने वाले हर व्यक्ति की मदद करें। इलाहाबाद बैंक स्टाफ एसोसिएशन यूपी ने सिक्कों से संबंधित जो पाती भेजी, उसे हूबहू प्रकाशित किया जा रहा है-
बैंक स्टाफ एसोसिएशन की पाती
संपादक महोदय, अमर उजाला गोरखपुर
दिनांक 16 और 17 जुलाई को बैंक में सिक्कों के जमा करने के संबंध में आपके समाचार पत्र में प्रकाशित हुआ है। इसके बारे में अवगत कराना है कि कोई भी बैंक शाखा सिक्कों को जमा करने से मना नहीं कर रही है। दिक्कत यह है कि शाखाओं में काउंटर पर ग्राहक यदि एक-एक रुपये के सिक्के लेकर आएंगे तो कैशियर पूरे सिक्कों की गिनती करने के बाद ही दूसरे ग्राहक का कार्य कर पाएगा। इससे दूरदराज से आए ग्राहकों को लंबी कतार में देर तक इंतजार करना पड़ेगा। हां, यदि ग्राहक एक-एक रुपये के सिक्कों को दस-दस के ग्रुप में टेप लगाकर काउंटर पर जमा करें तो कैशियर भी तुरंत गिनती करके अन्य ग्राहकों का कार्य कर सकेगा। आपके समाचार पत्र के माध्यम से यह बताना है कि शाखाओं में स्टाफ की बहुत कमी है। शाखाओं में एक क्लर्क और एक अधिकारी हैं। दोनों ही कार्य के बोझ तले दबे हैं। बैंक कर्मचारियों के प्रति सरकार और बैंक प्रबंधन का रवैया उदासीन है। अपना काम कराने के लिए असामाजिक तत्वों द्वारा दूरदराज पदस्थ अफसर, कर्मचारियों को निशाना बनाया जा रहा है। कोई भी बैंक कर्मचारियों की स्थिति के बारे में बात नहीं कर रहा है। शाखाओं में सिक्के जमा हो रहे हैं लेकिन शाखाओं से आरबीआई के करेंसी चेस्ट में सिक्के नहीं जमा हो रहे हैं। इस कारण शाखाओं में लाखों रुपये मूल्य के सिक्के जमा हो गए। इसका भी समाधान होना चाहिए। शाखाओं से सिक्के आरबीआई के करेंसी चेस्ट में जमा हों, तभी निराकरण हो सकता है। सभी बैंक अपने कर्मचारियों के माध्यम से थर्ड प्रोडक्ट (जैसे इंश्योरेंस पालिसी, म्यूचुअल फंड) का कार्य करा रहे हैं। बैंक कर्मचारियों की दशा कोई नहीं देख रहा है। बैंक कर्मचारी अपने वेतन एवं भत्तों के लिए लड़ाई लड़ रहा है। जहां केंद्र और राज्य कर्मचारियों को सातवां वेतनमान मिल गया, वहीं बैंक के अधिकारी और कर्मचारी 11वें द्विपक्षीय समझौते का नवंबर 2017 से इंतजार कर रहे हैं। बैंक कर्मचारी जनता की सेवा में पूरे मनोयोग से लगे हुए हैं। कुछ लोगों द्वारा जनता को बैंक कर्मचारियों के विरुद्ध भड़काया जा रहा है। इससे दूरदराज में पदस्थ बैंक कर्मचारियों की सुरक्षा का खतरा हो सकता है। समाचार पत्र के माध्यम से जनता की आवाज उठाना गलत नहीं है। परंतु जो कार्य सही तरीके से होना चाहिए, वह नहीं हो रहा है। हर जिले में लीड बैंक होता है। लीड बैंक के अधिकारी सभी बैंकों के अधिकारियों की मीटिंग कराकर दिशा-निर्देश दे सकता है। जिले के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ भी बैंक अधिकारियों की बैठक होती रहती है। राज्य प्रशासन भी बैंकों को दिशा-निर्देश देते रहते हैं। समाचार माध्यम से जनता के बीच बैंक कर्मचारियों को खलनायक की तरह पेश किया जा रहा है। अन्य विभागों की तुलना में बैंक कर्मचारियों द्वारा समय से शाखा में पूरे दिन सेवा किया जाता है। आज सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ भी बैंकों द्वारा जनता को दिया जा रहा है। सिक्कों की परेशानी को दूर करने के लिए आरबीआई को आगे आना होगा। बैंकों से सिक्कों को आरबीआई भी स्वीकार करे, सिर्फ बैंकों को निशाने पर लेने से सब ठीक नहीं हो सकता है। बैंकों के संगठन भी समय-समय पर कर्मचारियों को विभिन्न समस्याओं के समाधान पर गोष्ठी करते रहते हैं लेकिन नई भर्ती ना होने और स्टाफ की कमी से बैंकों में कार्य सुचारु रूप से नहीं हो पा रहा है। इस बात से बैंकों के आला अधिकारी अवगत हैं। देश में जहां दुनिया भर की बेेरोजगारी है, वहीं बैंकों में नई नियुक्तियां करके रोजगार दिया जा सकता है। आपके माध्यम से संगठन का सरकार से अनुरोध है कि शाखाओं में स्टाफ को बढ़ाया जाए और बैंक कर्मचारियों के वेतन और भत्तों में अविलंब बढ़ोतरी की जाए।
धन्यवाद,
आशुतोष सिंह
सहायक महामंत्री, इलाहाबाद बैंक स्टाफ एसोसिएशन
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