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हेपेटाइटिस जांच के नाम पर ठगे जा रहे मरीज
Gorakhpur
Updated Tue, 28 Oct 2014 05:30 AM IST
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गोरखपुर। हेपेटाइटिस सी की जांच में इस्तेमाल होने वाली किट जिला अस्पताल में दस दिन से खत्म है। इसका फायदा वहां की पैथॉलजी में सक्रिय दलाल उठा रहे हैं। वे मरीजों से दो से चार सौ रुपये लेकर अस्पताल की पर्ची पर जांच रिपोर्ट बनाकर दे रहे हैं। इसका खुलासा सोमवार को तब हुआ, जब एक महिला ऐसी ही जांच रिपोर्ट लेकर एसआईसी के पास पहुंच गई। उसने बताया कि जांच अस्पताल की पैथॉलजी में ही हुई है।
महावीर छपरा की शशिकला का ऑपरेशन होना है। जिसके पहले उन्हें कुछ जरूरी जांच कराने को कहा गया। जिला अस्पताल की पैथॉलजी में अन्य जांचें तो हो गईं लेकिन हेपेटाइटिस सी की जांच के लिए वहां मौजूद एक व्यक्ति ने 250 रुपये की मांग की। शशिकला ने रुपये देकर जांच करा ली और रसीद मांगा तो देने से इन्कार कर दिया गया। जांच रिपोर्ट लेकर वह एसआईसी के पास पहुंचीं। क्योंकि एसआईसी एनेस्थीसिया विशेषज्ञ हैं इस कारण उनको भी रिपोर्ट लगानी थी। एसआईसी ने हेपेटाइटिस सी की जांच रिपोर्ट अस्पताल की पर्ची पर लिखी देखी, जबकि अस्पताल में हेपेटाइटिस सी की जांच किट नहीं है। उन्होंने शशिकला से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल से ही जांच कराई है। रसीद के बारे में पूछने पर कहा कि मांगने पर भी नहीं दी गई। इस पर एसआईसी ने शशिकला से जांच करने वाले से रसीद मांग कर लाने को कहा और उनके साथ एक कर्मचारी भी भेजा लेकिन दलाल नहीं मिला। इस दौरान एसआईसी के सामने दो और मरीज ऐसी ही रिपोर्ट लेकर पहुंचे। एसआईसी डॉ. एचआर यादव का कहना है कि इस तरह के कई मामले सामने आए हैं। जांच कराई जा रही है। दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
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जांच की प्रमाणिकता पर सवाल
गोरखपुर। कुछ मरीजों ने बताया कि उनके ब्लड का सैंपल लिए बिना ही निगेटिव जांच रिपोर्ट दे दी गई। अभी कुछ दिनों पहले ऐसी ही एक गलत रिपोर्ट के कारण हेपेटाइटिस बी पॉजीटिव मरीज का ऑपरेशन कर दिया गया था, वह भी बिना सावधानी बरते।
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महावीर छपरा की शशिकला का ऑपरेशन होना है। जिसके पहले उन्हें कुछ जरूरी जांच कराने को कहा गया। जिला अस्पताल की पैथॉलजी में अन्य जांचें तो हो गईं लेकिन हेपेटाइटिस सी की जांच के लिए वहां मौजूद एक व्यक्ति ने 250 रुपये की मांग की। शशिकला ने रुपये देकर जांच करा ली और रसीद मांगा तो देने से इन्कार कर दिया गया। जांच रिपोर्ट लेकर वह एसआईसी के पास पहुंचीं। क्योंकि एसआईसी एनेस्थीसिया विशेषज्ञ हैं इस कारण उनको भी रिपोर्ट लगानी थी। एसआईसी ने हेपेटाइटिस सी की जांच रिपोर्ट अस्पताल की पर्ची पर लिखी देखी, जबकि अस्पताल में हेपेटाइटिस सी की जांच किट नहीं है। उन्होंने शशिकला से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल से ही जांच कराई है। रसीद के बारे में पूछने पर कहा कि मांगने पर भी नहीं दी गई। इस पर एसआईसी ने शशिकला से जांच करने वाले से रसीद मांग कर लाने को कहा और उनके साथ एक कर्मचारी भी भेजा लेकिन दलाल नहीं मिला। इस दौरान एसआईसी के सामने दो और मरीज ऐसी ही रिपोर्ट लेकर पहुंचे। एसआईसी डॉ. एचआर यादव का कहना है कि इस तरह के कई मामले सामने आए हैं। जांच कराई जा रही है। दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
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जांच की प्रमाणिकता पर सवाल
गोरखपुर। कुछ मरीजों ने बताया कि उनके ब्लड का सैंपल लिए बिना ही निगेटिव जांच रिपोर्ट दे दी गई। अभी कुछ दिनों पहले ऐसी ही एक गलत रिपोर्ट के कारण हेपेटाइटिस बी पॉजीटिव मरीज का ऑपरेशन कर दिया गया था, वह भी बिना सावधानी बरते।
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