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रेलवे की लापरवाही से कइयों की छूटी ट्रेन
Gorakhpur
Updated Tue, 28 Oct 2014 05:30 AM IST
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गोरखपुर। इलाहाबाद जंक्शन पर रविवार की रात कई यात्रियों को रेलवे की लापरवाही का खामियाजा भुगतना पड़ा। वेटिंग ज्यादा होने के कारण गोरखपुर आने वाले चौरीचौरा एक्सप्रेस में एक्स्ट्रा कोच तो लगा दिया गया लेकिन बोगी में उसका नंबर नहीं लिखा था। इसके चलते कई यात्री अपना कोच नहीं ढूंढ सके और उनकी ट्रेन छूट गई।
इसी ट्रेन में रिजर्वेशन कराने वाले यात्री मानवेंद्र सिंह ने फोन पर बताया कि उनका सीट नंबर आरएसी-32 था। जब स्टेशन पहुंचे तो पता चला कि उनकी सीट कंफर्म हो गई। उन्हें स्लीपर के पी-1 एक्स्ट्रा कोच में 47 नंबर बर्थ एलाट हुई है। लेकिन जब ट्रेन स्टेशन पर पहुंचे तो पी-1 नाम का कोई कोच नहीं मिला। काफी देर तक वह कोच की तलाश में इधर-उधर दौड़ते रहे। जब उस नंबर का कोच नहीं मिला तो मजबूरन दूसरे डिब्बे में चढ़ गए। उन्होंने बताया कि थोड़ी देर बाद जब ट्रेन दारागंज स्टेशन पर रुकी तो वह उतरकर अपना डिब्बा तलाश करने लगे। यात्रियों ने सभी डिब्बे अंदर से लॉक कर रखे थे। काफी भागदौड़ करने के बाद किसी ने दरवाजे नहीं खोले न ही कोई टीटीई मदद करने के लिए आया। देखते ही देखते ट्रेन छूट गई। जब उन्होंने इसकी शिकायत दारागंज स्टेशन पर की तो वहां मौजूद स्टेशन मास्टर उल्टे उन्हें ही सीख देने लगे। उन्होंने कहा कि यह टेक्निकल हॉल्ट है आपको यहां उतरना नहंीं चाहिए था। मानवेंद्र सिंह अकेले नहीं है। इस आपाधापी में कुछ और यात्रियों की ट्रेन छूट गई।
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इसी ट्रेन में रिजर्वेशन कराने वाले यात्री मानवेंद्र सिंह ने फोन पर बताया कि उनका सीट नंबर आरएसी-32 था। जब स्टेशन पहुंचे तो पता चला कि उनकी सीट कंफर्म हो गई। उन्हें स्लीपर के पी-1 एक्स्ट्रा कोच में 47 नंबर बर्थ एलाट हुई है। लेकिन जब ट्रेन स्टेशन पर पहुंचे तो पी-1 नाम का कोई कोच नहीं मिला। काफी देर तक वह कोच की तलाश में इधर-उधर दौड़ते रहे। जब उस नंबर का कोच नहीं मिला तो मजबूरन दूसरे डिब्बे में चढ़ गए। उन्होंने बताया कि थोड़ी देर बाद जब ट्रेन दारागंज स्टेशन पर रुकी तो वह उतरकर अपना डिब्बा तलाश करने लगे। यात्रियों ने सभी डिब्बे अंदर से लॉक कर रखे थे। काफी भागदौड़ करने के बाद किसी ने दरवाजे नहीं खोले न ही कोई टीटीई मदद करने के लिए आया। देखते ही देखते ट्रेन छूट गई। जब उन्होंने इसकी शिकायत दारागंज स्टेशन पर की तो वहां मौजूद स्टेशन मास्टर उल्टे उन्हें ही सीख देने लगे। उन्होंने कहा कि यह टेक्निकल हॉल्ट है आपको यहां उतरना नहंीं चाहिए था। मानवेंद्र सिंह अकेले नहीं है। इस आपाधापी में कुछ और यात्रियों की ट्रेन छूट गई।
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