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महिलाओं में कैंसर को लेकर जागरूकता की कमी
Updated Sun, 08 Oct 2017 01:43 AM IST
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गोरखपुर।
महिलाओं में बच्चेदानी का कैंसर सबसे आम है। इसका पता छोटी सी जांच से चल सकता है। 80 फीसदी मरीजों में इसका पता तब चलता है जब बीमारी चौथे चरण में चली जाती है। इस चरण में बीमारी का सटीक इलाज संभव नहीं होता।
ये बातें पीजीआई के रेडिएशन आंकोलॉजी की प्रो. शालिनी सिंह ने शनिवार को बीआरडी मेडिकल कॉलेज में महिलाओं में कैंसर पर आयोजित सेमिनार में कहीं। आयोजन रेडियोथेरेपी विभाग के सभागार में हुआ। प्रो. शालिनी ने बताया कि यह बीमारी जानलेवा है। महिलाओं में इसको लेकर जागरूकता का अभाव है। अमूमन इस तरह के मर्ज में महिलाएं टालमटोल करती हैं और समय से डॉक्टर के पास नहीं जाती हैं। इतना ही नहीं वह पास के झोलाछाप से इलाज कराने लगती हैं। इसके कारण बीमारी ठीक होने के बजाए बढ़ने लगती है। जब बीमारी लाइलाज हो जाती हैं तब वह हायर सेंटर पर पहुंचती हैं। इस बीमारी की पहचान के पेप्समीयर जांच होती है। काल्पोस्कोपी मशीन की जांच से भी इसकी पहचान व इलाज काफी आसान हो गई है। इसके पूर्व सेमिनार का उद्घाटन प्राचार्य डॉ. पीके सिंह ने किया।
महिलाओं में बच्चेदानी का कैंसर सबसे आम है। इसका पता छोटी सी जांच से चल सकता है। 80 फीसदी मरीजों में इसका पता तब चलता है जब बीमारी चौथे चरण में चली जाती है। इस चरण में बीमारी का सटीक इलाज संभव नहीं होता।
ये बातें पीजीआई के रेडिएशन आंकोलॉजी की प्रो. शालिनी सिंह ने शनिवार को बीआरडी मेडिकल कॉलेज में महिलाओं में कैंसर पर आयोजित सेमिनार में कहीं। आयोजन रेडियोथेरेपी विभाग के सभागार में हुआ। प्रो. शालिनी ने बताया कि यह बीमारी जानलेवा है। महिलाओं में इसको लेकर जागरूकता का अभाव है। अमूमन इस तरह के मर्ज में महिलाएं टालमटोल करती हैं और समय से डॉक्टर के पास नहीं जाती हैं। इतना ही नहीं वह पास के झोलाछाप से इलाज कराने लगती हैं। इसके कारण बीमारी ठीक होने के बजाए बढ़ने लगती है। जब बीमारी लाइलाज हो जाती हैं तब वह हायर सेंटर पर पहुंचती हैं। इस बीमारी की पहचान के पेप्समीयर जांच होती है। काल्पोस्कोपी मशीन की जांच से भी इसकी पहचान व इलाज काफी आसान हो गई है। इसके पूर्व सेमिनार का उद्घाटन प्राचार्य डॉ. पीके सिंह ने किया।
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