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सिक्का न लेना देशद्रोह, मना करें तो बैंक कर्मी पर करें मुकदमा
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संतोष सिंह
गोरखपुर। यदि बैंक अफसर या कर्मचारी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) का प्रचलित सिक्का लेने से इंकार करें तो आप मुकदमा कर सकते हैं। इसका प्रावधान सिक्का अधिनियम की धारा छह में दिया गया है। मुकदमा अदालत या फिर थाने में आईपीसी की धारा 188 (सरकारी नियमावली का अनुपालन न करना) के तहत दर्ज करा सकते हैं। इसमें एक महीने की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। इसकी जद में वे दुकानदार और व्यापारी भी आएंगे, जो सिक्का लेने से मना करते हैं। देशद्रोह की धारा 124ए (भारत सरकार का अपमान करना) में भी मुकदमे का प्रावधान है। देशद्रोह में आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है।
सिक्का न जमा कराने का मामला वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास के पास पहुंच गया है। भाजपा के नगर विधायक डॉ. आरएमडी अग्रवाल ने ट्वीट करके सिक्का की समस्या बताई। नगर विधायक ने कहा कि गोरखपुर में आरबीआई की नियमावली की अनदेखी की जा रही है। आरबीआई की तरफ से 1 जुलाई 2018, 26 जून 2019 और 1 जुलाई 2019 को सिक्कों से संबंधित मास्टर सर्कुलर भेजे गए हैं, फिर भी बैंकों की तरफ से सिक्के नहीं जमा कराए जा रहे हैं। इससे आम जनता और व्यापारी परेशान हैं।
एसबीआई की जमा पर्ची से गायब 50 पैसा
आरबीआई के मुताबिक 50 पैसा लीगल टेंडर है, फिर भी भारत के सबसे बड़े बैंक एसबीआई की जमा पर्ची में 50 पैसे का जिक्र नहीं है। एसबीआई की सूरजकुंड शाखा की जमा पर्ची में जो ब्योरा है, उसके मुताबिक एक, दो, पांच, दस और 20 रुपये के सिक्के का जिक्र है। आरबीआई की नियमावली के अनुसार, बैंकों की किसी भी शाखा में रोजाना 50 पैसे के 20 सिक्के जमा कराए जा सकते हैं, जिसका वास्तविक मूल्य 10 रुपये होगा।
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रोजाना बदल सकते हैं एक हजार रुपये मूल्य के सिक्के
कोई भी व्यक्ति रोजाना एक हजार रुपये मूल्य का सिक्का बैंकों से बदल सकता है। निर्धारित मूल्य का सिक्का बदलने से बैंक इंकार नहीं कर सकते हैं।
सिक्के सिक्कों की संख्या कुल मूल्य
1 रुपये 1000 1000
2 रुपये 500 1000
5 रुपये 200 1000
10 रुपये 100 1000
20 रुपये 50 1000
गोरखपुर। यदि बैंक अफसर या कर्मचारी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) का प्रचलित सिक्का लेने से इंकार करें तो आप मुकदमा कर सकते हैं। इसका प्रावधान सिक्का अधिनियम की धारा छह में दिया गया है। मुकदमा अदालत या फिर थाने में आईपीसी की धारा 188 (सरकारी नियमावली का अनुपालन न करना) के तहत दर्ज करा सकते हैं। इसमें एक महीने की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। इसकी जद में वे दुकानदार और व्यापारी भी आएंगे, जो सिक्का लेने से मना करते हैं। देशद्रोह की धारा 124ए (भारत सरकार का अपमान करना) में भी मुकदमे का प्रावधान है। देशद्रोह में आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है।
सिक्का न जमा कराने का मामला वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास के पास पहुंच गया है। भाजपा के नगर विधायक डॉ. आरएमडी अग्रवाल ने ट्वीट करके सिक्का की समस्या बताई। नगर विधायक ने कहा कि गोरखपुर में आरबीआई की नियमावली की अनदेखी की जा रही है। आरबीआई की तरफ से 1 जुलाई 2018, 26 जून 2019 और 1 जुलाई 2019 को सिक्कों से संबंधित मास्टर सर्कुलर भेजे गए हैं, फिर भी बैंकों की तरफ से सिक्के नहीं जमा कराए जा रहे हैं। इससे आम जनता और व्यापारी परेशान हैं।
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एसबीआई की जमा पर्ची से गायब 50 पैसा
आरबीआई के मुताबिक 50 पैसा लीगल टेंडर है, फिर भी भारत के सबसे बड़े बैंक एसबीआई की जमा पर्ची में 50 पैसे का जिक्र नहीं है। एसबीआई की सूरजकुंड शाखा की जमा पर्ची में जो ब्योरा है, उसके मुताबिक एक, दो, पांच, दस और 20 रुपये के सिक्के का जिक्र है। आरबीआई की नियमावली के अनुसार, बैंकों की किसी भी शाखा में रोजाना 50 पैसे के 20 सिक्के जमा कराए जा सकते हैं, जिसका वास्तविक मूल्य 10 रुपये होगा।
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रोजाना बदल सकते हैं एक हजार रुपये मूल्य के सिक्के
कोई भी व्यक्ति रोजाना एक हजार रुपये मूल्य का सिक्का बैंकों से बदल सकता है। निर्धारित मूल्य का सिक्का बदलने से बैंक इंकार नहीं कर सकते हैं।
सिक्के सिक्कों की संख्या कुल मूल्य
1 रुपये 1000 1000
2 रुपये 500 1000
5 रुपये 200 1000
10 रुपये 100 1000
20 रुपये 50 1000