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गायों को दुलारा, गुड़ और बिस्किट खिलाया
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Mon, 27 Mar 2017 01:06 AM IST
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गोरखनाथ मंदिर की गौशाला में गायों को दुलारते सीएम।
- फोटो : Amar Ujala
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मुख्यमंत्री बनने के सप्ताह भर बाद गोरखपुर पहुंचे प्रदेश के मुख्यमंत्री शनिवार की रात मंदिर स्थित अपने आवास पर ही रुके। रोज की तरह वह तड़के 3.30 बजे उठ गए। पूजा-पाठ करने के बाद सुबह पांच बजे नीचे आ गए। मंदिर में भ्रमण के बाद वह गौशाला पहुंच गए। वहां गायों को उन्होंने गुड़ और बिस्किट खिलाया। उसके बाद शहर के गणमान्य और कुछ खास लोगों से मुलाकात की।
आदित्यनाथ योगी जब यहां रहते थे तो सुबह 3.30 बजे उठकर पूजा-पाठ करने के बाद मंदिर परिसर में आ जाते थे। मंदिर का भ्रमण करने और साफ-सफाई की व्यवस्था देखने के बाद वह गौशाला जाते थे और गायों को चारा के अलावा गुड़ और बिस्किट खिलाते थे पर जबसे वह मुख्यमंत्री बने हैं, उन्हें यहां आने का मौका नहीं मिला। रविवार की सुबह वह जैसे ही गौशाला पहुंचे और कुछ गायों को नाम लेकर पुकारा तो सभी गायें उनके पास दौड़ी चली आईं। उन्होंने बारी-बारी से सभी के सिर पर हाथ फेरा और उन्हें दुलारा। बछड़े और बछिया तो उन्हें घेरकर ही खड़ी रहीं। सभी को खिलाने और दुलार करने के बाद वह अपने आवास में चले गए। वहां उन्होंने जरूरी कागजात निपटाए।
सप्ताह भर बाद वह बतौर मुख्यमंत्री मंदिर के उस कमरे में थे जहां अतिथियों से मिलने के लिए वह बैठा करते थे। इस दिन उनसे मिलने शहर के प्रमुख व्यापारी और उद्योगपति पहुंचे थे। मुलाकात के दौरान उन्होंने सभी का हालचाल पूछा। यह सिलसिला 10 बजे तक चला। इसके बाद वह जलपान कर बाबा गंभीरनाथ के कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे।
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इससे पहले गौशाला में मीडिया कर्मियों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि देशी गायों के संरक्षण व संवर्धन के लिए गोरक्ष पीठ काफी पहले से कार्य कर रही है। इस गौशाला में देशी प्रजाति की हर गायें हैं। इनका धार्मिक और आर्थिक दोनों महत्व है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने हर प्रदेश में एक आदर्श गौशाला बनाने को कहा है। इससे किसानों को आर्थिक लाभ होगा।
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आदित्यनाथ योगी जब यहां रहते थे तो सुबह 3.30 बजे उठकर पूजा-पाठ करने के बाद मंदिर परिसर में आ जाते थे। मंदिर का भ्रमण करने और साफ-सफाई की व्यवस्था देखने के बाद वह गौशाला जाते थे और गायों को चारा के अलावा गुड़ और बिस्किट खिलाते थे पर जबसे वह मुख्यमंत्री बने हैं, उन्हें यहां आने का मौका नहीं मिला। रविवार की सुबह वह जैसे ही गौशाला पहुंचे और कुछ गायों को नाम लेकर पुकारा तो सभी गायें उनके पास दौड़ी चली आईं। उन्होंने बारी-बारी से सभी के सिर पर हाथ फेरा और उन्हें दुलारा। बछड़े और बछिया तो उन्हें घेरकर ही खड़ी रहीं। सभी को खिलाने और दुलार करने के बाद वह अपने आवास में चले गए। वहां उन्होंने जरूरी कागजात निपटाए।
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सप्ताह भर बाद वह बतौर मुख्यमंत्री मंदिर के उस कमरे में थे जहां अतिथियों से मिलने के लिए वह बैठा करते थे। इस दिन उनसे मिलने शहर के प्रमुख व्यापारी और उद्योगपति पहुंचे थे। मुलाकात के दौरान उन्होंने सभी का हालचाल पूछा। यह सिलसिला 10 बजे तक चला। इसके बाद वह जलपान कर बाबा गंभीरनाथ के कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे।
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इससे पहले गौशाला में मीडिया कर्मियों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि देशी गायों के संरक्षण व संवर्धन के लिए गोरक्ष पीठ काफी पहले से कार्य कर रही है। इस गौशाला में देशी प्रजाति की हर गायें हैं। इनका धार्मिक और आर्थिक दोनों महत्व है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने हर प्रदेश में एक आदर्श गौशाला बनाने को कहा है। इससे किसानों को आर्थिक लाभ होगा।