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नई पीढ़ी में संगीत के लिए धैर्य की कमी: मालिनी
Gorakhpur
Updated Mon, 20 Oct 2014 05:30 AM IST
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गोरखपुर। लोक संगीत में अलग पहचान बनाने वाली मालिनी अवस्थी के जीवन में गोरखपुर का खास महत्व है। शनिवार को एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए वह शहर पहुंची। मौजूदा दौर के गीत और गायकी को लेकर हुई चर्चाओं में गोरखपुर के प्रति उनका जुड़ाव साफ महसूस हुआ।
मालिनी ने कहा कि इस दौर में अच्छे गायन के साथ श्रोताओं पर पकड़ बनाए रखना गायकों के लिए बड़ी चुनौती है। आज श्रोताओं के पास कई विकल्प मौजूद हैं। लोगों के पास समय नहीं है कि गायन सुनकर उसका आनंद उठा सकें। वहीं चैनलों में हर तीन मिनट के बाद विज्ञापन आ जाता है, जिससे गायन की आत्मा मर जाती है। गाने-बजाने के लिए जो धैर्य चाहिए, वह नई पीढी़ में नहीं दिखता। लोक संगीत से लोगों को जागरूक करने वाली मालिनी ने कहा कि भोजपुरी गायन अब शुद्घि के दौर से गुजर रहा है। अश्लीलता अब इतिहास बनती जा रही है और लोग सस्ती लोकप्रियता की चीजों को नकार रहे हैं। गोरखपुर से विशेष जुड़ाव की वजह को लेकर उन्होंने कहा कि यहां के मशहूर गजल गायक राहत अली ने उनकी प्रतिभा को तराशा। लोकगीत क ी परंपरा को भारतीय संस्कृति का प्राण बताते हुए अवस्थी ने कहा कि गजल और लोक संगीत दोनों उन्हें प्रिय हैं।
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मालिनी ने कहा कि इस दौर में अच्छे गायन के साथ श्रोताओं पर पकड़ बनाए रखना गायकों के लिए बड़ी चुनौती है। आज श्रोताओं के पास कई विकल्प मौजूद हैं। लोगों के पास समय नहीं है कि गायन सुनकर उसका आनंद उठा सकें। वहीं चैनलों में हर तीन मिनट के बाद विज्ञापन आ जाता है, जिससे गायन की आत्मा मर जाती है। गाने-बजाने के लिए जो धैर्य चाहिए, वह नई पीढी़ में नहीं दिखता। लोक संगीत से लोगों को जागरूक करने वाली मालिनी ने कहा कि भोजपुरी गायन अब शुद्घि के दौर से गुजर रहा है। अश्लीलता अब इतिहास बनती जा रही है और लोग सस्ती लोकप्रियता की चीजों को नकार रहे हैं। गोरखपुर से विशेष जुड़ाव की वजह को लेकर उन्होंने कहा कि यहां के मशहूर गजल गायक राहत अली ने उनकी प्रतिभा को तराशा। लोकगीत क ी परंपरा को भारतीय संस्कृति का प्राण बताते हुए अवस्थी ने कहा कि गजल और लोक संगीत दोनों उन्हें प्रिय हैं।
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