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बंद आलमारियां बढ़ा रही परेशानी
Updated Mon, 04 Sep 2017 01:24 AM IST
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गोरखपुर।
बीआरडी कांड में अपने खिलाफ केस दर्ज होने के बाद भूमिगत हुए दो बाबुओं ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन की परेशानी बढ़ा दी है। ये दोनों बाबू आलमारियों की चाबियां लेकर भूमिगत हैं। इसके चलते मेडिकल कॉलेज और नेहरू अस्पताल का काम प्रभावित हो रहा है।
बीआरडी कांड में चार चिकित्सकों के साथ चीफ फार्मासिस्ट, तीन लिपिक और पुष्पा सेल्स के मालिक के खिलाफ केस दर्ज है। इसके बाद से ही सभी भूमिगत हो गए थे। इसमें से चीफ फार्मासिस्ट गजानन जायसवाल और लिपिक संजय कॉलेज परिसर छोड़ने के साथ चाबियां दूसरे साथी कर्मचारियों को दे गए थे, लेकिन उदय और सुधीर ने अपने कार्यालय की आलमारियों की चाबियां साथ ले गए। इसके चलते मेडिकल कॉलेज प्रशासन और नेहरू अस्पताल प्रबंधन को परेशानी झेलनी पड़ रही है। हालांकि, दोनों लिपिकों की यह करतूत इन पर भारी पड़ सकती है। अब तक कॉलेज प्रशासन चाबियों का इंतजार कर रहा था, लेकिन अब इसे लेकर वह कार्रवाई की सोच रहा है। माना जा रहा है कि अगर जल्द इन लिपिकों की चाबियां कॉलेज प्रशासन तक नहीं पहुंचीं तो इस मामले में उनके खिलाफ एफआईआर कराने के लिए तहरीर भी दी जा सकती है।
बीआरडी कांड में अपने खिलाफ केस दर्ज होने के बाद भूमिगत हुए दो बाबुओं ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन की परेशानी बढ़ा दी है। ये दोनों बाबू आलमारियों की चाबियां लेकर भूमिगत हैं। इसके चलते मेडिकल कॉलेज और नेहरू अस्पताल का काम प्रभावित हो रहा है।
बीआरडी कांड में चार चिकित्सकों के साथ चीफ फार्मासिस्ट, तीन लिपिक और पुष्पा सेल्स के मालिक के खिलाफ केस दर्ज है। इसके बाद से ही सभी भूमिगत हो गए थे। इसमें से चीफ फार्मासिस्ट गजानन जायसवाल और लिपिक संजय कॉलेज परिसर छोड़ने के साथ चाबियां दूसरे साथी कर्मचारियों को दे गए थे, लेकिन उदय और सुधीर ने अपने कार्यालय की आलमारियों की चाबियां साथ ले गए। इसके चलते मेडिकल कॉलेज प्रशासन और नेहरू अस्पताल प्रबंधन को परेशानी झेलनी पड़ रही है। हालांकि, दोनों लिपिकों की यह करतूत इन पर भारी पड़ सकती है। अब तक कॉलेज प्रशासन चाबियों का इंतजार कर रहा था, लेकिन अब इसे लेकर वह कार्रवाई की सोच रहा है। माना जा रहा है कि अगर जल्द इन लिपिकों की चाबियां कॉलेज प्रशासन तक नहीं पहुंचीं तो इस मामले में उनके खिलाफ एफआईआर कराने के लिए तहरीर भी दी जा सकती है।
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