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पांच घंटे बेड पर पड़ी रही लाश, जाम लगाने पर मेमो भेजा
गोरखप़ुर। अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 10 Feb 2016 01:26 AM IST
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गोरखपुर। मेडिकल कॉलेज के हड्डी वार्ड में भर्ती युवक की मंगलवार दोपहर मौत हो गई। मेमो न भेजने के कारण रात आठ बजे तक बेड पर उसकी लाश पड़ी रही। डॉक्टर, कर्मचारी एक-दूसरे पर मामला टाल घरवालों को परेशान करते रहे। आहत परिवार के लोगों ने रात आठ बजे मेडिकल कॉलेज के सामने गोरखपुर-महराजगंज मार्ग जाम कर दिया। हंगामा खड़ा होने पर डॉक्टर ने आनन-फानन में मेमो भेज युवक का शव मोर्चरी भेजवाया।
कौड़ीराम, पांडेयपार का रहने वाला मोनू चौधरी (22) शनिवार को अपने दोस्त चंद्रभान के साथ संतकबीरनगर गया था। शाम चार बजे लौटते समय संतकबीनगर, कोतवाली के मनियरा में दोनों ट्रक की चपेट में आ गए। चंद्रभान की मौके पर ही मौत हो गई। गंभीर रूप से घायल मोनू को परिवार के लोगों ने मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया था। मंगलवार की दोपहर तीन बजे उसकी भी मौत हो गई। परिवार के लोग शव मोर्चरी में भेजने के लिए पुलिस के पास मेमो भेजने की गुजारिश करने पहुंचे, मगर रात आठ बजे तक डॉक्टर और कर्मचारी एक-दूसरे पर मामला टालते रहे।
परेशान होकर मोनू के पिता झीनक और भाइयों ने रिश्तेदारों के साथ मेडिकल कॉलेज गेट के सामने रात 8:30 बजे जाम लगा दिया। गोरखपुर - महराजगंज मार्ग पर आवागमन ठप होने पर पहुंची गुलरिहा पुलिस ने मामले की जानकारी मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों को दी तो आनन - फानन में मेमो भेजने के साथ शव मोर्चरी में भेजवा दिया गया। एसओ गुलरिहा जयवर्द्धन सिंह ने कार्रवाई का भरोसा देकर रात 9:15 बजे जाम खत्म कराया।
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चोट के साथ मरीज इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज पहुंचा तो उसका साधारण मरीज की तरह इलाज किया। इसीलिए जब उसकी मौत हुई तो मौके पर तैनात डॉक्टरों ने डिस्चार्ज सर्टिफिकेट बना दिया। परिजनों ने पोस्टमार्टम की इच्छा जताते हुए दबाव बनाया तो बाद में पोस्टमार्टम के कागजात तैयार कर पुलिस को सुपुर्द कर दिए गए।
प्रो. सतीश कुमार, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर
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कौड़ीराम, पांडेयपार का रहने वाला मोनू चौधरी (22) शनिवार को अपने दोस्त चंद्रभान के साथ संतकबीरनगर गया था। शाम चार बजे लौटते समय संतकबीनगर, कोतवाली के मनियरा में दोनों ट्रक की चपेट में आ गए। चंद्रभान की मौके पर ही मौत हो गई। गंभीर रूप से घायल मोनू को परिवार के लोगों ने मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया था। मंगलवार की दोपहर तीन बजे उसकी भी मौत हो गई। परिवार के लोग शव मोर्चरी में भेजने के लिए पुलिस के पास मेमो भेजने की गुजारिश करने पहुंचे, मगर रात आठ बजे तक डॉक्टर और कर्मचारी एक-दूसरे पर मामला टालते रहे।
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परेशान होकर मोनू के पिता झीनक और भाइयों ने रिश्तेदारों के साथ मेडिकल कॉलेज गेट के सामने रात 8:30 बजे जाम लगा दिया। गोरखपुर - महराजगंज मार्ग पर आवागमन ठप होने पर पहुंची गुलरिहा पुलिस ने मामले की जानकारी मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों को दी तो आनन - फानन में मेमो भेजने के साथ शव मोर्चरी में भेजवा दिया गया। एसओ गुलरिहा जयवर्द्धन सिंह ने कार्रवाई का भरोसा देकर रात 9:15 बजे जाम खत्म कराया।
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चोट के साथ मरीज इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज पहुंचा तो उसका साधारण मरीज की तरह इलाज किया। इसीलिए जब उसकी मौत हुई तो मौके पर तैनात डॉक्टरों ने डिस्चार्ज सर्टिफिकेट बना दिया। परिजनों ने पोस्टमार्टम की इच्छा जताते हुए दबाव बनाया तो बाद में पोस्टमार्टम के कागजात तैयार कर पुलिस को सुपुर्द कर दिए गए।
प्रो. सतीश कुमार, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर