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बीआरडी बच्चों के इलाज का सबसे बेहतर संस् थान
Updated Thu, 07 Sep 2017 01:44 AM IST
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गोरखपुर।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज यूपी और बिहार के चिकित्सा संस्थानों में बच्चों के इलाज के लिहाज से सबसे बेहतर संस्थान है। यहां बच्चों के इलाज के लिए बेहतर संसाधन हैं। हर साल 12 हजार नवजात समेत करीब 50 हजार मरीज यहां भर्ती होते हैं। इसमें करीब 35 हजार ठीक होकर जाते हैं। ये बातें आईएमए की प्रेसवार्ता में अध्यक्ष डॉ. बीबी गुप्ता ने कहीं। उन्होंने कहा कि बीआरडी और डॉक्टरों को बदनाम करने के लिए दुष्प्रचार किया जा रहा है।
डॉ. बीबी गुप्ता बोले, बीआरडी को बदनाम करना पूर्वांचल की गरीब जनता के पांव पर कुल्हाड़ी मारने जैसा होगा। यह अस्पताल उनकी उम्मीदों का एकमात्र केंद्र है। बीआरडी के पूर्व प्राचार्य डॉ. केपी कुशवाहा ने कहा कि जितने वेंटीलेटर बीआरडी में हैं उतने प्रदेश में किंग जार्ज मेडिकल कॉलेज के अलावा कहीं नहीं है। लखनऊ पीजीआई के एनआईसीयू में औसतन 40 नवजात भर्ती होते हैं, इनमें औसतन आठ मर जाते हैं। बीआरडी में भर्ती नवजातों की संख्या 125 से 160 के बीच होती है। ऐसे में 15 मौतें अस्वाभाविक नहीं हैं। वरिष्ठ बालरोग चिकित्सक एवं पूर्व एमएलसी डॉ. वाईडी सिंह ने कहा कि बिहार के आठ जिलों के साथ प्रदेश के 16 और नेपाल के तीन जिलों के मरीज यहां स्वास्थ्य लाभ पाते हैं। ऐसे में इनमें से अधिकांश इतनी दूर से आने के दौरान काफी गंभीर हो जाते हैं। डॉक्टर पूरी मेहनत से इलाज करते हैं। लेकिन कई बार विभिन्न कारणों से ऐसे गंभीर मरीज दम तोड़ देते हैं। ऐसे में बीआरडी को कब्रगाह बताना या डॉक्टरों की निष्ठा पर सवाल खड़ा करना ठीक नहीं है। सचिव डॉ. शशांक और पूर्व अध्यक्ष डॉ. डीके सिंह ने कहा कि बीआरडी के खिलाफ दुष्प्रचार किया जा रहा है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज यूपी और बिहार के चिकित्सा संस्थानों में बच्चों के इलाज के लिहाज से सबसे बेहतर संस्थान है। यहां बच्चों के इलाज के लिए बेहतर संसाधन हैं। हर साल 12 हजार नवजात समेत करीब 50 हजार मरीज यहां भर्ती होते हैं। इसमें करीब 35 हजार ठीक होकर जाते हैं। ये बातें आईएमए की प्रेसवार्ता में अध्यक्ष डॉ. बीबी गुप्ता ने कहीं। उन्होंने कहा कि बीआरडी और डॉक्टरों को बदनाम करने के लिए दुष्प्रचार किया जा रहा है।
डॉ. बीबी गुप्ता बोले, बीआरडी को बदनाम करना पूर्वांचल की गरीब जनता के पांव पर कुल्हाड़ी मारने जैसा होगा। यह अस्पताल उनकी उम्मीदों का एकमात्र केंद्र है। बीआरडी के पूर्व प्राचार्य डॉ. केपी कुशवाहा ने कहा कि जितने वेंटीलेटर बीआरडी में हैं उतने प्रदेश में किंग जार्ज मेडिकल कॉलेज के अलावा कहीं नहीं है। लखनऊ पीजीआई के एनआईसीयू में औसतन 40 नवजात भर्ती होते हैं, इनमें औसतन आठ मर जाते हैं। बीआरडी में भर्ती नवजातों की संख्या 125 से 160 के बीच होती है। ऐसे में 15 मौतें अस्वाभाविक नहीं हैं। वरिष्ठ बालरोग चिकित्सक एवं पूर्व एमएलसी डॉ. वाईडी सिंह ने कहा कि बिहार के आठ जिलों के साथ प्रदेश के 16 और नेपाल के तीन जिलों के मरीज यहां स्वास्थ्य लाभ पाते हैं। ऐसे में इनमें से अधिकांश इतनी दूर से आने के दौरान काफी गंभीर हो जाते हैं। डॉक्टर पूरी मेहनत से इलाज करते हैं। लेकिन कई बार विभिन्न कारणों से ऐसे गंभीर मरीज दम तोड़ देते हैं। ऐसे में बीआरडी को कब्रगाह बताना या डॉक्टरों की निष्ठा पर सवाल खड़ा करना ठीक नहीं है। सचिव डॉ. शशांक और पूर्व अध्यक्ष डॉ. डीके सिंह ने कहा कि बीआरडी के खिलाफ दुष्प्रचार किया जा रहा है।
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