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धन की कमी नहीं, फिर भी सड़क बदहाल
Gorakhpur
Updated Mon, 20 Oct 2014 05:30 AM IST
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गोरखपुर। लोक निर्माण विभाग के पास पर्याप्त धन होने के बावजूद बड़हलगंज -पटनाघाट मार्ग बदहाल है। इसकी वजह से लोगों को खासी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन विभाग ने चुप्पी साध रखी है।
घाघरा-और राप्ती नदी के संगम पर गोरखपुर-देवरिया की सीमा पर पक्का पुल बनाया गया है। राप्ती नदी पर बनने वाला यह जिले का दूसरा पुल है। बनारस की तरफ से होकर आने वाले वाहन इस पुल को पार कर बिहार जाते हैं। काफी पुरानी सड़क होने तथा वाहनों का लोड बढ़ने के नाते अक्सर बरसात के दिनों में इस रास्ते को बंद कर दिया जाता है। कुछ समय बाद आसपास के लोगों द्वारा आंदोलन करने और जनप्रतिनिधियों के दबाव के चलते सड़क के उच्चीकरण और चौड़ीकरण का प्रस्ताव स्वीकृत हुआ। 16 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर कार्य कराने के लिए 28 करोड़ रुपये पास हुए। 2011 में लोक निर्माण विभाग ने निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया। अब तक नौ किलोमीटर तक कार्य पूरा किया जा चुका है। कुछ हिस्से में एक लेयर गिट्टी भी डाल दी गई है। लेकिन काम बंद है। विभाग के पास करीब साढ़े चार करोड़ धन पड़ा है। बावजूद इसके कार्य नहीं कराया जा रहा है। इससे गुजरने वाले यात्रियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के समय कई बार उस रास्ते पर सड़क के गड्ढों में ट्रकों के फंसने की वजह से आवागमन अवरुद्ध हो गया था। इसके विरोध में स्थानीय लोग सड़क पर उतर गए थे। तब अधिशासी अभियंता ने ठेकेदार को बदलने का आश्वासन देकर किसी दूसरे ठेकेदार से कार्य कराने को कहा था। आंदोलन तो समाप्त हो गया पर सड़क की हालत जस की तस है। चार किलोमीटर सड़क पर गड्ढे ही गड्ढे हैं।
विभाग के पास करीब साढ़े चार करोड़ मौजूद है। चुनाव से पहले ही ठेकेदार ने कार्य को बंद कर दिया था। उससे कार्य को शुरू कराने को कहा गया है। जल्द ही कार्य शुरू हो जाएगा। मार्च तक कार्य को हर हाल में पूरा करा दिया जाएगा।
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एके सिंह, अधिशासी अभियंता प्रांतीय खंड, पीडब्ल्यूडी
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घाघरा-और राप्ती नदी के संगम पर गोरखपुर-देवरिया की सीमा पर पक्का पुल बनाया गया है। राप्ती नदी पर बनने वाला यह जिले का दूसरा पुल है। बनारस की तरफ से होकर आने वाले वाहन इस पुल को पार कर बिहार जाते हैं। काफी पुरानी सड़क होने तथा वाहनों का लोड बढ़ने के नाते अक्सर बरसात के दिनों में इस रास्ते को बंद कर दिया जाता है। कुछ समय बाद आसपास के लोगों द्वारा आंदोलन करने और जनप्रतिनिधियों के दबाव के चलते सड़क के उच्चीकरण और चौड़ीकरण का प्रस्ताव स्वीकृत हुआ। 16 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर कार्य कराने के लिए 28 करोड़ रुपये पास हुए। 2011 में लोक निर्माण विभाग ने निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया। अब तक नौ किलोमीटर तक कार्य पूरा किया जा चुका है। कुछ हिस्से में एक लेयर गिट्टी भी डाल दी गई है। लेकिन काम बंद है। विभाग के पास करीब साढ़े चार करोड़ धन पड़ा है। बावजूद इसके कार्य नहीं कराया जा रहा है। इससे गुजरने वाले यात्रियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के समय कई बार उस रास्ते पर सड़क के गड्ढों में ट्रकों के फंसने की वजह से आवागमन अवरुद्ध हो गया था। इसके विरोध में स्थानीय लोग सड़क पर उतर गए थे। तब अधिशासी अभियंता ने ठेकेदार को बदलने का आश्वासन देकर किसी दूसरे ठेकेदार से कार्य कराने को कहा था। आंदोलन तो समाप्त हो गया पर सड़क की हालत जस की तस है। चार किलोमीटर सड़क पर गड्ढे ही गड्ढे हैं।
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विभाग के पास करीब साढ़े चार करोड़ मौजूद है। चुनाव से पहले ही ठेकेदार ने कार्य को बंद कर दिया था। उससे कार्य को शुरू कराने को कहा गया है। जल्द ही कार्य शुरू हो जाएगा। मार्च तक कार्य को हर हाल में पूरा करा दिया जाएगा।
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एके सिंह, अधिशासी अभियंता प्रांतीय खंड, पीडब्ल्यूडी