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वकालत नोबेल पेशा, ठेकेदारी नहीं: जस्टिस अग्रवाल
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Sat, 02 Jul 2016 07:53 PM IST
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दीवानी कचहरी में वीडियो कांफ्रेंसिंग हाल का लोकार्पण करते प्रशासनिक न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल साथ में जिला जज सीके कुलश्रेष्ठ ।
- फोटो : shivharsh
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वकालत एक नोबेल पेशा है ठेकेदारी नहीं। नोबेल पेशा इसलिए है कि इसमें पैसों की प्रमुखता नहीं होती। मगर वर्तमान में कुछ परिस्थितियां बदली हैं और पैसों को प्रमुखता मिलने लगा है। अब फीस तय कर काम कराने का ठेका लिया जाने लगा है जो गलत है।
उक्त बातें इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति और गोरखपुर के प्रशासनिक न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने बार एसोसिएशन सिविल कोर्ट में आयोजित सम्मान समारोह में कही। इसके पूर्व उन्होंने सिविल कोर्ट में वीडियो कांफ्रेंसिंग हाल का उद्घाटन किया और स्क्रीन पर जेल से कैदियों की पेशी देखी। इसके अलावा एडीआर भवन का लोकार्पण और सीसीटीवी निगरानी कक्ष का शिलान्यास भी किया।
समारोह में अधिवक्ताओं और न्यायिक अधिकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मुकदमों के निस्तारण में देरी की एकमात्र वजह मुंसिफ की कमी नहीं है। हाईकोर्ट में भी जजों की कमी है फिर भी निस्तारण दर ज्यादा है। तकरीबन छह सौ मुंसिफों की नियुक्तियां लंबित हैं। न्याय अगर देर से होगा तो न्याय नहीं होगा। कानून व्यवस्था प्रभावित होगी। कानून व्यवस्था प्रभावित हुई तो अपराध बढ़ेगा। हम अधिवक्ताओं के बुनियादी सुविधाओं के प्रति जागरूक हैं। यहां अधिवक्ता चैंबर के लिए बहुमंजिली इमारत की जरूरत हमें महसूस हो रही है। वातावरण के मुताबिक बुनियादी सुविधाएं हम उपलब्ध कराने का प्रयास करेंगे। न्यायिक अधिकारियों से यदि कोई दिक्कत हो तो हमें बताएं हम समाधान करेंगे।
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समारोह की अध्यक्षता बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मधुसूदन त्रिपाठी और संचालन मंत्री जितेंद्र धर दूबे ने किया। समारोह को जनपद न्यायाधीश सीके कुलश्रेष्ठ, वरिष्ठ अधिवक्ता वीरेंद्र बहादुर खरे, अशोक नरायन धर दूबे, बृज विहारी लाल श्रीवास्तव, डॉ. सुभाष शुक्ला, धीरेंद्र दूबे ने भी संबोधित किया।
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उक्त बातें इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति और गोरखपुर के प्रशासनिक न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने बार एसोसिएशन सिविल कोर्ट में आयोजित सम्मान समारोह में कही। इसके पूर्व उन्होंने सिविल कोर्ट में वीडियो कांफ्रेंसिंग हाल का उद्घाटन किया और स्क्रीन पर जेल से कैदियों की पेशी देखी। इसके अलावा एडीआर भवन का लोकार्पण और सीसीटीवी निगरानी कक्ष का शिलान्यास भी किया।
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समारोह में अधिवक्ताओं और न्यायिक अधिकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मुकदमों के निस्तारण में देरी की एकमात्र वजह मुंसिफ की कमी नहीं है। हाईकोर्ट में भी जजों की कमी है फिर भी निस्तारण दर ज्यादा है। तकरीबन छह सौ मुंसिफों की नियुक्तियां लंबित हैं। न्याय अगर देर से होगा तो न्याय नहीं होगा। कानून व्यवस्था प्रभावित होगी। कानून व्यवस्था प्रभावित हुई तो अपराध बढ़ेगा। हम अधिवक्ताओं के बुनियादी सुविधाओं के प्रति जागरूक हैं। यहां अधिवक्ता चैंबर के लिए बहुमंजिली इमारत की जरूरत हमें महसूस हो रही है। वातावरण के मुताबिक बुनियादी सुविधाएं हम उपलब्ध कराने का प्रयास करेंगे। न्यायिक अधिकारियों से यदि कोई दिक्कत हो तो हमें बताएं हम समाधान करेंगे।
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समारोह की अध्यक्षता बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मधुसूदन त्रिपाठी और संचालन मंत्री जितेंद्र धर दूबे ने किया। समारोह को जनपद न्यायाधीश सीके कुलश्रेष्ठ, वरिष्ठ अधिवक्ता वीरेंद्र बहादुर खरे, अशोक नरायन धर दूबे, बृज विहारी लाल श्रीवास्तव, डॉ. सुभाष शुक्ला, धीरेंद्र दूबे ने भी संबोधित किया।