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ट्रॉफी मिली तो खिल उठे चेहरे
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Sun, 24 Apr 2016 09:26 PM IST
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चरगावां स्थित आईटीआई के दीक्षांत समारोह के दौरान पुरस्कृत किए गए विद्यार्थी।
- फोटो : mahesh kumar
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आईटीआई (राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान), चरगांवा में सम्मान समारोह (दीक्षांत) में मेधावियों को ट्रॉफी मिली तो उनके चेहरे खिल उठे। वहीं पावर कारपोरेशन में जॉब कर रहे पुरातन छात्रों को गोल्ड मेडल मिला तो वे भावुक हो गए। सभी ट्रेड में चारों सेमेस्टर में अव्वल रहने वाले विद्यार्थियों को भी मुख्य अतिथि एडीएम सिटी चंद्र प्रकाश ने सम्मानित कर उनका हौसला बढ़ाया।
रविवार को सुबह 10 बजे से ही आईटीआई परिसर में विद्यार्थियों के आने का सिलसिला शुरू हो गया। पुरातन छात्र जब आपस में मिले तो उनकी पुरानी यादें ताजा हो गई। काफी देर तक परिसर में गुजारे गए समय को एक दूसरे से साझा करते रहे। ग्रुप फोटो और सेल्फी भी खूब ली गई। एडीएम सिटी ने कहा कि ट्रेनिंग में ही आगे की मंजिल तय करने का रास्ता मिलता है। ऐसे में ट्रेनिंग के दौरान जितना परिश्रम करेंगे उसका परिणाम आगे चलकर मिलेगा।
प्रधानाचार्य राजेश राम ने कहा कि मेरी कोशिश है कि ट्रेनिंग के दौरान हर संभव सुविधाएं मुहैया कराई जाए। कार्यक्रम का संचालन विद्युत अनुदेशक दुर्गेश कुमार ने किया। इस दौरान बृजेश प्रताप सिंह, वीरेंद्र चंद्रा, अनिल कुमार यादव, सुरेंद्र गिरी, बीएल सिंह, अरविंद सिंह आदि उपस्थित थे।
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सम्मानित होने वाले टॉपर
अनूप कुमार गुप्ता, मनीष कुमार पांडेय, इंद्रासन यादव, मुनीष कुमार, मोहम्मद आदिल, अखिलेश कुमार, राधेश्याम कुशवाहा, संतोष कुमार गुप्ता, नीरज कुमार, रीना मिश्रा, सुनीता, अब्दुल हमीद, जितेंद्र चौधरी, अंकित, रीना पाल शामिल रहीं।
ट्रेनिंग के लिए नाइट ड्यूटी की
वर्ष 2000 में मां के निधन के बाद भाइयों ने घर से नाता तोड़ लिया। उम्र अधिक होने के बावजूद पिता जी किसी तरह घर कर का खर्च चला रहे थे। मेरी पढ़ाई में बाधा आने लगी तो एक कंपनी में 1800 रुपये महीने पर कंप्यूटर आपरेटर की नौकरी कर ली जो नाइट ड्यूटी थी। इसी से मेरी पढ़ाई का खर्च निकलता था। पिता ने हमेशा हौसला बढ़ाया। नियमित क्लास करता था और गुरुजनों से दिक्कतों को साझा करता था। मेरा लक्ष्य पावर कारपोरेशन में एसएसओ बनना है, इसकी तैयारी शुरू कर दी है।
- अनूप कुमार गुप्ता, टॉपर (वर्ष 2013 से 2015)
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रविवार को सुबह 10 बजे से ही आईटीआई परिसर में विद्यार्थियों के आने का सिलसिला शुरू हो गया। पुरातन छात्र जब आपस में मिले तो उनकी पुरानी यादें ताजा हो गई। काफी देर तक परिसर में गुजारे गए समय को एक दूसरे से साझा करते रहे। ग्रुप फोटो और सेल्फी भी खूब ली गई। एडीएम सिटी ने कहा कि ट्रेनिंग में ही आगे की मंजिल तय करने का रास्ता मिलता है। ऐसे में ट्रेनिंग के दौरान जितना परिश्रम करेंगे उसका परिणाम आगे चलकर मिलेगा।
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प्रधानाचार्य राजेश राम ने कहा कि मेरी कोशिश है कि ट्रेनिंग के दौरान हर संभव सुविधाएं मुहैया कराई जाए। कार्यक्रम का संचालन विद्युत अनुदेशक दुर्गेश कुमार ने किया। इस दौरान बृजेश प्रताप सिंह, वीरेंद्र चंद्रा, अनिल कुमार यादव, सुरेंद्र गिरी, बीएल सिंह, अरविंद सिंह आदि उपस्थित थे।
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सम्मानित होने वाले टॉपर
अनूप कुमार गुप्ता, मनीष कुमार पांडेय, इंद्रासन यादव, मुनीष कुमार, मोहम्मद आदिल, अखिलेश कुमार, राधेश्याम कुशवाहा, संतोष कुमार गुप्ता, नीरज कुमार, रीना मिश्रा, सुनीता, अब्दुल हमीद, जितेंद्र चौधरी, अंकित, रीना पाल शामिल रहीं।
ट्रेनिंग के लिए नाइट ड्यूटी की
वर्ष 2000 में मां के निधन के बाद भाइयों ने घर से नाता तोड़ लिया। उम्र अधिक होने के बावजूद पिता जी किसी तरह घर कर का खर्च चला रहे थे। मेरी पढ़ाई में बाधा आने लगी तो एक कंपनी में 1800 रुपये महीने पर कंप्यूटर आपरेटर की नौकरी कर ली जो नाइट ड्यूटी थी। इसी से मेरी पढ़ाई का खर्च निकलता था। पिता ने हमेशा हौसला बढ़ाया। नियमित क्लास करता था और गुरुजनों से दिक्कतों को साझा करता था। मेरा लक्ष्य पावर कारपोरेशन में एसएसओ बनना है, इसकी तैयारी शुरू कर दी है।
- अनूप कुमार गुप्ता, टॉपर (वर्ष 2013 से 2015)