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मजलिसों में बयां की इमाम हसन-हुसैन की शख्सियत

Sun, 24 Sep 2017 02:15 AM IST
Updated Sun, 24 Sep 2017 02:15 AM IST
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मजलिसों में बयां की इमाम हसन-हुसैन की शख्सियत

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गोरखपुर।
मुहर्रम की दूसरी तारीख पर शहर में जगह-जगह मजलिसों का दौर चला। इसमें वक्ताओं ने इमाम हसन और हुसैन की जिंदगी पर रोशनी डाली।
गाजी मस्जिद गाजी रौजा में ‘जिक्रे शोहदा-ए-कर्बला’ की मजलिस में शनिवार को मुफ्ती अख्तर हुसैन ने कहा कि हदीस में नबी-ए-पाक ने फरमाया है कि हसन और हुसैन जन्नती जवानों के सरदार हैं। नबी-ए-पाक ने कहा है कि जिसने इमाम हसन और हुसैन से मोहब्बत की, उसने मुझसे मोहब्बत की। जिसने उन दोनों से दुश्मनी की, उसने मुझसे दुश्मनी की। नार्मल स्थित दरगाह हजरत मुबारक खां शहीद मस्जिद में ‘जिक्रे शोहदा-ए-कर्बला’ के दौरान मुफ्ती मोहम्मद अजहर शम्सी ने कहा कि नबी-ए-पाक ने फरमाया है कि हसन और हुसैन दुनिया में मेरे दो फूल हैं। एक और हदीस में आया है कि नबी-ए-पाक से पूछा गया कि अहले बैत में आपको सबसे ज्यादा कौन प्यारा है तो आपने फरमाया- हसन और हुसैन। दरगाह मस्जिद के इमाम मौलाना मकसूद आलम मिस्बाही ने कहा कि नबी-ए-पाक एक मर्तबा खुत्बा दे रहे थे कि अचानक इमाम हसन व इमाम हुसैन तशरीफ लाए। वह चलते-चलते गिर पड़ते थे। उनको गिरते देखा तो नबी-ए-पाक ने खुतबा छोड़ दिया और मिंबर से नीचे उतरे और उन दोनों को गोद में उठाया। अपने सामने बैठाकर कहा कि मैंने इन दोनों बच्चों को गिरते देखा तो सब्र न कर सका।
चिश्तिया मस्जिद बक्शीपुर में मजलिस के दौरान हाफिज महमूद रजा कादरी ने कहा कि एक दिन हजरत इमाम हसन और हुसैन कुश्ती लड़ने लगे। नबी-ए-पाक ने इमाम हसन से फरमाया हुसैन को पकड़ लो। हजरत फातिमा कहने लगीं, ‘या रसूलल्लाह आप बड़े को कहते हैं कि छोटे को पकड़ लो।’ हुजूर ने फरमाया जिब्रील (फरिश्ता) तो हुसैन से कह रहे हैं कि हसन को पकड़ लो। मस्जिद हसनैन घासीकटरा, नूर मस्जिद तुर्कमानपुर, जामा मस्जिद मुकीम शाह बुलाकीपुर, इमामबाड़ा स्टेट मियां बाजार आदि में भी मजलिस हुई।
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इमामबाड़ा में तैयारियां अंतिम दौर में
मुहर्रम को देखते हुए इमामबाड़ा में तैयारियां अंतिम दौर में पहुंच गई हैं। शनिवार को इमामबाड़े में साफ-सफाई, पेंटिंग आदि का काम हुआ। यहां जगह-जगह लाउडस्पीकर लगाए गए हैं। साथ ही सोने-चांदी के ताजिए की भी सफाई हो रही है। रविवार से सोने-चांदी के ताजिए जायरीनों के लिए इमामबाड़ा स्थित इमामचौक पर रख दी जाएंगी। रविवार से लोग इन पर जियारत कर सकेंगे।
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इमामचौकों पर भी चल रही तैयारियां
शहर के तमाम इमामचौकों पर भी मुहर्रम की तैयारियां तेज हो गई हैं। ताजिएदार साफ-सफाई और रंगरोगन में जुटे हैं। इमामचौकों पर फातिहाख्वानी शुरू हो चुकी है। यहां बज रहे ढोल-ताशे की आवाज के बीच अखाड़ों के जवान अभ्यास में जुटे हैं। जुलूस में ये अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे।
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