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जायरीन का जुटा रेला, बाले मियां का सजा मेला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Mon, 07 May 2018 12:16 AM IST
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बाले मियां के मेले में पहुंचे जायरीन जियारत करते हुए।
- फोटो : Amar Ujala
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हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक हजरत सैयद सालार मसऊद गाजी मियां रहमतउल्लाह अलैह उर्फ बाले मियां के मेले के मुख्य दिन रविवार को बहरामपुर स्थित आस्ताने पर बड़ी संख्या में जायरीन उमड़े। इस मौके पर दरगाह पर गुस्ल की रस्म के बाद परंपरागत ढंग से चादरपोशी हुई। फिर कुरआनख्वानी की गई। इसके बाद जायरीन आस्ताने पर चादर चढ़ाकर अमन-चैन की दुआ मांगते नजर आए। लोगों ने बाले मियां को नजराना-ए-अकीदत पेश कर भाईचारे का संदेश दिया।
मेले में अकीदतमंदों ने खाने-पीने, घरेलू सामान, खिलौनों आदि की दुकानों के साथ ही छोटे-बड़े झूले, जादू, लजीज व्यंजन का जमकर मजा लिया। महिलाएं सौंदर्य प्रसाधन और गृहस्थी के सामान खरीदने में मशगूल दिखीं। पुरुषों ने भी जरूरत के सामान खरीदे। इस बीच कव्वाली की मधुर धुन लोगों को सूफी मिजाज में रंग रही थी। जायरीन की भीड़ में जात-पात, मजहब के सारे बंधन टूटते नजर आए। सभी की ख्वाहिश थी, पहले दर्शन फिर मनोरंजन। जगह-जगह स्टॉल लगाए गए थे, जहां तमाम स्वयंसेवी संस्थाओं के वालंटियर लोगों की मदद को तत्पर दिखे।
हर साल जेठ के महीने में यहां मेला लगता है, जिसमें आसपास के क्षेत्रों के अलावा दूरदराज से भी भारी संख्या में जायरीन आते हैं। मेला परिसर अब पूरे महीने आबाद रहेगा। जिला प्रशासन ने भी इसे लेकर तैयारियां पूरी कर ली हैं। मेले की निगरानी कैमरों के जरिए की जा रही है।
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पूरी की लगन की रस्म
एक माह तक चलने वाले मेले के मुख्य दिन रविवार को लहबर व कनूरी चढ़ाई गई। पलंग-पीढ़ी देर रात उठी। इसमें जायरीन नाचते-गाते आस्ताने पर पहुंचे और लगन की रस्म पूरी की। जिन लोगों की मन्नतें पूरी हो गई थीं, उन्होंने मन्नत उतारी। लोगों ने चने की दाल, अखियां, मुर्गा, चावल आदि पकाकर फातिहा दिलाई।
रात तक कम न हुई भीड़
आस्ताने पर लोगों की लंबी लाइन सुबह से ही लग गई थी। देर रात तक यहां आकर लोग मन्नतें मांगते रहे। आस्ताने पर देश में शांति, खुशहाली की दुआएं मांगी गईं। आलम यह रहा कि वक्त बीतने के साथ आस्ताने पर जायरीन बढ़ते गए। रात में मेला स्थल जायरीन की भीड़ से खचाखच रहा।
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मेले में अकीदतमंदों ने खाने-पीने, घरेलू सामान, खिलौनों आदि की दुकानों के साथ ही छोटे-बड़े झूले, जादू, लजीज व्यंजन का जमकर मजा लिया। महिलाएं सौंदर्य प्रसाधन और गृहस्थी के सामान खरीदने में मशगूल दिखीं। पुरुषों ने भी जरूरत के सामान खरीदे। इस बीच कव्वाली की मधुर धुन लोगों को सूफी मिजाज में रंग रही थी। जायरीन की भीड़ में जात-पात, मजहब के सारे बंधन टूटते नजर आए। सभी की ख्वाहिश थी, पहले दर्शन फिर मनोरंजन। जगह-जगह स्टॉल लगाए गए थे, जहां तमाम स्वयंसेवी संस्थाओं के वालंटियर लोगों की मदद को तत्पर दिखे।
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हर साल जेठ के महीने में यहां मेला लगता है, जिसमें आसपास के क्षेत्रों के अलावा दूरदराज से भी भारी संख्या में जायरीन आते हैं। मेला परिसर अब पूरे महीने आबाद रहेगा। जिला प्रशासन ने भी इसे लेकर तैयारियां पूरी कर ली हैं। मेले की निगरानी कैमरों के जरिए की जा रही है।
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पूरी की लगन की रस्म
एक माह तक चलने वाले मेले के मुख्य दिन रविवार को लहबर व कनूरी चढ़ाई गई। पलंग-पीढ़ी देर रात उठी। इसमें जायरीन नाचते-गाते आस्ताने पर पहुंचे और लगन की रस्म पूरी की। जिन लोगों की मन्नतें पूरी हो गई थीं, उन्होंने मन्नत उतारी। लोगों ने चने की दाल, अखियां, मुर्गा, चावल आदि पकाकर फातिहा दिलाई।
रात तक कम न हुई भीड़
आस्ताने पर लोगों की लंबी लाइन सुबह से ही लग गई थी। देर रात तक यहां आकर लोग मन्नतें मांगते रहे। आस्ताने पर देश में शांति, खुशहाली की दुआएं मांगी गईं। आलम यह रहा कि वक्त बीतने के साथ आस्ताने पर जायरीन बढ़ते गए। रात में मेला स्थल जायरीन की भीड़ से खचाखच रहा।