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शहर की बेटी का पीसीएस में चयन
Gorakhpur
Updated Sat, 07 Dec 2013 05:42 AM IST
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गोरखपुर। शहर की प्रतिभा ने एक बार फिर से गोरखपुर का नाम रोशन किया है। तुर्कमानपुर की रहने वाली कहकशां का पीसीएस में चयन हुआ है। उन्हें जिला कमांडेंट होमगार्ड का पद मिला है। शुक्रवार रात जैसे ही उन्हें सेलेक्शन की जानकारी मिली पूरा परिवार खुशी से झूम उठा। बेटी की इस उपलब्धि पर परिवार वालों को भी नाज है।
उन्होंने स्कूली पढ़ाई इमा्मबाडा इंटर कॉलेज से की जबकि एमजीपीजी कॉलेज से स्नातक और यूनिवर्सिटी से एमएससी की डिग्री ली। कहकशां ने अपने आप को डिग्री लेने तक ही सीमित नहीं रखा, बल्कि कुछ करने की ठानी। इसी लक्ष्य के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की। बॉटनी और जुलोजी विषय के साथ पीसीएस की परीक्षा में बैठना शुरू किया। शुरूआत में कुछ दिन कोचिंग की लेकिन बाद में घर पर रहकर ही परीक्षा की तैयारी में रात दिन एक किया। 2010 में उनका चयन लेक्चरर के पद पर हो गया। उन्हें राजकीय कन्या इंटर कॉलेज नौतनवां में नियुक्ति मिली। लेकिन इसे सफलता की एक सीढी मानते हुए मंजिल की तलाश जारी रखी। पिछली बार तो वह पीसीएस की मुख्य परीक्षा में पास नहीं हो सकी। लेकिन शुक्रवार रात दोस्तों ने जब उन्हें फोनकर सेलेक्शन की जानकारी दी तो घर पर खुशियां बिखर गईं। फोन पर बधाई देने वालों का सिलसिला शुरू हो गया तथा पडोसियों ने घर पहुंचकर खुशियां बांटी। उनके पिता शमीम अहमद अंसारी पीडब्ल्यूडी से रिटायर हैं जबकि मां रजिया बेगम स्कूल टीचर। तीन भाई बहनों में वह सबसे छोटी हैं। बडे भाई आरिफ कंप्यटर इंजीनियर तथा छोटी बहन अफशां खातून भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करती है।
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उन्होंने स्कूली पढ़ाई इमा्मबाडा इंटर कॉलेज से की जबकि एमजीपीजी कॉलेज से स्नातक और यूनिवर्सिटी से एमएससी की डिग्री ली। कहकशां ने अपने आप को डिग्री लेने तक ही सीमित नहीं रखा, बल्कि कुछ करने की ठानी। इसी लक्ष्य के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की। बॉटनी और जुलोजी विषय के साथ पीसीएस की परीक्षा में बैठना शुरू किया। शुरूआत में कुछ दिन कोचिंग की लेकिन बाद में घर पर रहकर ही परीक्षा की तैयारी में रात दिन एक किया। 2010 में उनका चयन लेक्चरर के पद पर हो गया। उन्हें राजकीय कन्या इंटर कॉलेज नौतनवां में नियुक्ति मिली। लेकिन इसे सफलता की एक सीढी मानते हुए मंजिल की तलाश जारी रखी। पिछली बार तो वह पीसीएस की मुख्य परीक्षा में पास नहीं हो सकी। लेकिन शुक्रवार रात दोस्तों ने जब उन्हें फोनकर सेलेक्शन की जानकारी दी तो घर पर खुशियां बिखर गईं। फोन पर बधाई देने वालों का सिलसिला शुरू हो गया तथा पडोसियों ने घर पहुंचकर खुशियां बांटी। उनके पिता शमीम अहमद अंसारी पीडब्ल्यूडी से रिटायर हैं जबकि मां रजिया बेगम स्कूल टीचर। तीन भाई बहनों में वह सबसे छोटी हैं। बडे भाई आरिफ कंप्यटर इंजीनियर तथा छोटी बहन अफशां खातून भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करती है।
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