{"_id":"5d8d154e8ebc3e93b774f292","slug":"cm-in-aiims-and-addressing-student-gorakhpur-dehat-news-gkp3232457192","type":"story","status":"publish","title_hn":"एम्स निजी हाथों में होता तो डॉक्टर बनने के लिए दस करोड़ खर्च करने पड़ते : सीएम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एम्स निजी हाथों में होता तो डॉक्टर बनने के लिए दस करोड़ खर्च करने पड़ते : सीएम
विज्ञापन
एम्स के मेडिकल कॉलेज के व्याख्यान कक्ष में आयोजित संवाद कार्यक्रम में मंचासीन मुख्यमंत्री योगी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एम्स निजी हाथों में होता तो डॉक्टर बनने के लिए दस करोड़ खर्च करने पड़ते : सीएम
गोरखपुर। सरकार जनता के पैसे से एम्स बनाती है। यदि एम्स जैसी संस्था निजी हाथों में हो तो यूजी, पीजी करने के लिए छात्रों को कम से कम दस करोड़ रुपये खर्च करने पड़ेंगे। सरकार यह पैसा इसलिए खर्च करती है कि अच्छे डॉक्टर बन सकें। अच्छा डॉक्टर वह है जिसमें मरीज के प्रति, तीमारदार के प्रति, समाज के प्रति संवेदना हो।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एम्स में शुरू हुए एमबीबीएस प्रथम सत्र के विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि डॉक्टर यदि मरीजों के साथ संवेदना जोड़ता है तो समाज को बहुत कुछ देता है। एम्स का निरीक्षण करने पहुंचे मुख्यमंत्री ने मेडिकल ब्लॉक के ऑडिटोरियम में विद्यार्थियों को सलाह दी कि डॉक्टर बनने के बाद इंटर्नशिप के लिए सिफारिश न करें बल्कि ऐसे गांवों को एडाप्ट करें जहां चिकित्सा सेवाओं की जरूरत हो। गोरखपुर की बात करें तो शहर में पांच हजार से अधिक स्पेशलिस्ट डॉक्टर होंगे, लेकिन शहर के बाहर जाएं तो लोगों के पास चिकित्सा सुविधा ही नहीं है। हमने केजीएमयू को बलरामपुर गोद दिलाया है। केजीएमयू ने एक साथ कई गांवों में हेल्थ कैंप लगाने शुरू कर दिए हैं। केजीएमयू की तर्ज पर ही इसको विकसित करने की जरूरत है। हर एक केंद्र कुछ ऐसे सेंटर विकसित करें तो देश में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर हो जाएंगी।
विज्ञापन
गोरखपुर। सरकार जनता के पैसे से एम्स बनाती है। यदि एम्स जैसी संस्था निजी हाथों में हो तो यूजी, पीजी करने के लिए छात्रों को कम से कम दस करोड़ रुपये खर्च करने पड़ेंगे। सरकार यह पैसा इसलिए खर्च करती है कि अच्छे डॉक्टर बन सकें। अच्छा डॉक्टर वह है जिसमें मरीज के प्रति, तीमारदार के प्रति, समाज के प्रति संवेदना हो।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एम्स में शुरू हुए एमबीबीएस प्रथम सत्र के विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि डॉक्टर यदि मरीजों के साथ संवेदना जोड़ता है तो समाज को बहुत कुछ देता है। एम्स का निरीक्षण करने पहुंचे मुख्यमंत्री ने मेडिकल ब्लॉक के ऑडिटोरियम में विद्यार्थियों को सलाह दी कि डॉक्टर बनने के बाद इंटर्नशिप के लिए सिफारिश न करें बल्कि ऐसे गांवों को एडाप्ट करें जहां चिकित्सा सेवाओं की जरूरत हो। गोरखपुर की बात करें तो शहर में पांच हजार से अधिक स्पेशलिस्ट डॉक्टर होंगे, लेकिन शहर के बाहर जाएं तो लोगों के पास चिकित्सा सुविधा ही नहीं है। हमने केजीएमयू को बलरामपुर गोद दिलाया है। केजीएमयू ने एक साथ कई गांवों में हेल्थ कैंप लगाने शुरू कर दिए हैं। केजीएमयू की तर्ज पर ही इसको विकसित करने की जरूरत है। हर एक केंद्र कुछ ऐसे सेंटर विकसित करें तो देश में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर हो जाएंगी।
विज्ञापन