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जांच में डॉक्टर को क्लीन चिट
Gorakhpur
Updated Mon, 20 Oct 2014 05:30 AM IST
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गोरखपुर। कुत्ता काटने से फैजान की मौत के मामले में बृहस्पतिवार को जांच रिपोर्ट तैयार हो गई। बयान लेने के बाद डॉक्टर को क्लीन चिट दे दी गई।
घोषीपुर निवासी आठ वर्षीय फैजान को दो महीने पहले कुत्ते ने काट लिया था। घर वाले उसे लेकर जिला अस्पताल गए थे लेकिन एंटी रैबीज इंजेक्शन नहीं लगाया गया। आरोप है कि डॉक्टर ने यह कह कर लौटा दिया था कि कुत्ते पर नजर रखें, यदि वह मर जाता है तो बच्चे को इंजेक्शन लगाया जाएगा। नौ अक्टूबर को फैजान की मौत हो गई। मामले के तूल पकड़ने पर सीएमओ ने एडिशन सीएमओ के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की थी। जांच कमेटी के प्रमुख एडिशनल सीएमओ डॉ. आईवी विश्वकर्मा के मुताबिक फैजान को कुत्ते ने पंजा मारा था, काटा नहीं था। चिकित्सकीय पुस्तकों के अध्ययन के बाद निष्कर्ष निकालने जाने का हवाला देते हुए कमेटी ने माना है कि फैजान की मौत कुत्ते के काटने से नहीं हुई है। इस कारण डॉक्टर का कोई दोष नहीं है।
जांच कमेटी के निष्कर्ष-
0 रैबीज होने पर कुत्ते की मौत सुनिश्चित है, चूंकि फैजान के पिता ने बयान में कहा है कि कुत्ता जिंदा है, इस वजह से रैबीज से मौत नहीं हुई 0 पंजा मारने से किसी को रैबीज नहीं हो सकता है, फैजान के पिता ने कुत्ता काटने की बात नकारी है, पंजे से रैबीज न फैलने के ढेरों प्रमाण हैं।
0 कुत्ता काटने पर दस दिन निगरानी करने का किताबों में उल्लेख है, इस वजह से डॉक्टर पर टालने का आरोप लगाना गलत है।
पशु वैज्ञानिकों के तर्क-
0 किसी को काटने के बाद कुत्ते की मौत जरूरी नहीं है। संभव है कि वह कुत्ता आजीवन रैबीज का वाहक बना रहे। दस साल पहले ही वैज्ञानिक शोध में यह साबित हो चुका है।
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0 पागल कुत्तों को लार ज्यादा बनती है। ऐसे में उसके पंजे का लार से संपर्क होना सुनिश्चित है और वह किसी को पंजा मारता है तो उसमें रैबीज का संक्रमण भी तय है।
0 छुट्टा कुत्ता काटता है तो उसकी निगरानी संभव नहीं है। 14 साल पहले हुए शोध के बाद ही यह स्पष्ट कर दिया गया है कि किसी को कुत्ता काटता है तो जितना जल्दी संभव हो, एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगना चाहिए।
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घोषीपुर निवासी आठ वर्षीय फैजान को दो महीने पहले कुत्ते ने काट लिया था। घर वाले उसे लेकर जिला अस्पताल गए थे लेकिन एंटी रैबीज इंजेक्शन नहीं लगाया गया। आरोप है कि डॉक्टर ने यह कह कर लौटा दिया था कि कुत्ते पर नजर रखें, यदि वह मर जाता है तो बच्चे को इंजेक्शन लगाया जाएगा। नौ अक्टूबर को फैजान की मौत हो गई। मामले के तूल पकड़ने पर सीएमओ ने एडिशन सीएमओ के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की थी। जांच कमेटी के प्रमुख एडिशनल सीएमओ डॉ. आईवी विश्वकर्मा के मुताबिक फैजान को कुत्ते ने पंजा मारा था, काटा नहीं था। चिकित्सकीय पुस्तकों के अध्ययन के बाद निष्कर्ष निकालने जाने का हवाला देते हुए कमेटी ने माना है कि फैजान की मौत कुत्ते के काटने से नहीं हुई है। इस कारण डॉक्टर का कोई दोष नहीं है।
जांच कमेटी के निष्कर्ष-
0 रैबीज होने पर कुत्ते की मौत सुनिश्चित है, चूंकि फैजान के पिता ने बयान में कहा है कि कुत्ता जिंदा है, इस वजह से रैबीज से मौत नहीं हुई 0 पंजा मारने से किसी को रैबीज नहीं हो सकता है, फैजान के पिता ने कुत्ता काटने की बात नकारी है, पंजे से रैबीज न फैलने के ढेरों प्रमाण हैं।
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0 कुत्ता काटने पर दस दिन निगरानी करने का किताबों में उल्लेख है, इस वजह से डॉक्टर पर टालने का आरोप लगाना गलत है।
पशु वैज्ञानिकों के तर्क-
0 किसी को काटने के बाद कुत्ते की मौत जरूरी नहीं है। संभव है कि वह कुत्ता आजीवन रैबीज का वाहक बना रहे। दस साल पहले ही वैज्ञानिक शोध में यह साबित हो चुका है।
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0 पागल कुत्तों को लार ज्यादा बनती है। ऐसे में उसके पंजे का लार से संपर्क होना सुनिश्चित है और वह किसी को पंजा मारता है तो उसमें रैबीज का संक्रमण भी तय है।
0 छुट्टा कुत्ता काटता है तो उसकी निगरानी संभव नहीं है। 14 साल पहले हुए शोध के बाद ही यह स्पष्ट कर दिया गया है कि किसी को कुत्ता काटता है तो जितना जल्दी संभव हो, एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगना चाहिए।