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पढ़ने में मेधावी, हंसमुख था नवनीत

Fri, 22 Sep 2017 01:32 AM IST
Updated Fri, 22 Sep 2017 01:32 AM IST
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पढ़ने में मेधावी, हंसमुख था नवनीत

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गोरखपुर।
नवनीत प्रकाश पढ़ने में तेज था। साइंस, मैथ सहित अन्य विषयों पर उसकी मजबूत पकड़ थी। टेस्ट में भी उसे बढ़िया मार्क्स मिले थे। प्रिंसिपल सिस्टर ईश प्रिया भी उसका बखान कर रही थीं। प्रिंसिपल ने खुद बताया कि बच्चा पढ़ने में तेज था। हर बार परीक्षा में उसे अच्छे मार्क्स मिलते थे। हंसमुख स्वभाव का नवनीत आत्महत्या कर लेगा, इसकी कल्पना भी नहीं की थी। आत्महत्या की जो भी वजह हो, लेकिन बड़ा नुकसान स्कूल का हुआ है। कैंपस से एक मेधावी चला गया। 15 सितंबर को नवनीत सुबह सात बजे स्कूल आया था। परीक्षा देने के बाद वह साढ़े ग्यारह बजे घर चला गया। इस बीच क्या हुआ, यह बता पाना कठिन है। नवनीत को ऑटो से स्कूल लेकर जाने वाले संजीव गुप्ता का कहना है कि नवनीत कभी परेशान नहीं दिखता था। वह सबसे हंसकर बातें करता था। 15 सितंबर को भी वह सामान्य था। वह इस तरह का कदम उठाएगा, इसकी उम्मीद नहीं थी। मोहनापुर से ही स्कूल जाने वाली उसकी दोस्त प्रेरणा, सृष्टि, एलिशा, प्रकाश, कृष्णा और अंशिका भी घटना से आहत हैं। वे कहते हैं कि सच्चा दोस्त छोड़कर चला गया।

इनसेट में

‘मां मैंने तो आज तहलका मचा दिया’
पांच सितंबर को टीचर्स डे पर जब नवनीत स्कूल से घर पहुंचा तो उसने मां से कहा, आज मैने तहलका मचा दिया। चुटकुले सुनाए और इनाम भी जीता। स्कूल में मेरे लिए लोगों ने खूब तालियां बजाईं। इतना बताते-बताते नवनीत की मां सुनीता देवी फफक पड़ीं। उन्होंने बताया कि क्लास में कोई भी बच्चा शरारत करे, लेकिन सजा नवनीत को ही भुगतनी पड़ती थी। सुनीता देवी ने कहा कि जैसा मेरा साथ हुआ, वैसा ही क्लास टीचर के साथ होना चाहिए। मेरा एकलौता बेटा चला गया। सब कुछ बर्बाद हो गया।
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क्लास टीचर ने दो बार घर पर किया फोन
16 सितंबर की सुबह जब नवनीत प्रकाश स्कूल नहीं पहुंचा तो क्लास टीचर भावना राय ने घरवालों को फोन किया। तब पता चला कि बच्चा बीमार है। मैडम ने टेक केयर कहकर फोन काट दिया। बड़ी बहन सोनम ने बताया कि जब नवनीत को पता चला कि मैडम ने फोन किया था तो उसकी आंखों से आंसू निकलने लगे। 18 सितंबर को भावना ने फिर फोन करके हाल-चाल लिया था।
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क्लास मानीटर करता था शिकायत
सेंट एंथोनी स्कूल से पढ़कर निकली सोनम ने आरोप लगाया कि क्लास मानीटर अक्सर भाई की शिकायत करता था। इसकी टीस नवनीत को थी। वह अक्सर कहता था कि मानीटर को ही टॉफी मिलती थी। 14 सितंबर को नवनीत एसएसटी की कॉपी नहीं ले गया था। इसी वजह से मैडम ने उसे तीन घंटे तक खड़ा रखा था। नवनीत के पांच अच्छे दोस्त (देवेश, चैतन्य, शौर्य, अनन्य और आदित्य) हैं। इन सबसे जानकारी ली जा सकती है।

1961 से चल रहा स्कूल
सेंट एंथोनी स्कूल की स्थापना 1961 में हुई। वहां कक्षा 10 तक की कक्षाएं चलती हैं। यह स्कूल मिशनरीज का है। प्रबंधतंत्र से संबंधित फादर जान जोसफ का कहना है कि चाइल्ड प्रोटक्शन एक्ट की सभी नियमावली को ध्यान में रखकर पढ़ाई कराई जाती है। पहली बार इस तरह का मामला सामने आया है। इसकी छानबीन कराके कार्रवाई की जाएगी। स्कूल की मान्यता सीबीएसई से है।


फोटो
शव के घर पहुंचते ही मच गया कोहराम
पादरी बाजार।
नवनीत का शव पोस्टमार्टम के बाद गुरुवार को देरशाम जब घर पहुंचा तो कोहराम मच गया। मां सुनीता की चीख-पुकार सुनकर वहां मौजूद लोगों का कलेजा दहल गया। सबकीआंखें नम थीं। नवनीत का पैतृक आवास कुशीनगर में है। वहां से भी बड़ी संख्या में लोग गोरखपुर पहुंचे और नवनीत को श्रद्धांजलि दी।
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