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एयरफोर्स के पास बने 5000 मकान जल्द होंगे वैध
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एयरफोर्स के पास बने 5000 मकान जल्द होंगे वैध
गोरखपुर। एयरफोर्स स्टेशन के पास बसी सैनिक कुंज, सैनिक विहार, अवध विहार, पवन विहार समेत आधा दर्जन कालोनियों के पांच हजार से अधिक मकान इस दिवाली तक वैध हो सकेंगे। यही नहीं, जो जमीनें खाली पड़ी हैं, उनपर निर्माण के लिए मानचित्र भी स्वीकृ त हो सकेगा। यह संभव होगा एयरफोर्स के पास तय नो कंस्ट्रक्शन जोन का दायरा घटने से। पहले एयरफोर्स की बाउंड्री से चारों तरफ नौ सौ मीटर का इलाका नो कंस्ट्रक्शन जोन था, मगर ज्यादातर इलाकों में अब यह प्रतिबंध सौ मीटर तक ही रहेगा ।
अब अक्टूबर में प्रस्तावित बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव को एजेंडे में रखेगा। वहां से हरी झंडी मिलते ही संबंधित इलाकों में निर्माण के लिए मानचित्र स्वीकृत होने लगेंगे। साथ ही कंपाउंडिंग के साथ पुराने निर्माण के भी मानचित्र स्वीकृत कराए जा सकेंगे। प्राधिकरण के मुताबिक प्रतिबंध का दायरा घटाने को लेकर जीडीए की ओर से जो ले-आउट एयरफोर्स को भेजा गया था, उसपर दूसरी बार भी मंजूरी मिल गई है। एयरफोर्स प्रशासन एक बार पहले भी अनापत्ति प्रमाण पत्र दे चुका है। मगर इलाकेवार इसे और स्पष्ट करने के लिए जीडीए ने दोबारा ले-आउट भेजा था। प्राधिकरण
बोर्ड बैठक में दोबारा मंजूरी पर बनी थी सहमति
30 जुलाई को हुई जीडीए बोर्ड बैठक में तय हुआ था कि जीडीए अपनी महायोजना 2021 के मानचित्र में एयरफोर्स के पास नो कंस्ट्रक्शन जोन में कौन-कौन से इलाके 900 मीटर और कौन से 100 मीटर में आएंगे, उसे चिह्ति कर एयरफोर्स को भेजेगा। वहां से रजामंदी मिलते ही नो कंस्ट्रक्शन जोन का दायरा बदल दिया जाएगा। 900 मीटर के प्रतिबंध के दायरे को लेकर शुरू से विवाद चल रहा था। इसपर जीडीए के अफसरों ने एयरफोर्स को पत्र लिख पूछा था कि वे कहां तक नो कंस्ट्रक्शन जोन चाहते हैं। एयरफोर्स ने जवाब में जो अपनी रिपोर्ट प्राधिकरण को भेजी थी उसमें कुछ ही इलाकों में उन्होंने 900 मीटर के प्रतिबंध की जरूरत बताई है। उन्होंने यह दायरा मानचित्र पर इंगित कर भेजा था। ऐसे में कोई गड़बड़ी न हो इसलिए इसे इलाकेवार स्पष्ट करने के लिए बोर्ड ने महायोजना के मानचित्र पर कलर कर एयरफोर्स को भेजा था।
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कौन से इलाके 900 मीटर में आएंगे और कौन से 100 में। इसे इलाकेवार कलर कर ले-आउट की प्रति एयरफोर्स प्रशासन के पास भेजी गई थी। दो दिन पहले ही एयरफोर्स से दोबारा स्वीकृति मिलने की मौखिक सूचना मिली। हालांकि अभी लिखित कॉपी नहीं मिली है। कॉपी मिलते ही प्रतिबंध का दायरा बदलने की कवायद शुरू हो जाएगी। अगले महीने बोर्ड बैठक होगी। एजेंडे में इसे शामिल किया जाएगा। यहां से हरी झंडी मिलते ही मानचित्र स्वीकृति किए जाने लगेंगे। - राम सिंह गौतम, सचिव, जीडीए
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गोरखपुर। एयरफोर्स स्टेशन के पास बसी सैनिक कुंज, सैनिक विहार, अवध विहार, पवन विहार समेत आधा दर्जन कालोनियों के पांच हजार से अधिक मकान इस दिवाली तक वैध हो सकेंगे। यही नहीं, जो जमीनें खाली पड़ी हैं, उनपर निर्माण के लिए मानचित्र भी स्वीकृ त हो सकेगा। यह संभव होगा एयरफोर्स के पास तय नो कंस्ट्रक्शन जोन का दायरा घटने से। पहले एयरफोर्स की बाउंड्री से चारों तरफ नौ सौ मीटर का इलाका नो कंस्ट्रक्शन जोन था, मगर ज्यादातर इलाकों में अब यह प्रतिबंध सौ मीटर तक ही रहेगा ।
अब अक्टूबर में प्रस्तावित बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव को एजेंडे में रखेगा। वहां से हरी झंडी मिलते ही संबंधित इलाकों में निर्माण के लिए मानचित्र स्वीकृत होने लगेंगे। साथ ही कंपाउंडिंग के साथ पुराने निर्माण के भी मानचित्र स्वीकृत कराए जा सकेंगे। प्राधिकरण के मुताबिक प्रतिबंध का दायरा घटाने को लेकर जीडीए की ओर से जो ले-आउट एयरफोर्स को भेजा गया था, उसपर दूसरी बार भी मंजूरी मिल गई है। एयरफोर्स प्रशासन एक बार पहले भी अनापत्ति प्रमाण पत्र दे चुका है। मगर इलाकेवार इसे और स्पष्ट करने के लिए जीडीए ने दोबारा ले-आउट भेजा था। प्राधिकरण
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बोर्ड बैठक में दोबारा मंजूरी पर बनी थी सहमति
30 जुलाई को हुई जीडीए बोर्ड बैठक में तय हुआ था कि जीडीए अपनी महायोजना 2021 के मानचित्र में एयरफोर्स के पास नो कंस्ट्रक्शन जोन में कौन-कौन से इलाके 900 मीटर और कौन से 100 मीटर में आएंगे, उसे चिह्ति कर एयरफोर्स को भेजेगा। वहां से रजामंदी मिलते ही नो कंस्ट्रक्शन जोन का दायरा बदल दिया जाएगा। 900 मीटर के प्रतिबंध के दायरे को लेकर शुरू से विवाद चल रहा था। इसपर जीडीए के अफसरों ने एयरफोर्स को पत्र लिख पूछा था कि वे कहां तक नो कंस्ट्रक्शन जोन चाहते हैं। एयरफोर्स ने जवाब में जो अपनी रिपोर्ट प्राधिकरण को भेजी थी उसमें कुछ ही इलाकों में उन्होंने 900 मीटर के प्रतिबंध की जरूरत बताई है। उन्होंने यह दायरा मानचित्र पर इंगित कर भेजा था। ऐसे में कोई गड़बड़ी न हो इसलिए इसे इलाकेवार स्पष्ट करने के लिए बोर्ड ने महायोजना के मानचित्र पर कलर कर एयरफोर्स को भेजा था।
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कौन से इलाके 900 मीटर में आएंगे और कौन से 100 में। इसे इलाकेवार कलर कर ले-आउट की प्रति एयरफोर्स प्रशासन के पास भेजी गई थी। दो दिन पहले ही एयरफोर्स से दोबारा स्वीकृति मिलने की मौखिक सूचना मिली। हालांकि अभी लिखित कॉपी नहीं मिली है। कॉपी मिलते ही प्रतिबंध का दायरा बदलने की कवायद शुरू हो जाएगी। अगले महीने बोर्ड बैठक होगी। एजेंडे में इसे शामिल किया जाएगा। यहां से हरी झंडी मिलते ही मानचित्र स्वीकृति किए जाने लगेंगे। - राम सिंह गौतम, सचिव, जीडीए