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37 कॉलेजों के संबद्धता का अध्याय बंद
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Fri, 01 Jul 2016 08:32 PM IST
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गोरखपुर यूनिवर्सिटी
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संबद्धता मामले में फंसे 37 कॉलेजों को बड़ा झटका लगा है। 2015-16 सत्र में उच्च शिक्षा अधिकारी कार्यालय से गोरखपुर यूनिवर्सिटी तक फाइल देर से पहुंचने के मामले में फंसे इन कॉलेजों को सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई है। इसके साथ ही इन कॉलेजों की संबद्धता का अध्याय बंद हो गया।
37 कॉलेजों में एक अनुरागी देवी महाविद्यालय प्रबंधन की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि ऐसे कॉलेजों को संबद्धता नहीं दी जा सकती, जिन्होंने समय-सारिणी का पालन न किया हो। बिना संबद्धता के इन कॉलेजों द्वारा विद्यार्थियों के प्रवेश लेने पर भी सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई और कहा कि ऐसे प्रवेश छात्रों को धोखा देने जैसा है। यह एक तरह की बीमारी बन गई है, जो बेहद खतरनाक है।
क्या है मामला
मामला सत्र 2015-16 के गोरखपुर यूनिवर्सिटी से संबद्ध उन 37 कॉलेजों का है, जिन्हें यूनिवर्सिटी ने संबद्धता देने से इन्कार कर दिया था। इसकी वजह निर्धारित 15 अप्रैल तक संबद्धता की फाइल यूनिवर्सिटी में नहीं पहुंचना था। इनमें से 25 कॉलेज स्थाई संबद्धता के दावेदार थे, जबकि 12 कॉलेज अस्थाई संबद्धता के। उधर इन कॉलेजों ने संबद्धता की अनुशंसा में प्रवेश भी ले लिया। जब कॉलेजों को यूनिवर्सिटी प्रशासन से राहत नहीं मिली तो उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली, लेकिन वहां पहली ही तारीख में याचिका खारिज हो गई। ऐसे में एक कॉलेज ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई थी।
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अपवाद बता शासन ने की थी अनुशंसा
यूनिवर्सिटी से निराशा मिलने पर कॉलेजों ने शासन में भी अपना पक्ष रखा था, जिस पर प्रदेश शासन ने सहृदयता से विचार किया। कॉलेजों का पक्ष सुनने के बाद शासन की ओर यूनिवर्सिटी को एक पत्र भेजा गया, जिसमें प्रकरण को अपवाद मानते हुए संबद्धता देने की अनुशंसा की गई थी। बावजूद इसके यूनिवर्सिटी ने साफ तौर पर कह दिया कि समय-सारिणी का किसी भी सूरत में उल्लंघन नहीं किया जा सकता।
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37 कॉलेजों में एक अनुरागी देवी महाविद्यालय प्रबंधन की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि ऐसे कॉलेजों को संबद्धता नहीं दी जा सकती, जिन्होंने समय-सारिणी का पालन न किया हो। बिना संबद्धता के इन कॉलेजों द्वारा विद्यार्थियों के प्रवेश लेने पर भी सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई और कहा कि ऐसे प्रवेश छात्रों को धोखा देने जैसा है। यह एक तरह की बीमारी बन गई है, जो बेहद खतरनाक है।
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क्या है मामला
मामला सत्र 2015-16 के गोरखपुर यूनिवर्सिटी से संबद्ध उन 37 कॉलेजों का है, जिन्हें यूनिवर्सिटी ने संबद्धता देने से इन्कार कर दिया था। इसकी वजह निर्धारित 15 अप्रैल तक संबद्धता की फाइल यूनिवर्सिटी में नहीं पहुंचना था। इनमें से 25 कॉलेज स्थाई संबद्धता के दावेदार थे, जबकि 12 कॉलेज अस्थाई संबद्धता के। उधर इन कॉलेजों ने संबद्धता की अनुशंसा में प्रवेश भी ले लिया। जब कॉलेजों को यूनिवर्सिटी प्रशासन से राहत नहीं मिली तो उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली, लेकिन वहां पहली ही तारीख में याचिका खारिज हो गई। ऐसे में एक कॉलेज ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई थी।
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अपवाद बता शासन ने की थी अनुशंसा
यूनिवर्सिटी से निराशा मिलने पर कॉलेजों ने शासन में भी अपना पक्ष रखा था, जिस पर प्रदेश शासन ने सहृदयता से विचार किया। कॉलेजों का पक्ष सुनने के बाद शासन की ओर यूनिवर्सिटी को एक पत्र भेजा गया, जिसमें प्रकरण को अपवाद मानते हुए संबद्धता देने की अनुशंसा की गई थी। बावजूद इसके यूनिवर्सिटी ने साफ तौर पर कह दिया कि समय-सारिणी का किसी भी सूरत में उल्लंघन नहीं किया जा सकता।