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महिलाओं ने दिखाया हौसला तो बंद हुआ कच्ची शराब का धंधा
Gorakhpur
Updated Mon, 03 Mar 2014 05:30 AM IST
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गोरखपुर। शाहपुर के मोहनापुर गांव की महिलाओं ने अपने हौसले से वह करिश्मा कर दिखाया जो समाज के लिए नजीर है। पुलिस और आबकारी विभाग से शिकायत करके थक चुकी महिलाओं ने कच्ची शराब बंद कराने का बीड़ा खुद उठाया। उन्होंने दो महीने के अथक प्रयास से गांव में कच्ची शराब का कारोबार लगभग बंद करवा दिया है।
पादरी बाजार प्रतिनिधि के अनुसार शाहपुर के मोहनापुर पासी टोला गांव की आबादी 500 के करीब है। बाहर से मंगवाकर गांव में दस जगहों पर कच्ची शराब बेची जाती थी। यह कारोबार काफी दिनों से चल रहा था है। बाहर के लोग भी गांव आकर शराब पीते थे और गांव की महिलाओं से छेड़छाड़ करते है। जब गांव वाले इसकी शिकायत पुलिस से करते है तो उन्हें डांट कर भगा दिया जाता था। इस पर गांव में कच्ची शराब का धंधा बंद कराने के लिए वहां की महिलाओं ने शक्ति सुरक्षा समिति का गठन किया और डीएम व एसपी कार्यालय पर कई बार धरना दिया। इस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई तो खुद कच्ची शराब का धंधा बंद कराने के लिए उठ खड़ी हुईं। पहले गांव में शराब बेचने वालों को मना किया। उसके बाद जो लोग शराब गांव में पहुंचाते है, उनसे शराब छीनकर उसे नष्ट करना शुरू कर दिया। लगातार दो महीने उनके इस तरह प्रयास करने से गांव में कच्ची शराब का कारोबार लगभग बंद हो गया है।
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अब तक हो चुकी है दस लोगों की मौत
गांव में कच्ची शराब की वजह से कई घर उजड़ चुके है। इसे पीने दो महीने के अंदर दस से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इस धंधे को रोकने में लगीं महिलाओं का मानना है कि पुलिस और आबकारी विभाग की जानकारी में यह अवैध कारोबार हो रहा है।
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पादरी बाजार प्रतिनिधि के अनुसार शाहपुर के मोहनापुर पासी टोला गांव की आबादी 500 के करीब है। बाहर से मंगवाकर गांव में दस जगहों पर कच्ची शराब बेची जाती थी। यह कारोबार काफी दिनों से चल रहा था है। बाहर के लोग भी गांव आकर शराब पीते थे और गांव की महिलाओं से छेड़छाड़ करते है। जब गांव वाले इसकी शिकायत पुलिस से करते है तो उन्हें डांट कर भगा दिया जाता था। इस पर गांव में कच्ची शराब का धंधा बंद कराने के लिए वहां की महिलाओं ने शक्ति सुरक्षा समिति का गठन किया और डीएम व एसपी कार्यालय पर कई बार धरना दिया। इस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई तो खुद कच्ची शराब का धंधा बंद कराने के लिए उठ खड़ी हुईं। पहले गांव में शराब बेचने वालों को मना किया। उसके बाद जो लोग शराब गांव में पहुंचाते है, उनसे शराब छीनकर उसे नष्ट करना शुरू कर दिया। लगातार दो महीने उनके इस तरह प्रयास करने से गांव में कच्ची शराब का कारोबार लगभग बंद हो गया है।
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अब तक हो चुकी है दस लोगों की मौत
गांव में कच्ची शराब की वजह से कई घर उजड़ चुके है। इसे पीने दो महीने के अंदर दस से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इस धंधे को रोकने में लगीं महिलाओं का मानना है कि पुलिस और आबकारी विभाग की जानकारी में यह अवैध कारोबार हो रहा है।
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