{"_id":"5dc719628ebc3e5b167b370c","slug":"ayodhya-decision-on-ram-mandir-gorakhpur-city-news-gkp328670619","type":"story","status":"publish","title_hn":"गोरखपुर निवासी जज कृष्ण मोहन ने खुलवाया था अयोध्या मंदिर का ताला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गोरखपुर निवासी जज कृष्ण मोहन ने खुलवाया था अयोध्या मंदिर का ताला
विज्ञापन
अयोध्या मामले के साथ जज कृष्ण मोहन
गोरखपुर निवासी जज कृष्ण मोहन ने खुलवाया था अयोध्या मंदिर का ताला
शिवम सिंह
गोरखपुर। अयोध्या में पूजा-पाठ के लिए एक फरवरी 1986 को मंदिर का ताला खोलने का फैसला देन वाले जज कृष्ण मोहन पांडेय गोरखपुर के ही रहने वाले थे। तब वह फैजाबाद जिला जज के पद पर थे। हालांकि इस आदेश के बाद उनकी पदोन्नति रुक गई थी। बताते है कि बाद में जब केंद्र की सरकार बदली तब ही उनके पदोन्नति की फाइल को मंजूरी मिली और वह हाईकोर्ट के जज बनाए गए।
गोरखपुर के अलहदादपुर निवासी कृष्ण मोहन पांडेय के भतीजे और वरिष्ठ पत्रकार सुजीत पांडेय बताते हैं कि फैसले के दो साल बाद वरिष्ठता क्रम को देखते हुए न्यायपालिका की ओर से उन्हें हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की गई, मगर 1988 से लेकर जनवरी 1991 तक उन्हें प्रोन्नत नहीं किया गया। 13 सितंबर 1990 को विश्व हिंदू परिषद अधिवक्ता संघ के महासचिव हरिशंकर जैन ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की और कृष्ण मोहन पांडेय को हाईकोर्ट प्रोन्नत करने का आदेश मांगा। इस मामले में दस अन्य अधिवक्ताओं ने भी याचिका डाली। बाद में केंद्रीय कमेटी ने फाइल को विचार के मुख्य न्यायाधीश के पास भेजा, जिसके बाद कृष्ण मोहन पांडेय को हाईकोर्ट में पदोन्नति मिली।
...
दीवानी कचहरी से शुरू की थी वकालत
जज कृष्ण मोहन पांडेय के बेटे और हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश पांडेय बताते हैं कि 1958 में गोरखपुर की दीवानी कचहरी से ही पिता ने वकालत की शुरुआत की थी। फिर 1960 में उनका चयन राज्य न्यायिक सेवा परीक्षा में हो गया। यूपी में उन्होंने टॉप किया था। भाषा में उन्होंने 50 में 50 अंक प्राप्त किए थे जो रिकॉर्ड आज भी बरकरार है।
विज्ञापन
..
बेटे ने अयोध्या प्रकरण की हाईकोर्ट में की थी पैरवी
राकेश पांडेय बताते हैं कि उन्होंने ही अयोध्या प्रकरण की हाईकोर्ट में पैरवी की थी। वरिष्ठ अधिवक्ता व पूर्व मंत्री सुब्रमण्यम स्वामी, कर्नाटक हाईकोर्ट के अधिवक्ता जी राव गोपालम के साथ राकेश ने हाईकोर्ट में अयोध्या प्रकरण का केस काफी दिनों तक लड़े थे।
विज्ञापन
शिवम सिंह
गोरखपुर। अयोध्या में पूजा-पाठ के लिए एक फरवरी 1986 को मंदिर का ताला खोलने का फैसला देन वाले जज कृष्ण मोहन पांडेय गोरखपुर के ही रहने वाले थे। तब वह फैजाबाद जिला जज के पद पर थे। हालांकि इस आदेश के बाद उनकी पदोन्नति रुक गई थी। बताते है कि बाद में जब केंद्र की सरकार बदली तब ही उनके पदोन्नति की फाइल को मंजूरी मिली और वह हाईकोर्ट के जज बनाए गए।
गोरखपुर के अलहदादपुर निवासी कृष्ण मोहन पांडेय के भतीजे और वरिष्ठ पत्रकार सुजीत पांडेय बताते हैं कि फैसले के दो साल बाद वरिष्ठता क्रम को देखते हुए न्यायपालिका की ओर से उन्हें हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की गई, मगर 1988 से लेकर जनवरी 1991 तक उन्हें प्रोन्नत नहीं किया गया। 13 सितंबर 1990 को विश्व हिंदू परिषद अधिवक्ता संघ के महासचिव हरिशंकर जैन ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की और कृष्ण मोहन पांडेय को हाईकोर्ट प्रोन्नत करने का आदेश मांगा। इस मामले में दस अन्य अधिवक्ताओं ने भी याचिका डाली। बाद में केंद्रीय कमेटी ने फाइल को विचार के मुख्य न्यायाधीश के पास भेजा, जिसके बाद कृष्ण मोहन पांडेय को हाईकोर्ट में पदोन्नति मिली।
विज्ञापन
...
दीवानी कचहरी से शुरू की थी वकालत
जज कृष्ण मोहन पांडेय के बेटे और हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश पांडेय बताते हैं कि 1958 में गोरखपुर की दीवानी कचहरी से ही पिता ने वकालत की शुरुआत की थी। फिर 1960 में उनका चयन राज्य न्यायिक सेवा परीक्षा में हो गया। यूपी में उन्होंने टॉप किया था। भाषा में उन्होंने 50 में 50 अंक प्राप्त किए थे जो रिकॉर्ड आज भी बरकरार है।
विज्ञापन
..
बेटे ने अयोध्या प्रकरण की हाईकोर्ट में की थी पैरवी
राकेश पांडेय बताते हैं कि उन्होंने ही अयोध्या प्रकरण की हाईकोर्ट में पैरवी की थी। वरिष्ठ अधिवक्ता व पूर्व मंत्री सुब्रमण्यम स्वामी, कर्नाटक हाईकोर्ट के अधिवक्ता जी राव गोपालम के साथ राकेश ने हाईकोर्ट में अयोध्या प्रकरण का केस काफी दिनों तक लड़े थे।