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‘यह जिंदगी गरीब की टूटी गिलास है...’
Gorakhpur
Updated Mon, 23 Sep 2013 05:37 AM IST
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गोरखपुर। ‘यह जिंदगी गरीब की टूटी गिलास है,जिसने न बचपन देखा न जवानी, बेवक्त चेहरे पर बुढ़ापे की निशानी। पत्थर को है नसीब यहां दूध गाय का, गरीब के बच्चे पीएं तालाब का पानी। कागज पर हमने कर लिया कितना विकास है, यह जिंदगी गरीब की टूटी गिलास है।’ यह रचना है बनारस के गीतकार कुंवर सिंह कुंवर की। उन्होेंने रविवार को पंत पाक के समीप मैरेज हॉल में आयोजित बहुजन कवि सम्मेलन में अपनी इस रचना के जरिए समाज की हकीकत को बयान करने की कोशिश की जिसे काफी सराहा गया। इस मौके पर लखनऊ से आए कवि किशोरी लाल राजवंशी ने बुद्ध के जीवन पर आधारित काव्य रचना प्रस्तुुत की, ‘सफल विश्व प्रथमहि हुए गौतम बुद्ध महान..।’ बलिया से आए कवि राम प्रसाद सहगन की व्यंग्य रचना, ‘हम कबाड़ बेचते हैं आप देश बेचते हैं..’ को काफी सराहना मिली। इसके अलावा रंजना अग्रवाल, सुरेश चंद्र, वंदना, सिद्धार्थ, मगहर के कवि विनय कुमार, बलिया के नंद जी नंदा, रमाशंकर वर्मा मनहर, रहबर सिकंदरपुर, जौनपुर के होरी लाल अशांत, निसार मगहरी, डॉ. संजय आर्य, जितेंद्र राम त्यागी, डॉ. दीन मुहम्मद दीन, अली अहमद संगम आदि कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को आनंदित किया। संचालन बनवारी सिंह आजाद ने किया।
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