{"_id":"5df14fba8ebc3e8814205a94","slug":"brd-medical-college-breki-therapy-gorakhpur-city-news-gkp3329112163","type":"story","status":"publish","title_hn":"बीआरडी मेडिकल कॉलेज में कैंसर रोगियों की ब्रेकी थेरेपी शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में कैंसर रोगियों की ब्रेकी थेरेपी शुरू
विज्ञापन
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में कैंसर रोगियों की ब्रेकी थेरेपी शुरू
मेडिकल कॉलेज। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में करीब तीन साल से बंद पड़ी ब्रेेकी थेरेपी मशीन में बुधवार को रेडियोएक्टिव पदार्थ डाल कर चालू किया गया। कैंसर ग्रस्त कोशिकाओं को सीधे रेडिएशन देने वाली इस मशीन को तीन दिन ट्रायल और ट्रेनिंग के बाद मशीन से पूर्ण रूप से कार्य लिया जाएगा।
ऑन्कोलॉजी विभाग में करीब तीन साल पहले आई ब्रेकी थेरेपी मशीन किन्ही कारणों से चालू नहीं हो सकी थी। समय बीतने के साथ इसका रेडियोएक्टिव पदार्थ समाप्त हो गया था। बुधवार को जर्मनी की फर्म बीडिग के इंजीनियर रेडियो एक्टिव पदार्थ लेकर आए। करीब साठ लाख रुपये लागत वाला रेडियो एक्टिव पदार्थ डालने के बाद अधिकारियों ने मशीन का ट्रायल शुरू किया। विभागाध्यक्ष डॉ. आरके रावत और विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. ज्ञानचंद मौर्या ने मशीन के संचालन की प्रक्रिया की बारीकियां सीखीं। डॉ. आरके रावत ने बताया कि मशीन चालू होने पर बच्चेदानी के कैंसर से जूझ रही देवरिया की अनुराजी देवी को ब्रेकी थेरेपी रेडिएशन दिया गया। मरीज पर ब्रेकी थेरेपी काफी कारगर साबित हुई।
कैंसर कोशिकाओं पर सटीक वार करती है थेरेपी
डॉ. आरके रावत के अनुसार ब्रेकी थेरेपी मशीन कैंसर कोशिकाओं को ज्यादा सटीक ढंग से रेडिएशन के जरिए नष्ट करती है। कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने की परंपरागत रेडिएशन तकनीक में दूर से रेडिएशन दिया जाता है। इससे कैंसर कोशिकाओं से प्रभावित अंग के साथ ही आसपास के अंगों की कोशिकाएं भी प्रभावित होती हैं। ब्रेकी थेरेपी में सुई के जरिए सीधे कैंसर कोशिकाओं पर रेडिएशन दिया जाता है। इससे कैंसर कोशिकाएं तो नष्ट होती हैं लेकिन आसपास के अंगों को अपेक्षाकृत काफी कम नुकसान पहुंचता है। यह थेरेपी स्तन कैंसर, सवाईकल कैंसर और प्रोस्ट्रेट कैंसर के इलाज में बेहतर परिणाम देती है।
विज्ञापन
ब्रेकी थेरेपी शुरू होने से कैंसर रोगियों को इलाज की आधुनिक सुविधा उपलब्ध हो गई है। ब्रेकी थेरेपी शुरू होने से कैंसर विभाग की सेवाएं अपग्रेड हुई हैं।
- प्रो. गणेश कुमार, प्राचार्य, बीआरडी मेडिकल कॉलेज
विज्ञापन
मेडिकल कॉलेज। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में करीब तीन साल से बंद पड़ी ब्रेेकी थेरेपी मशीन में बुधवार को रेडियोएक्टिव पदार्थ डाल कर चालू किया गया। कैंसर ग्रस्त कोशिकाओं को सीधे रेडिएशन देने वाली इस मशीन को तीन दिन ट्रायल और ट्रेनिंग के बाद मशीन से पूर्ण रूप से कार्य लिया जाएगा।
ऑन्कोलॉजी विभाग में करीब तीन साल पहले आई ब्रेकी थेरेपी मशीन किन्ही कारणों से चालू नहीं हो सकी थी। समय बीतने के साथ इसका रेडियोएक्टिव पदार्थ समाप्त हो गया था। बुधवार को जर्मनी की फर्म बीडिग के इंजीनियर रेडियो एक्टिव पदार्थ लेकर आए। करीब साठ लाख रुपये लागत वाला रेडियो एक्टिव पदार्थ डालने के बाद अधिकारियों ने मशीन का ट्रायल शुरू किया। विभागाध्यक्ष डॉ. आरके रावत और विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. ज्ञानचंद मौर्या ने मशीन के संचालन की प्रक्रिया की बारीकियां सीखीं। डॉ. आरके रावत ने बताया कि मशीन चालू होने पर बच्चेदानी के कैंसर से जूझ रही देवरिया की अनुराजी देवी को ब्रेकी थेरेपी रेडिएशन दिया गया। मरीज पर ब्रेकी थेरेपी काफी कारगर साबित हुई।
विज्ञापन
कैंसर कोशिकाओं पर सटीक वार करती है थेरेपी
डॉ. आरके रावत के अनुसार ब्रेकी थेरेपी मशीन कैंसर कोशिकाओं को ज्यादा सटीक ढंग से रेडिएशन के जरिए नष्ट करती है। कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने की परंपरागत रेडिएशन तकनीक में दूर से रेडिएशन दिया जाता है। इससे कैंसर कोशिकाओं से प्रभावित अंग के साथ ही आसपास के अंगों की कोशिकाएं भी प्रभावित होती हैं। ब्रेकी थेरेपी में सुई के जरिए सीधे कैंसर कोशिकाओं पर रेडिएशन दिया जाता है। इससे कैंसर कोशिकाएं तो नष्ट होती हैं लेकिन आसपास के अंगों को अपेक्षाकृत काफी कम नुकसान पहुंचता है। यह थेरेपी स्तन कैंसर, सवाईकल कैंसर और प्रोस्ट्रेट कैंसर के इलाज में बेहतर परिणाम देती है।
विज्ञापन
ब्रेकी थेरेपी शुरू होने से कैंसर रोगियों को इलाज की आधुनिक सुविधा उपलब्ध हो गई है। ब्रेकी थेरेपी शुरू होने से कैंसर विभाग की सेवाएं अपग्रेड हुई हैं।
- प्रो. गणेश कुमार, प्राचार्य, बीआरडी मेडिकल कॉलेज