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कौमी एकता को भाषाई सद्भाव जरूरी
Gorakhpur
Updated Thu, 22 Nov 2012 12:00 PM IST
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गोरखपुर। कौमी एकता के लिए भाषाई सद्भाव होना जरूरी है। इसीलिए भारतीय संविधान में प्रत्येक भाषा को सम्मान देने का प्रावधान है। यह कहना है यूनिवर्सिटी के एनएसएस समन्वयक डा. संजीत कुमार गुप्ता का। वह बुधवार को एनएसएस के तत्वावधान में भाषाई एकता दिवस पर आयोजित गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने स्वयंसेवकों को उनके कर्तव्यों के प्रति जागरूक भी किया।
कार्यक्रम अधिकारी डा. केशव सिंह ने कहा कि वैश्वीकरण के युग में भाषाई सद्भाव नष्ट हो रहा है। इसे बचाने की जरूरत है। उन्होंने भाषावाद की राजनीति को देश के लिए खतरनाक बताया। साथ ही संवैधानिक रूप से हिंदी को पूर्णतया राष्ट्रभाषा घोषित करने की मांग की। नेहा चतुर्वेदी ने कहा कि भाषा विचारों के विनिमय का माध्यम है, अत: विचारों के सम्मान के लिए भाषा का सम्मान करना चाहिए। पुनीत त्रिपाठी ने कहा कि भाषाओं के मतभेेद में पड़कर देश को खंडित करने वालों को यह संदेश देने का आह्वान किया कि भाषाई भिन्नता देश की पहचान है।
गोष्ठी को देवेंद्र, सागर सिंह, गौतम पांडेय, अजय वर्मा, शिवरतन कुमार, ज्योति चौरसिया, सरोज त्रिपाठी, प्रीतिमा सोनकर आदि ने भी संबोधित किया। संचालन धर्मेंद्र कुमार वर्मा ने किया और हरिशंकर चौरसिया ने आभार जताया।
कार्यक्रम अधिकारी डा. केशव सिंह ने कहा कि वैश्वीकरण के युग में भाषाई सद्भाव नष्ट हो रहा है। इसे बचाने की जरूरत है। उन्होंने भाषावाद की राजनीति को देश के लिए खतरनाक बताया। साथ ही संवैधानिक रूप से हिंदी को पूर्णतया राष्ट्रभाषा घोषित करने की मांग की। नेहा चतुर्वेदी ने कहा कि भाषा विचारों के विनिमय का माध्यम है, अत: विचारों के सम्मान के लिए भाषा का सम्मान करना चाहिए। पुनीत त्रिपाठी ने कहा कि भाषाओं के मतभेेद में पड़कर देश को खंडित करने वालों को यह संदेश देने का आह्वान किया कि भाषाई भिन्नता देश की पहचान है।
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गोष्ठी को देवेंद्र, सागर सिंह, गौतम पांडेय, अजय वर्मा, शिवरतन कुमार, ज्योति चौरसिया, सरोज त्रिपाठी, प्रीतिमा सोनकर आदि ने भी संबोधित किया। संचालन धर्मेंद्र कुमार वर्मा ने किया और हरिशंकर चौरसिया ने आभार जताया।
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