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अपने छूटे, सपने टूटे और थम गई जिंदगी
Gorakhpur
Updated Sun, 25 May 2014 05:31 AM IST
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गोरखपुर। त्रासदी आई और गुजर गई, लेकिन अपने पीछे जो तबाही छोड़ गई, उससे प्रभावित परिवार आज भी बाहर नहीं निकल पा रहे। उसपर सितम ये कि सरकारी तंत्र द्वारा मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने में देर ने उनकी जिंदगी पर जैसे ब्रेक लगा दिया है। बड़े भारी मन से वो अपने परिजनों के मृतक प्रमाण पत्र लेने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं ताकि रेजा-रेजा बिखरी जिंदगी को फिर से संवार सकें मगर उनके इस प्रयास में भी शायद इंतजामिया उनके साथ नहीं है। थाने से भगाए जा रहे तो प्रशासन कादरवाजा खटखटा रहे, लेकिन वहां भी कोई सुनने वाला नहीं।
यह दास्तां कौड़ीराम के विजय वर्मा की है जिसने करीब साल भर पहले ही उत्तराखंड त्रासदी में न केवल अपने मां-बाप, चाचा-चाची और मौसा-मौसी को खोया बल्कि बीच सफर में ही कॅरिअर को भी अलविदा कहने को मजबूर हुए। कमोबेश जिले के उन सभी 57 परिवारों का भी यही हाल है जिनके अपने उत्तराखंड की त्रासदी के बाद अभी तक घर नहीं लौटे और सरकार ने भी उन्हें मृतक मान लिया। यह आंकड़ा सरकारी है। चार और लोगों के बारे में भी उनके परिजनों ने जिला प्रशासन के सामने दावा पेश किया है, जिनके नाम मृतकों की सरकारी सूची में अभी शामिल नहीं हो सके हैं।
मृतक प्रमाण पत्र नहीं मिलने की शिकायत लेकर शनिवार को आपदा कार्यालय आए विजय ने अपनी पीड़ा ‘अमर उजाला’ से साझा करते हुए बताया कि पिता भगवान दास और मां मीना वर्मा के नाम से बैंक में लाखों का कर्ज है जिसे लेकर बैंक के अधिकारी रोजाना तगादा कर रहे। आरसी जारी होने और फिर घर की कुर्की की चेतावनी मिल रही।
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बोले कर्ज चुकाने भर की रकम तो है लेकिन पिता और मां के नाम वाले बैंक एकाउंट में। उसे देने के लिए बैंक, वारिस होने का प्रमाण पत्र मांग रहा । वरासत के लिए तहसील अफसरों के पास जाने पर वहां मृत्यु प्रमाण पत्र मांगा जा रहा। उसके लिए महीनों से दौड़ लगा रहे लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। एकाउंट से रुपये नहीं निकलने की वजह से पिता का छोड़ा सराफा व्यवसाय भी चौपट होने की कगार पर पहुंच गया है। यही नहीं मां-बाप के नाम से कुछ जमीन भी है जिसे बेचकर मुश्किलें थोड़ी आसान की जा सकती हैं लेकिन वरासत नहीं होने की वजह से यह विकल्प भी नहीं आजमा सकते।
जिंदगी का पहिया एकदम से ठहर जाने से खड़ी हुई मुश्किलों से बड़े भाई परेशान हो गए तो मजबूर होकर उन्हें भी अपनी सिविल सर्विसेज की तैयारी बीच में ही छोड़कर घर का बोझ साझा करना पड़ा। छोटे भाई का भी कॅरिअर न खराब हो इसलिए भी यह कदम उठाना जरूरी था।
मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए एसडीएम और बीडीओ को चेतावनी
उत्तराखंड त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारवालों को अभी तक मृत्यु प्रमाण पत्र और वारिस होने का प्रमाण पत्र नहीं जारी करने से खफा एडीएम (सिटी) बद्री नाथ सिंह ने सभी एसडीएम और बीडीओ को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने सभी को रिमाइंडर भेजते हुए कहा है कि जल्द से जल्द सभी के मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के अलावा वरासत की कार्रवाई पूरी कर दी जाए वर्ना संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। एडीएम (सिटी) ने बताया कि मुआवजे की राशि तय होने के बाद फरवरी में बीडीओ को पीड़ित परिवारों को मृत्यु प्रमाण पत्र और एसडीएम को वरासत का प्रमाण देने का निर्देश दिया गया था। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव की वजह से इस कार्रवाई में थोड़ा विलंब हो गया लेकिन जल्द ही सभी को जरूरी प्रमाण पत्र देने के बाद उन्हें मुआवजे के लिए शासन को फाइल भेज दी जाएगी।
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यह दास्तां कौड़ीराम के विजय वर्मा की है जिसने करीब साल भर पहले ही उत्तराखंड त्रासदी में न केवल अपने मां-बाप, चाचा-चाची और मौसा-मौसी को खोया बल्कि बीच सफर में ही कॅरिअर को भी अलविदा कहने को मजबूर हुए। कमोबेश जिले के उन सभी 57 परिवारों का भी यही हाल है जिनके अपने उत्तराखंड की त्रासदी के बाद अभी तक घर नहीं लौटे और सरकार ने भी उन्हें मृतक मान लिया। यह आंकड़ा सरकारी है। चार और लोगों के बारे में भी उनके परिजनों ने जिला प्रशासन के सामने दावा पेश किया है, जिनके नाम मृतकों की सरकारी सूची में अभी शामिल नहीं हो सके हैं।
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मृतक प्रमाण पत्र नहीं मिलने की शिकायत लेकर शनिवार को आपदा कार्यालय आए विजय ने अपनी पीड़ा ‘अमर उजाला’ से साझा करते हुए बताया कि पिता भगवान दास और मां मीना वर्मा के नाम से बैंक में लाखों का कर्ज है जिसे लेकर बैंक के अधिकारी रोजाना तगादा कर रहे। आरसी जारी होने और फिर घर की कुर्की की चेतावनी मिल रही।
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बोले कर्ज चुकाने भर की रकम तो है लेकिन पिता और मां के नाम वाले बैंक एकाउंट में। उसे देने के लिए बैंक, वारिस होने का प्रमाण पत्र मांग रहा । वरासत के लिए तहसील अफसरों के पास जाने पर वहां मृत्यु प्रमाण पत्र मांगा जा रहा। उसके लिए महीनों से दौड़ लगा रहे लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। एकाउंट से रुपये नहीं निकलने की वजह से पिता का छोड़ा सराफा व्यवसाय भी चौपट होने की कगार पर पहुंच गया है। यही नहीं मां-बाप के नाम से कुछ जमीन भी है जिसे बेचकर मुश्किलें थोड़ी आसान की जा सकती हैं लेकिन वरासत नहीं होने की वजह से यह विकल्प भी नहीं आजमा सकते।
जिंदगी का पहिया एकदम से ठहर जाने से खड़ी हुई मुश्किलों से बड़े भाई परेशान हो गए तो मजबूर होकर उन्हें भी अपनी सिविल सर्विसेज की तैयारी बीच में ही छोड़कर घर का बोझ साझा करना पड़ा। छोटे भाई का भी कॅरिअर न खराब हो इसलिए भी यह कदम उठाना जरूरी था।
मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए एसडीएम और बीडीओ को चेतावनी
उत्तराखंड त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारवालों को अभी तक मृत्यु प्रमाण पत्र और वारिस होने का प्रमाण पत्र नहीं जारी करने से खफा एडीएम (सिटी) बद्री नाथ सिंह ने सभी एसडीएम और बीडीओ को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने सभी को रिमाइंडर भेजते हुए कहा है कि जल्द से जल्द सभी के मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के अलावा वरासत की कार्रवाई पूरी कर दी जाए वर्ना संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। एडीएम (सिटी) ने बताया कि मुआवजे की राशि तय होने के बाद फरवरी में बीडीओ को पीड़ित परिवारों को मृत्यु प्रमाण पत्र और एसडीएम को वरासत का प्रमाण देने का निर्देश दिया गया था। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव की वजह से इस कार्रवाई में थोड़ा विलंब हो गया लेकिन जल्द ही सभी को जरूरी प्रमाण पत्र देने के बाद उन्हें मुआवजे के लिए शासन को फाइल भेज दी जाएगी।