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फर्जी लाइसेंस पर खरीद लिये दो रिवाल्वर
Gorakhpur
Updated Mon, 23 Sep 2013 05:37 AM IST
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गोरखपुर। शस्त्र लाइसेंस का फर्जी प्रारूप बनवाकर कानपुर आर्डिनेंस फैक्ट्री से दो रिवाल्वर खरीदने का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। ये जालसाजी बिहार के बुद्धदेव शुक्ला ने अपने और पत्नी सुरभि के नाम पर की है। उसने पूरे सिस्टम को ही ध्वस्त नहीं किया, बल्कि हर चेक प्वाइंट पर ऐसा जुगाड़ बिठाया कि सब जानने के बावजूद अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। वर्तमान में गोरखपुर के तारामंडल में रहने वाले बुद्धदेव पर बिहार में कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। देवरिया, बैकुंठपुर गांव के धर्मेंद्र कुमार ने इसकी शिकायत डीआईजी गोरखपुर और रक्षा मंत्रालय में की है। आरोप है कि पटना, दानापुर के बुद्धदेव शुक्ला ने दिसंबर 2010 में खुद को देवरिया, गौरी बाजार के जमुना गांव का निवासी बताकर अपने (लाइसेंस नंबर 3913) और पत्नी सुरभि शुक्ला (लाइसेंस नंबर 3917) के नाम से रिवाल्वर के दो लाइसेंस बनवाए। इसी आधार पर उसने कानपुर आर्डिनेंस फैक्ट्री से दो रिवाल्वर पी-8108 और पी-7925 भी खरीद लिए। इन तथ्यों को छिपाकर साल 2011 में उसने डीएम गोरखपुर के यहां भी शस्त्र लाइसेंस के लिए आवेदन कर दिया है।
सूचना के अधिकार में हुआ खुलासा
आरटीआई के जरिये मांगी गई सूचना में डीएम देवरिया ने स्पष्ट किया कि शस्त्र लाइसेंस संख्या-3913 बुद्धदेव शुक्ला और शस्त्र लाइसेंस संख्या-3917 सुरभि शुक्ला, गांव जमुना, गौरी बाजार के नाम से जारी नहीं किया गया है। यही नहीं ये दोनों शस्त्र लाइसेंस नंबर किसी के नाम से भी जारी नहीं किए गए हैं। जमुना गांव के प्रधान देवेंद्र प्रसाद ने भी अपने इस बात की पुष्टि की है कि बुद्धदेव और सुरभि नाम का कोई भी व्यक्ति उनके गांव का निवासी नहीं है।
कानपुर फैक्ट्री में ही बने हैं दोनों रिवाल्वर
आरटीआई के तहत आर्डिनेंस फैक्ट्री कानपुर की तरफ से दी गई जानकारी में स्वीकार किया गया है कि शस्त्र संख्या पी-8108 और पी-7929 का निर्माण लघु शस्त्र निर्माणी कानपुर में किया गया है। ये रिवाल्वर किसको बेचे गए हैं आर्डिनेंस फैक्ट्र्री ने इसकी जानकारी देने में असमर्थता जाहिर की।
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बिहार में कई वारदातों का आरोपी है बुद्धदेव
पटना, दानापुर के बुद्धदेव शुक्ला पर बिहार में कई मुकदमे दर्ज हैं। 2007 में मारपीट, साल 2010 में मारपीट, धोखाधड़ी, साजिश और अमानत में खयानत आदि के मुकदमे दर्ज हैं। इस साल ठगी, धोखाधड़ी और आर्म्स एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ। नाइन एमएम की लोडेड पिस्टल और मैग्जीन के साथ पकड़ा गया बुद्धदेव इस मामले में छह माह तक जेल में बंद था।
शिकायत की जांच कराई जा रही है। जांच कहां तक पहुंची है इस बारे में अभी जानकारी नहीं है। जांच की प्रगति रिपोर्ट पता करके इसके बारे में जानकारी दी जा सकती है। जो भी दोषी होगा उस पर कार्रवाई की जाएगी।
एमडी कर्णधार, डीआईजी, गोरखपुर
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सूचना के अधिकार में हुआ खुलासा
आरटीआई के जरिये मांगी गई सूचना में डीएम देवरिया ने स्पष्ट किया कि शस्त्र लाइसेंस संख्या-3913 बुद्धदेव शुक्ला और शस्त्र लाइसेंस संख्या-3917 सुरभि शुक्ला, गांव जमुना, गौरी बाजार के नाम से जारी नहीं किया गया है। यही नहीं ये दोनों शस्त्र लाइसेंस नंबर किसी के नाम से भी जारी नहीं किए गए हैं। जमुना गांव के प्रधान देवेंद्र प्रसाद ने भी अपने इस बात की पुष्टि की है कि बुद्धदेव और सुरभि नाम का कोई भी व्यक्ति उनके गांव का निवासी नहीं है।
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कानपुर फैक्ट्री में ही बने हैं दोनों रिवाल्वर
आरटीआई के तहत आर्डिनेंस फैक्ट्री कानपुर की तरफ से दी गई जानकारी में स्वीकार किया गया है कि शस्त्र संख्या पी-8108 और पी-7929 का निर्माण लघु शस्त्र निर्माणी कानपुर में किया गया है। ये रिवाल्वर किसको बेचे गए हैं आर्डिनेंस फैक्ट्र्री ने इसकी जानकारी देने में असमर्थता जाहिर की।
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बिहार में कई वारदातों का आरोपी है बुद्धदेव
पटना, दानापुर के बुद्धदेव शुक्ला पर बिहार में कई मुकदमे दर्ज हैं। 2007 में मारपीट, साल 2010 में मारपीट, धोखाधड़ी, साजिश और अमानत में खयानत आदि के मुकदमे दर्ज हैं। इस साल ठगी, धोखाधड़ी और आर्म्स एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ। नाइन एमएम की लोडेड पिस्टल और मैग्जीन के साथ पकड़ा गया बुद्धदेव इस मामले में छह माह तक जेल में बंद था।
शिकायत की जांच कराई जा रही है। जांच कहां तक पहुंची है इस बारे में अभी जानकारी नहीं है। जांच की प्रगति रिपोर्ट पता करके इसके बारे में जानकारी दी जा सकती है। जो भी दोषी होगा उस पर कार्रवाई की जाएगी।
एमडी कर्णधार, डीआईजी, गोरखपुर