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पदक कहां दूर है, संसाधन दो-दिग्गजों को जोड़ो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Sun, 12 Aug 2018 01:41 AM IST
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फुटबॉल कोच मुश्ताक अली।
- फोटो : amar ujala
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अजय शंकर तिवारी
गोरखपुर। खेल और खिलाड़ियों पर सरकार ध्यान दे रही है, लेकिन अभी इस दिशा में बहुत कुछ करना है। अगर हमें अंतरराष्ट्रीय पोडियम पर तिरंगा लहराते देखते रहना है तो खिलाड़ियों की नींव मजबूत करनी होगी। स्कूल ही नहीं, गांव-गली स्तर पर प्रतिभा की पहचान कर उन्हें तराशना होगा। संसाधन देना होगा। यदि इस काम में पुराने दिग्गज खिलाड़ियों को जोड़ा जाए तो और बेहतर परिणाम आएंगे। इससे दो फायदे होंगे, एक तो भूले-बिसरे खिलाड़ियों को तवज्जो मिलेगी, दूसरे उनके तराशे गए खिलाड़ी पदक दिलाएंगे।
यह कहना है पूर्व अंतरराष्ट्रीय फुटबॉलर और स्कूल गेम्स फेडरेशन आफ इंडिया के चयनकर्ता मुश्ताक अली का।
गोरखपुर के दौरे पर आए बनारस निवासी मुश्ताक ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कहा कि अच्छे खिलाड़ी तैयार करने हैं तो स्कूलों में खेल को अनिवार्य करना होगा। ज्यादा प्रतियोगिताएं करानी होंगी। लक्ष्मण एवार्डी फुटबॉलर ने कहा कि प्रतिभाएं गांवों से भी मिलेंगी। आज देश में बहुत से ऐसे खिलाड़ी हैं जो छोटे कस्बों, गांवों से आकर दिग्गजों को धूल चटा रहे हैं। संतोष ट्रॉफी में चार राज्यों (यूपी, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और रेलवे) से खेल चुके यूपी के एकमात्र फुटबॉलर मुश्ताक ने एक सवाल के जवाब में कहा कि सरकार को हर जिले में स्टेडियम बनवाना चाहिए ताकि खिलाड़ियों को अभ्यास और टूर्नामेंट मिल सकें। अगर हम फुटबॉल की ही बात करें तो इतना बड़ा स्टेट है यूपी पर यहां केवल मल्टीपरपज ग्राउंड हैं, जहां तमाम खेल होते रहते हैं, जबकि दिल्ली, कोलकाता, गोवा में ऐसा नहीं है।
अब तो कई कारपोरेट घराने आगे आने लगे हैं। ऐसे लोगों को और जोड़ना चाहिए। साई के स्पोर्ट्स हॉस्टल और स्पोर्ट्स कॉलेज की चयन समिति के सदस्य रह चुके मुश्ताक ने कहा कि जब हॉस्टल और कॉलेज से खिलाड़ी निकलता है तो वह कहां जाए? जिन खिलाड़ियों का सरकार ने इतने वर्षों तक खेलने, पढ़ने का खर्च उठाया, उनके लिए भी तो कोई जॉब होना चाहिए जहां से वे खेल सकें। मोहम्मडन स्पोर्टिंग के पूर्व कप्तान और मोहन बागान, ईस्ट बंगाल, महिंद्रा एंड महिंद्रा, मुंबई, पश्चिम रेलवे से खेल चुके मुश्ताक कुछ पुराने खिलाड़ियों के साथ खुद आसपास के जिलों के गांवों से फुटबॉलरों को तराशने में जुटे हैं। यूपी सॉकर कन्फेडरेशन के अध्यक्ष के तौर पर भी वे प्रतिभावान खिलाड़ियों को आगे ला रहे हैं।
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गोरखपुर। खेल और खिलाड़ियों पर सरकार ध्यान दे रही है, लेकिन अभी इस दिशा में बहुत कुछ करना है। अगर हमें अंतरराष्ट्रीय पोडियम पर तिरंगा लहराते देखते रहना है तो खिलाड़ियों की नींव मजबूत करनी होगी। स्कूल ही नहीं, गांव-गली स्तर पर प्रतिभा की पहचान कर उन्हें तराशना होगा। संसाधन देना होगा। यदि इस काम में पुराने दिग्गज खिलाड़ियों को जोड़ा जाए तो और बेहतर परिणाम आएंगे। इससे दो फायदे होंगे, एक तो भूले-बिसरे खिलाड़ियों को तवज्जो मिलेगी, दूसरे उनके तराशे गए खिलाड़ी पदक दिलाएंगे।
यह कहना है पूर्व अंतरराष्ट्रीय फुटबॉलर और स्कूल गेम्स फेडरेशन आफ इंडिया के चयनकर्ता मुश्ताक अली का।
गोरखपुर के दौरे पर आए बनारस निवासी मुश्ताक ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कहा कि अच्छे खिलाड़ी तैयार करने हैं तो स्कूलों में खेल को अनिवार्य करना होगा। ज्यादा प्रतियोगिताएं करानी होंगी। लक्ष्मण एवार्डी फुटबॉलर ने कहा कि प्रतिभाएं गांवों से भी मिलेंगी। आज देश में बहुत से ऐसे खिलाड़ी हैं जो छोटे कस्बों, गांवों से आकर दिग्गजों को धूल चटा रहे हैं। संतोष ट्रॉफी में चार राज्यों (यूपी, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और रेलवे) से खेल चुके यूपी के एकमात्र फुटबॉलर मुश्ताक ने एक सवाल के जवाब में कहा कि सरकार को हर जिले में स्टेडियम बनवाना चाहिए ताकि खिलाड़ियों को अभ्यास और टूर्नामेंट मिल सकें। अगर हम फुटबॉल की ही बात करें तो इतना बड़ा स्टेट है यूपी पर यहां केवल मल्टीपरपज ग्राउंड हैं, जहां तमाम खेल होते रहते हैं, जबकि दिल्ली, कोलकाता, गोवा में ऐसा नहीं है।
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अब तो कई कारपोरेट घराने आगे आने लगे हैं। ऐसे लोगों को और जोड़ना चाहिए। साई के स्पोर्ट्स हॉस्टल और स्पोर्ट्स कॉलेज की चयन समिति के सदस्य रह चुके मुश्ताक ने कहा कि जब हॉस्टल और कॉलेज से खिलाड़ी निकलता है तो वह कहां जाए? जिन खिलाड़ियों का सरकार ने इतने वर्षों तक खेलने, पढ़ने का खर्च उठाया, उनके लिए भी तो कोई जॉब होना चाहिए जहां से वे खेल सकें। मोहम्मडन स्पोर्टिंग के पूर्व कप्तान और मोहन बागान, ईस्ट बंगाल, महिंद्रा एंड महिंद्रा, मुंबई, पश्चिम रेलवे से खेल चुके मुश्ताक कुछ पुराने खिलाड़ियों के साथ खुद आसपास के जिलों के गांवों से फुटबॉलरों को तराशने में जुटे हैं। यूपी सॉकर कन्फेडरेशन के अध्यक्ष के तौर पर भी वे प्रतिभावान खिलाड़ियों को आगे ला रहे हैं।
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