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मतदान अधिकार ही नहीं हथियार भी, इसे समझें
Thu, 14 Feb 2019 12:29 AM IST
ajay Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
Published by: ajay Kumar
Updated Thu, 14 Feb 2019 12:29 AM IST
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अपराजिता में बाोलते मुख्य वक्ता
- फोटो : amar ujala
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गोरखपुर। मतदान हमारा अधिकार ही नहीं हथियार भी है। इस भाव को महिलाओं को समझना होगा। इसके लिए जागरूकता जरूरी है। जिन क्षेत्रों में महिलाओं की मतदान में हिस्सेदारी ज्यादा है, वहां महिलाएं सशक्त हैं। खुद मतदान करें और पड़ोसियों को भी जागरूक करें। यह सिर्फ सरकार का काम नहीं है, सबका दायित्व है। पहले मतदान फिर जलपान का संकल्प लेकर महिलाएं घर की देहरी से बाहर निकलें।
ये विचार शहर की उन विशिष्ट महिलाओं के हैं जिन्होंने महिला सशक्तिकरण की खातिर ‘राइजिंग एंजल्स’ का गठन किया। बुधवार को अमर उजाला के सिटी कार्यालय में ‘अपराजिता’ के मंच से ‘मतदान में महिलाओं की साझेदारी’ पर विमर्श में उन्होंने अपनी बातें साझा कीं। सेक्रेटरी नीतू द्विवेदी ने कहा, स्कूल-कॉलेजों में मतदान की पाठशाला चलाए जाने की जरूरत है। छात्राओं और शिक्षिकाओं को मतदान के लिए प्रेरित किया जाए।
वहीं नीतू सिंह व पूनम गुप्ता ने मतदान दिवस को उत्सव की तरह मनाने की सलाह दी। शिवानी गुप्ता तथा तनुश्री बनर्जी ने कहा कि जागरूकता का काम महिलाएं ज्यादा अच्छे से कर सकतीं हैं। स्वाती बनर्जी, शालिनी बागड़ी ने सामाजिक संगठनों से भी मतदान के प्रति जागरूकता लाने में आगे आने की अपील की। शकुंतला शर्मा व अमिता कुशवाहा कहती हैं, मतदान के दिन घर में अलग माहौल होता है। सभी आरामतलब होते हैं और अच्छे पकवान बनाने व टीवी देखने में लग जाते हैं। अगर हर घर में पुरुष, महिलाओं को सबसे पहले मतदान कराने साथ ले जाएं तो मतदान का प्रतिशत बढ़ जाएगा।
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ये विचार शहर की उन विशिष्ट महिलाओं के हैं जिन्होंने महिला सशक्तिकरण की खातिर ‘राइजिंग एंजल्स’ का गठन किया। बुधवार को अमर उजाला के सिटी कार्यालय में ‘अपराजिता’ के मंच से ‘मतदान में महिलाओं की साझेदारी’ पर विमर्श में उन्होंने अपनी बातें साझा कीं। सेक्रेटरी नीतू द्विवेदी ने कहा, स्कूल-कॉलेजों में मतदान की पाठशाला चलाए जाने की जरूरत है। छात्राओं और शिक्षिकाओं को मतदान के लिए प्रेरित किया जाए।
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वहीं नीतू सिंह व पूनम गुप्ता ने मतदान दिवस को उत्सव की तरह मनाने की सलाह दी। शिवानी गुप्ता तथा तनुश्री बनर्जी ने कहा कि जागरूकता का काम महिलाएं ज्यादा अच्छे से कर सकतीं हैं। स्वाती बनर्जी, शालिनी बागड़ी ने सामाजिक संगठनों से भी मतदान के प्रति जागरूकता लाने में आगे आने की अपील की। शकुंतला शर्मा व अमिता कुशवाहा कहती हैं, मतदान के दिन घर में अलग माहौल होता है। सभी आरामतलब होते हैं और अच्छे पकवान बनाने व टीवी देखने में लग जाते हैं। अगर हर घर में पुरुष, महिलाओं को सबसे पहले मतदान कराने साथ ले जाएं तो मतदान का प्रतिशत बढ़ जाएगा।
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