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‘जामिन शाह’ से हेमंत ने प्रशासन की नींद उड़ा दी थी

Sat, 14 Jun 2014 05:31 AM IST
Gorakhpur
Gorakhpur Updated Sat, 14 Jun 2014 05:31 AM IST
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गोरखपुर। बात सन् 1983 की है। एक सुबह शहर के कई जगह दीवार और पेड़ों पर एक ही बात लिखी थी ‘जामिन शाह?’, रातोंरात शहर में छा जाने वाले इस नाम को लेकर जहां पूरे शहर के लोग आश्चर्य में थे, वहीं प्रशासन सकते में। आखिर कौन है यह जामिन शाह, कोई भगोड़ा या फिर उपद्रवी? क्या मकसद है शहर की दीवारों पर इस शब्द के लिखे जाने का? इसे लेकर किसी को कोई जवाब नहीं सूझ रहा था। ‘जामिन शाह?’ कहीं कोई बड़ी बला न हो, इन सवालों ने इंतजामिया के भी होश उड़ा दिए थे। प्रशासन ने छानबीन शुरू की तो पता चला कि यह कोई बला नहीं बल्कि एक नाटक है, जिसका हाल ही में मंचन किया जाना है। लेकिन प्रशासन को सिर्फ इतने से संतोष नहीं हुआ। बाकायदा कमेटी बनाकर छानबीन हुई और जब पूरी तरह यकीन हो गया कि इस नाटक का मकसद सद्भाव फैलाना है, तब जाकर मंचन की अनुमति दी गई। दरअसल यह सनसनी जिले के ही झंगहा क्षेत्र के डुमरी गांव के प्रख्यात रंगकर्मी हेमंत मिश्र की शहर में दस्तक थी। एमेच्योर आर्टिस्ट गिल्ड ‘आग’ के बैनर तले सुल्तान अहमद रिजवी की स्क्रिप्ट पर शहर की मुश्किलों के बीच खेले गए इस नाटक की चर्चा हेमंत की निधन की सूचना के बाद शहर के हर रंगकर्मी के जुबां से सुनी गई। इप्टा के प्रांतीय सचिव डॉ. मुमताज खान, रंगकर्मी अशोक महर्षि, दीप शर्मा, आईएच सिद्दीकी आदि ने प्रख्यात रंगकर्मी को याद करते हुए श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
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