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एनआईएमए ने किया बीआरडी का निरीक्षण
Updated Sun, 20 Aug 2017 09:55 PM IST
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गोरखपुर।
नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (नीमा) का पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल रविवार को बीआरडी मेडिकल कॉलेज पहुंचा और इंसेफेलाइटिस वार्ड का निरीक्षण कर इलाज की व्यवस्था देखी। इसके बाद प्रांतीय महासचिव डॉ. यूएस पांडेय की अगुवाई में प्रतिनिधिमंडल ने प्राचार्य से मुलाकात की।
नीमा के डॉ. यूएस पांडेय व डॉ. जेपी नारायण ने निरीक्षण के बाद प्रेसवार्ता करते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेज में भारतीय चिकित्सा पद्धति की यूनिट स्थापित करने की जरूरत है। इससे इंसेफेलाइटिस की रोकथाम में बड़ी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस बीमारी का कोई कारगर इलाज नहीं है। सिर्फ प्रतिरोधात्मक इलाज ही है। पूर्वांचल को स्वच्छ बनाकर और लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर ही इस पर काबू पाया जा सकता है। इसके लिए तुलसी, मिर्च, अदरक की चाय एवं हल्दी-दूध आदि का सेवन बेहद कारगर है। प्रतिनिधिमंडल डॉ. उषा नारायण, डॉ. राकेश श्रीवास्तव, डॉ. गंगाशंकर ओझा, डॉ. सुशील श्रीवास्तव, डॉ. महेंद्र विक्रम सिंह भी शामिल थे।
नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (नीमा) का पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल रविवार को बीआरडी मेडिकल कॉलेज पहुंचा और इंसेफेलाइटिस वार्ड का निरीक्षण कर इलाज की व्यवस्था देखी। इसके बाद प्रांतीय महासचिव डॉ. यूएस पांडेय की अगुवाई में प्रतिनिधिमंडल ने प्राचार्य से मुलाकात की।
नीमा के डॉ. यूएस पांडेय व डॉ. जेपी नारायण ने निरीक्षण के बाद प्रेसवार्ता करते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेज में भारतीय चिकित्सा पद्धति की यूनिट स्थापित करने की जरूरत है। इससे इंसेफेलाइटिस की रोकथाम में बड़ी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस बीमारी का कोई कारगर इलाज नहीं है। सिर्फ प्रतिरोधात्मक इलाज ही है। पूर्वांचल को स्वच्छ बनाकर और लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर ही इस पर काबू पाया जा सकता है। इसके लिए तुलसी, मिर्च, अदरक की चाय एवं हल्दी-दूध आदि का सेवन बेहद कारगर है। प्रतिनिधिमंडल डॉ. उषा नारायण, डॉ. राकेश श्रीवास्तव, डॉ. गंगाशंकर ओझा, डॉ. सुशील श्रीवास्तव, डॉ. महेंद्र विक्रम सिंह भी शामिल थे।
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