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गोरखपुर वोटिंग में सेकेंड डिवीजन
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Sun, 05 Mar 2017 02:16 AM IST
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मतदान के लिए लगी लाइन।
- फोटो : Amar Ujala
जिले की नौ विधानसभा सीटों में पिछले चुनाव से 2.82 फीसदी ज्यादा पोलिंग के साथ कुल 55.48 फीसदी मत पड़े। तमाम प्रयासों के बाद भी एक बार फिर गोरखपुर के मतदाता वोटिंग में सेकेंड डिवीजन ही पास हो सके। इस बार पिपराइच में सबसे अधिक 63 तो खजनी में सबसे कम 51.12 फीसदी वोटिंग हुई। शहर, चिल्लूपार और बांसगांव सीटों पर 52 फीसदी मतदान हुआ। इसके साथ ही नौ सीटों के लिए कुल 127 प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई। देर रात तक गोरखपुर यूनिवर्सिटी में बने अलग-अलग स्ट्रांग रूम में सभी विधानसभा क्षेत्रों के ईवीएम सील कर दिए गए। मतगणना 11 मार्च को होगी।
मतदान सुबह सात बजे शुरू हुआ, मगर 77 बूथों पर ईवीएम खराब हो जाने से आधे से करीब एक घंटे तक मतदान प्रभावित रहा। इनमें ज्यादातर ईवीएम शहर विधानसभा क्षेत्र के हैं, जो वोटिंग शुरू होते ही दगा दे गए। छिटपुट घटनाओं को छोड़ दें तो मतदान शांतिपूर्ण रहा। सहजनवां में भाजपा और सपा के दो-दो एजेंट का अपहरण करने पर बसपा प्रत्याशी जीएम सिंह के बेटे और भतीजे समेत 15 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ तो वहीं पिपराइच क्षेत्र में बोलेरो से रुपये बांटते दो लोगों को पकड़कर ग्रामीणों ने पुलिस के हवाले कर दिया। पिपराइच के ही बूथ संख्या 167 पर ईवीएम में हाथी निशान के सामने बटन को किसी ने मार्कर से रंग दिया, जिस पर दूसरी पार्टी के प्रत्याशियों के एजेंटों ने 20 मिनट तक हंगामा किया।
शहर के वीआईपी बूथों पर धुला कम वोटिंग का दाग
शहर के पॉश इलाकों सिविल लाइंस, बेतियाहाता, मोहद्दीपुर आदि मोहल्लों में स्थापित वीआईपी बूथों पर इस बार खराब वोटिंग का दाग थोड़ा धुलता दिखाई पड़ा। कार्मल गर्ल्स इंटर कालेज के कई बूथों में पिछले दो-तीन चुनावों से तीन फीसदी, सात फीसदी और 13 फीसदी ही वोट पड़ते थे। ज्यादा तो नहीं मगर इस बार इस वोटिंग प्रतिशत में थोड़ा सुधार हुआ है। कार्मल के आठ बूथों में से छह बूथों पर साढ़े चार बजे तक 30 से 40 फीसदी वोटिंग हो चुकी थी। वहीं, कई वोटर मतदान के लिए लाइन में लगे थे। वहां के सभी बूथों पर सुबह 11 बजे ही 10 से 15 फीसदी मतदाता वोट डाल चुके थे। सेंट एंड्रयूज डिग्री कॉलेज के बूथों पर भी पिछले चुनाव से ज्यादा मतदाताओं ने अपने मताधिकारी का इस्तेमाल किया। शाम करीब चार बजे तक वहां के छह बूथों पर 3977 मतदाताओं में से करीब 1550 मतदाता वोट डाल चुके थे। जुबिली इंटर कॉलेज, एमजी इंटर कॉलेज में बने बूथों समेत बेतियाहाता और मोहद्दीपुर के बूथों पर भी मतदाताओं में काफी उत्साह दिखा। शायद यही वजह रही कि पिछले चुनाव की तुलना में इस बार छह फीसदी अधिक वोट पड़े। 2012 में जहां 46 फीसदी वोटिंग हुई थी वहीं इस बार 52 फीसदी वोट पड़े।
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समय मतदान प्रतिशत
9.00 9
11.00 12
1.00 35
3.00 44
5.00 52
ग्रामीण सीट पर पर्दानशीनों ने तोड़ी झिझक
पिछले चुनाव की तुलना में भले ही इस बार ग्रामीण विधानसभा सीट पर मतदान में दो फीसदी की ही बढ़ोत्तरी हुई हो मगर बूथों पर महिला वोटरों की बढ़ी दस्तक ने लोकतंत्र में महिलाओं की सहभागिता के अच्छे संकेत दिए हैं। अच्छी बात यह रही कि इन महिलाओं में सर्वाधिक संख्या मुस्लिम बहुल क्षेत्रों की पर्दानशीं वोटरों की रही। ऊंचवा हो इलाहीबाग, खोखा टोला, मिर्जापुर, निजामपुर, पिपरापुर या फिर नरसिंहपुर के बूथ। झिझक छोड़ मुस्लिम महिलाएं भी घरों के पुरुषों के साथ कदमताल करते बूथों तक पहुंची। यही नहीं ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के मुस्लिम इलाकों के बूथों पर सबसे ज्यादा भीड़ दिखाई पड़ी। बूथ के भीतर तो लाइन लगी ही रही, बाहर भी भीड़ जमी रही। शहर की तुलना में इन इलाकों में खाने-पीने की दुकानें भी सबसे ज्यादा खुली रहीं। मारवाड़ इंटर कॉलेज के सामने तो मेले जैसा नजारा था। नौसढ़, एकला, बाघागाड़ा आदि क्षेत्रों के वोटरों में भी काफी उत्साह दिखाई पड़ा। 2012 में हुए चुनाव की तुलना में ग्रामीण विधानसभा में करीब दो फीसदी अधिक वोटिंग हुई। पिछले बार 55.20 फीसदी मतदान हुआ था तो इस बार 57.43 फीसदी।
समय मतदान प्रतिशत
9.00 10.06
11.00 26
1.00 38.66
3.00 48.73
5.00 57.43
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मतदान सुबह सात बजे शुरू हुआ, मगर 77 बूथों पर ईवीएम खराब हो जाने से आधे से करीब एक घंटे तक मतदान प्रभावित रहा। इनमें ज्यादातर ईवीएम शहर विधानसभा क्षेत्र के हैं, जो वोटिंग शुरू होते ही दगा दे गए। छिटपुट घटनाओं को छोड़ दें तो मतदान शांतिपूर्ण रहा। सहजनवां में भाजपा और सपा के दो-दो एजेंट का अपहरण करने पर बसपा प्रत्याशी जीएम सिंह के बेटे और भतीजे समेत 15 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ तो वहीं पिपराइच क्षेत्र में बोलेरो से रुपये बांटते दो लोगों को पकड़कर ग्रामीणों ने पुलिस के हवाले कर दिया। पिपराइच के ही बूथ संख्या 167 पर ईवीएम में हाथी निशान के सामने बटन को किसी ने मार्कर से रंग दिया, जिस पर दूसरी पार्टी के प्रत्याशियों के एजेंटों ने 20 मिनट तक हंगामा किया।
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शहर के वीआईपी बूथों पर धुला कम वोटिंग का दाग
शहर के पॉश इलाकों सिविल लाइंस, बेतियाहाता, मोहद्दीपुर आदि मोहल्लों में स्थापित वीआईपी बूथों पर इस बार खराब वोटिंग का दाग थोड़ा धुलता दिखाई पड़ा। कार्मल गर्ल्स इंटर कालेज के कई बूथों में पिछले दो-तीन चुनावों से तीन फीसदी, सात फीसदी और 13 फीसदी ही वोट पड़ते थे। ज्यादा तो नहीं मगर इस बार इस वोटिंग प्रतिशत में थोड़ा सुधार हुआ है। कार्मल के आठ बूथों में से छह बूथों पर साढ़े चार बजे तक 30 से 40 फीसदी वोटिंग हो चुकी थी। वहीं, कई वोटर मतदान के लिए लाइन में लगे थे। वहां के सभी बूथों पर सुबह 11 बजे ही 10 से 15 फीसदी मतदाता वोट डाल चुके थे। सेंट एंड्रयूज डिग्री कॉलेज के बूथों पर भी पिछले चुनाव से ज्यादा मतदाताओं ने अपने मताधिकारी का इस्तेमाल किया। शाम करीब चार बजे तक वहां के छह बूथों पर 3977 मतदाताओं में से करीब 1550 मतदाता वोट डाल चुके थे। जुबिली इंटर कॉलेज, एमजी इंटर कॉलेज में बने बूथों समेत बेतियाहाता और मोहद्दीपुर के बूथों पर भी मतदाताओं में काफी उत्साह दिखा। शायद यही वजह रही कि पिछले चुनाव की तुलना में इस बार छह फीसदी अधिक वोट पड़े। 2012 में जहां 46 फीसदी वोटिंग हुई थी वहीं इस बार 52 फीसदी वोट पड़े।
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समय मतदान प्रतिशत
9.00 9
11.00 12
1.00 35
3.00 44
5.00 52
ग्रामीण सीट पर पर्दानशीनों ने तोड़ी झिझक
पिछले चुनाव की तुलना में भले ही इस बार ग्रामीण विधानसभा सीट पर मतदान में दो फीसदी की ही बढ़ोत्तरी हुई हो मगर बूथों पर महिला वोटरों की बढ़ी दस्तक ने लोकतंत्र में महिलाओं की सहभागिता के अच्छे संकेत दिए हैं। अच्छी बात यह रही कि इन महिलाओं में सर्वाधिक संख्या मुस्लिम बहुल क्षेत्रों की पर्दानशीं वोटरों की रही। ऊंचवा हो इलाहीबाग, खोखा टोला, मिर्जापुर, निजामपुर, पिपरापुर या फिर नरसिंहपुर के बूथ। झिझक छोड़ मुस्लिम महिलाएं भी घरों के पुरुषों के साथ कदमताल करते बूथों तक पहुंची। यही नहीं ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के मुस्लिम इलाकों के बूथों पर सबसे ज्यादा भीड़ दिखाई पड़ी। बूथ के भीतर तो लाइन लगी ही रही, बाहर भी भीड़ जमी रही। शहर की तुलना में इन इलाकों में खाने-पीने की दुकानें भी सबसे ज्यादा खुली रहीं। मारवाड़ इंटर कॉलेज के सामने तो मेले जैसा नजारा था। नौसढ़, एकला, बाघागाड़ा आदि क्षेत्रों के वोटरों में भी काफी उत्साह दिखाई पड़ा। 2012 में हुए चुनाव की तुलना में ग्रामीण विधानसभा में करीब दो फीसदी अधिक वोटिंग हुई। पिछले बार 55.20 फीसदी मतदान हुआ था तो इस बार 57.43 फीसदी।
समय मतदान प्रतिशत
9.00 10.06
11.00 26
1.00 38.66
3.00 48.73
5.00 57.43