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कालाजार के मरीजों को ढूंढेंगी आशा कार्यकर्ता
deoria
Updated Mon, 23 Oct 2017 11:12 PM IST
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देवरिया(नीलांबुज मिश्र)। जिले में तेजी से पांव पसार रहे कालाजार से निबटने और इस बीमारी के मरीजों को चिह्नित करने के लिए एक्टिव सर्वे कार्यक्रम चलाया जाएगा। इसके तहत आशा कार्यकर्ता कालाजार के रोगियों को ढूंढेंगी। इसके एवज में अलग से प्रोत्साहन राशि मिलेगी। दस पीएचसी के 75 उपकेंद्रों पर नवंबर से यह कार्यक्रम शुरू होगा। इसके लिए मलेरिया विभाग की ओर से सभी तैयारी पूरी कर ली गई है।जिले में कालाजार रोगियों की संख्या में इजाफा हो रहा है। एक जनवरी 2017 से अभी तक जिले में कालाजार के 22 मरीज मिले हैं। इसमें सर्वाधिक मरीज बनकटा ब्लॉक के रहने वाले हैं। इसके पहले मलेरिया विभाग के कर्मचारी गांवों में जाकर जांच कर कालाजार मरीजों को चिह्नित कर इलाज कराते थे। लेकिन रोगियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। जिले के मलेरिया अधिकारी और सभी चिकित्सा प्रभारियों का प्रशिक्षण अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में लखनऊ में कराया गया। इससे सीएचसी पर आने वाले कालाजार के मरीजों को लक्षण के आधार पर आसानी से चिह्नित कर लिया जाएगा। नवंबर में एक्टिव सर्वे कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। इसमें 10 पीएचसी के 75 उपकेंद्र (एएनएम सेंटर) से जुड़ी आशा को प्रशिक्षण दिया जाएगा। सुपरवाइजर एएनएम होंगी। एक दिन में 50 घर को आशा टच करेंगी और घर का कोई सदस्य कई दिनों से बुखार से पीड़ित रहेगा तो उसका ब्योरा विभाग की ओर से मिले फार्मेट में भरकर जमा करेंगी। इसके एवज में एक दिन का 50 रुपये आशा कार्यकर्ताओं को मिलेगा। इसके बाद मलेरिया विभाग की ओर से गांव में कैंप लगाकर चिह्नित रोगियों की जांच होगी। अगर जांच में कोई रोगी कालाजार का मिला तो उस आशा को 300 रुपये प्रोत्साहन राशि के रूप में दिया जाएगा। यह धन रोगी के इलाज होने के बाद मिलेगा। इसके अलावा प्रभावित गांवों में छिड़काव में अगर आशा सहयोग करती है तो 100 रुपये मिलेंगे। जिला मलेरिया अधिकारी अंगद सिंह ने बताया कि नवंबर में पहले चरण के एक्टिव सर्वे कार्यक्रम का शुभारंभ 10 पीएचसी से जुड़े 75 उपकेंद्र के क्षेत्रों किया जा रहा है। अगर सफलता मिली तो जिला स्तर पर यह कार्यक्रम शुरू किया जाएगा।
प्रभावित गांवों पर विभाग की नजर : वर्ष 2017 में देवरिया के बनकटा, भाटपाररानी, पथरदेवा, भलुअनी ब्लॉक के अलावा महेन गांव कालाजार से प्रभावित है। इन गांवों में दस माह के अंदर 22 कालाजार के रोगी मिले हैं। इनका इलाज भी हो चुका है। लेकिन सतर्कता के तौर पर मरीजों की निगरानी मलेरिया विभाग द्वारा की जा रही है।
इलाज का देवरिया में नहीं है सेंटर : देवरिया। कालाजार के इलाज का सेंटर देवरिया में नहीं है। इसके चलते इस बीमारी के रोगियों को कुशीनगर सेंटर पर भेजा जाता है, जहां मरीजों का निशुल्क इलाज होता है। बिहार प्रांत से सटा जिला होने के कारण इस बीमारी का प्रभाव बढ़ रहा है। क्योंकि यह बीमारी मूलत: बिहार प्रांत की है।
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इन पीएचसी के अंतर्गत चलेगा कार्यक्रम: देवरिया। बनकटा, भटनी, तरकुलवा, पथरदेवा, सखनी, कंचनपुर, पकहा, बद्यौचघाट, भलुअनी, मदनपुर पीएचसी के अंतर्गत आने वाले 75 उपकेंद्रों पर प्रथम चरण में अभियान की शुरूआत होगी।
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प्रभावित गांवों पर विभाग की नजर : वर्ष 2017 में देवरिया के बनकटा, भाटपाररानी, पथरदेवा, भलुअनी ब्लॉक के अलावा महेन गांव कालाजार से प्रभावित है। इन गांवों में दस माह के अंदर 22 कालाजार के रोगी मिले हैं। इनका इलाज भी हो चुका है। लेकिन सतर्कता के तौर पर मरीजों की निगरानी मलेरिया विभाग द्वारा की जा रही है।
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इलाज का देवरिया में नहीं है सेंटर : देवरिया। कालाजार के इलाज का सेंटर देवरिया में नहीं है। इसके चलते इस बीमारी के रोगियों को कुशीनगर सेंटर पर भेजा जाता है, जहां मरीजों का निशुल्क इलाज होता है। बिहार प्रांत से सटा जिला होने के कारण इस बीमारी का प्रभाव बढ़ रहा है। क्योंकि यह बीमारी मूलत: बिहार प्रांत की है।
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इन पीएचसी के अंतर्गत चलेगा कार्यक्रम: देवरिया। बनकटा, भटनी, तरकुलवा, पथरदेवा, सखनी, कंचनपुर, पकहा, बद्यौचघाट, भलुअनी, मदनपुर पीएचसी के अंतर्गत आने वाले 75 उपकेंद्रों पर प्रथम चरण में अभियान की शुरूआत होगी।