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प्रो. सदानंद गुप्त बनें हिन्दी संस् थान के कार्यकारी अध्यक्ष
Updated Wed, 13 Sep 2017 01:44 AM IST
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गोरखपुर।
गोरखपुर यूनिवर्सिटी के हिंदी विभाग के रिटायर्ड शिक्षक प्रो. सदानंद गुप्त को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। मंगलवार की दोपहर मुख्यमंत्री कार्यालय से मिली सूचना के बाद यूनिवर्सिटी के शिक्षकों में खुशी का माहौल है।
प्रो. गुप्त ने 11 फरवरी 1980 को गोरखपुर यूनिवर्सिटी के हिंदी विभाग में बतौर प्रवक्ता सेवाएं शुरू की। जून 2013 में प्रोफेसर पद से रिटायर्ड हुए। मंगलवार को जब कार्यकारी अध्यक्ष बनने की सूचना आई तो प्रो. गुप्त हिंदी विभाग में आयोजित रिफ्रेशर कोर्स में व्याख्यान दे रहे थे। प्रो. गुप्त के पास पहले से भी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं। वह भारत सरकार के दूरसंचार विभाग की हिंदी सलाहकार समिति के सदस्य हैं। गीताप्रेस से निकलने वाली प्रसिद्ध कल्याण, पत्रिका, गीतावाटिका और प्रसिद्ध समाजसेवी हनुमान प्रसाद पोद्दार से भी जुडे़ रहे हैं। प्रो. गुप्त अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रदेश अध्यक्ष और सरस्वती शिशु मंदिर हॉयर सेकेंड्री के प्रबंधक भी रह चुके हैं। हिंदी दिवस के दो दिन पहले गोरखपुर की झोली में बड़ी उपलब्धि आई हैं। वहीं प्रो. गुप्त ने कहा कि वह हिंदी के विकास के लिए पूरे मनोयोग से काम करेंगे। वह दो बार संस्थान के सदस्य रह चुके हैं इसलिए तमाम समस्याओं से वाकिफ हैं। उन्होंने कहा कि जिन कमियों को वह जानते हैं, उन्हें दूर करना प्राथमिकता होगी। इसके साथ ही जो नई चुनौतियां सामने आएंगी, उनका भी त्वरित गति से समाधान किया जाएगा।
आरएसएस से जुड़े रहे
आरएसएस से लंबे समय से जुड़े रहे प्रो. गुप्त मूलरूप से झारखंड के रहने वाले हैं। एक बार गोरखपुर किसी काम के सिलसिले में आना हुआ तो यहीं के होकर रह गए। आरएसएस की साहित्यकारों की संस्था अखिल भारतीय साहित्य परिषद के सदस्य रहे प्रो. गुप्त साहित्यिक पत्रिका समन्वय का संपादन करते हैं।
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ऐसे काम करता है हिंदी संस्थान
उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, भाषा विभाग के तहत काम करता है। अन्य कार्यक्रमों के अलावा हिंदी का प्रचार-प्रसार इसकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है। मुख्यमंत्री इसके पदेन अध्यक्ष होते हैं। वहीं इसके कार्यकारी अध्यक्ष और निदेशक की नियुक्ति करते हैं।
गोरखपुर यूनिवर्सिटी के हिंदी विभाग के रिटायर्ड शिक्षक प्रो. सदानंद गुप्त को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। मंगलवार की दोपहर मुख्यमंत्री कार्यालय से मिली सूचना के बाद यूनिवर्सिटी के शिक्षकों में खुशी का माहौल है।
प्रो. गुप्त ने 11 फरवरी 1980 को गोरखपुर यूनिवर्सिटी के हिंदी विभाग में बतौर प्रवक्ता सेवाएं शुरू की। जून 2013 में प्रोफेसर पद से रिटायर्ड हुए। मंगलवार को जब कार्यकारी अध्यक्ष बनने की सूचना आई तो प्रो. गुप्त हिंदी विभाग में आयोजित रिफ्रेशर कोर्स में व्याख्यान दे रहे थे। प्रो. गुप्त के पास पहले से भी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं। वह भारत सरकार के दूरसंचार विभाग की हिंदी सलाहकार समिति के सदस्य हैं। गीताप्रेस से निकलने वाली प्रसिद्ध कल्याण, पत्रिका, गीतावाटिका और प्रसिद्ध समाजसेवी हनुमान प्रसाद पोद्दार से भी जुडे़ रहे हैं। प्रो. गुप्त अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रदेश अध्यक्ष और सरस्वती शिशु मंदिर हॉयर सेकेंड्री के प्रबंधक भी रह चुके हैं। हिंदी दिवस के दो दिन पहले गोरखपुर की झोली में बड़ी उपलब्धि आई हैं। वहीं प्रो. गुप्त ने कहा कि वह हिंदी के विकास के लिए पूरे मनोयोग से काम करेंगे। वह दो बार संस्थान के सदस्य रह चुके हैं इसलिए तमाम समस्याओं से वाकिफ हैं। उन्होंने कहा कि जिन कमियों को वह जानते हैं, उन्हें दूर करना प्राथमिकता होगी। इसके साथ ही जो नई चुनौतियां सामने आएंगी, उनका भी त्वरित गति से समाधान किया जाएगा।
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आरएसएस से जुड़े रहे
आरएसएस से लंबे समय से जुड़े रहे प्रो. गुप्त मूलरूप से झारखंड के रहने वाले हैं। एक बार गोरखपुर किसी काम के सिलसिले में आना हुआ तो यहीं के होकर रह गए। आरएसएस की साहित्यकारों की संस्था अखिल भारतीय साहित्य परिषद के सदस्य रहे प्रो. गुप्त साहित्यिक पत्रिका समन्वय का संपादन करते हैं।
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ऐसे काम करता है हिंदी संस्थान
उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, भाषा विभाग के तहत काम करता है। अन्य कार्यक्रमों के अलावा हिंदी का प्रचार-प्रसार इसकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है। मुख्यमंत्री इसके पदेन अध्यक्ष होते हैं। वहीं इसके कार्यकारी अध्यक्ष और निदेशक की नियुक्ति करते हैं।