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नदियों को प्रदूषित करने वाली फैक्ट्रियों पर पहरा
Updated Sun, 08 Oct 2017 01:39 AM IST
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राजीव रंजन
गोरखपुर।
आमी को प्रदूषित करने वाली 28 और फैक्ट्रियों पर बंद होने का खतरा मंडराने लगा है। अभी हाल में गीडा की 16 फैक्ट्रियों समेत गोरखपुर की 18 फैक्ट्रियों के तालाबंदी के आदेश के बाद 28 और फैक्ट्रियों को आमी को प्रदूषित करने के संबंध में अपना पक्ष रखने का कहा गया है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, गोरखपुर ने गीडा की 28 और फैक्ट्रियों को आमी को प्रदूषित करने के मामले में नोटिस भेजा है।
आमी बचाओ मंच के संयोजक ने गीडा की फैक्ट्रियों से निकलने वाले कचरे और दूषित पानी से आमी के प्रदूषित होने के संबंध में अपील की थी। कई सुनवाइयों के बाद 12 अक्टूबर को फिर से नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में इस संबंध में सुनवाई होनी है, जिसमें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समेत गोरखपुर के विभिन्न विभागों को गोरखपुर के आसपास की नदियों को प्रदूषणमुक्त करने की दिशा में उठाए गए कदम संबंधी जानकारी देनी है। लिहाजा विभागों ने इस संबंध कार्रवाई में तेजी कर दी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, लखनऊ की ओर से गीडा समेत गोरखपुर की 18 फैक्ट्रियों को बंद करने का नोटिस भेजा गया है। वहीं क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से गीडा की 28 और फैक्ट्रियों आमी नदी को प्रदूषित करने के संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट करने संबंधी नोटिस भेजा है।
नोटिस ने बढ़ाई परेशानी
छोटी सी फैक्टरी है। इसमें बमुश्किल 100 लीटर पानी भी नहीं निकलता है। ऐसे में ट्रीटमेंट प्लांट लगाना बहुत मुश्किल है। ऐसे में नोटिस परेशानी का सबब है।
राजेश यादव, मालिक, आरती रबर प्रोडक्ट्स
नोटिस का जवाब तैयार कर रहे
प्रदूषण नियंत्रण विभाग की ओर से कारण बताओ नोटिस मिली है। नोटिस का जवाब तैयार किया जा रहा है। देखते हैं आगे क्या होता है।
अरुण कुमार दुबे, मालिक, जीडी प्लास्टो प्रोडक्ट्स
आमी को प्रदूषित करने वाली गीडा की 28 और फैक्ट्रियों को कारण बताओ नोटिस भेजा गया है। इसके बाद इनके खिलाफ कार्रवाई होगी।
टीएन सिंह, एआरओ, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, गोरखपुर
जल अधिनियम 1974 के तहत भेजा गया नोटिस
इस अधिनियम के तहत कोई व्यक्ति या संस्था जो जानबूझ कर जहरीले या प्रदूषण फैलाने वाले तत्वों को पानी में प्रवेश करने देता है, वह अपराधी है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण विभाग ऐसी फैक्ट्रियों के खिलाफ मुकदमा भी चला सकता है।
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गीडा की इन 28 उद्योगों को मिला नोटिस
एवन कार्ड बोर्ड, आदित्य इंडस्ट्रीज, हिंदुस्तान स्टील, स्टार इंटरप्राइजेज, अन्नपूर्णा प्लास्टिक प्रोडक्ट्स, राम एग्रो इंडस्ट्रीज, डिवाइन पॉलीमर्स, सचिन इंडस्ट्रीज, जीडी प्लास्टिक प्रोडक्ट्स, अल अहमद इंटरप्राइजेज, कपिल इंडस्ट्रीज, खुशबू पैकेजिंग, शुभ सत्य इंडस्ट्रीज, आनंदी इंडस्ट्रीज, रानी सती पैकर्स, कुसुम प्लास्टिक उद्योग, मां विंध्यवासिनी इंजीनियरिंग, राम जानकी पेंट्स, विनायक उद्योग, नवीन इंडिया, उर्मिला पैक इंडिया, स्वास्तिक प्लास्टिक, एके सुपर प्लास्टो, भगवती इंडस्ट्रीज, आरती रबर प्रोडक्ट्स, हनुमान केमिकल्स, रानी सती इंटरप्राइजेज, सावित्री इंडस्ट्रीज
गीडा सीईओ के समक्ष रखेंगे परेशानी
चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के उपाध्यक्ष आरएन सिंह ने कहा कि 18 फैक्ट्रियों की बंदी के आदेश के बाद 28 और फैक्ट्रियों को प्रदूषण फैलाने की बात कहते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। गीडा की फैक्ट्रियों के लिए यह बहुत ही खराब स्थिति है। गीडा के उद्योगों को अगर बचाना है तो सरकार को अपनी तरफ से कोशिश करनी होगी। अगर 115 करोड़ का ट्रीटमेंट प्लांट के लिए बजट नहीं मिल पा रहा है तो छोटे छोटे दो ट्रीटमेंट प्लांट लगाने पर गीडा प्रशासन को विचार करना चाहिए। सोमवार को गीडा सीईओ के साथ बैठक में इस मसले को रखा जाएगा। सरकार और गीडा प्रशासन चाहे तो उद्योगों को इस स्थिति से उबारा जा सकता है।
उद्योगों को बचाने को जिम्मेदार गीडा प्रशासन बेबस
गीडा की स्थापना की शर्तों में उद्योगों से निकलने वाले कचरे और दूषित पानी के ट्रीटमेंट के लिए कॉमन इंफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) लगाना भी था, लेकिन गीडा की स्थापना के ढाई दशक बाद भी गीडा प्रशासन सीईटीपी नहीं लगा सका है। ऐसे में गीडा के पास से गुजर रही आमी का पानी पूरी तरह से जहरीला हो चुका है। ऐसे में आमी बचाओ मंच के संयोजक की अपील पर एनजीटी ने सख्त रुख अपनाया है। इसके बाद गीडा प्रशासन ने सीईटीपी लगाने का प्रयास शुरू किया, लेकिन यहां के उद्योगों के लिए करीब 115 करोड़ की लागत से प्रस्तावित सीईटीपी प्लांट के प्रस्ताव को केंद्र सरकार से मंजूरी नहीं मिल पा रही है।
गोरखपुर।
आमी को प्रदूषित करने वाली 28 और फैक्ट्रियों पर बंद होने का खतरा मंडराने लगा है। अभी हाल में गीडा की 16 फैक्ट्रियों समेत गोरखपुर की 18 फैक्ट्रियों के तालाबंदी के आदेश के बाद 28 और फैक्ट्रियों को आमी को प्रदूषित करने के संबंध में अपना पक्ष रखने का कहा गया है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, गोरखपुर ने गीडा की 28 और फैक्ट्रियों को आमी को प्रदूषित करने के मामले में नोटिस भेजा है।
आमी बचाओ मंच के संयोजक ने गीडा की फैक्ट्रियों से निकलने वाले कचरे और दूषित पानी से आमी के प्रदूषित होने के संबंध में अपील की थी। कई सुनवाइयों के बाद 12 अक्टूबर को फिर से नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में इस संबंध में सुनवाई होनी है, जिसमें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समेत गोरखपुर के विभिन्न विभागों को गोरखपुर के आसपास की नदियों को प्रदूषणमुक्त करने की दिशा में उठाए गए कदम संबंधी जानकारी देनी है। लिहाजा विभागों ने इस संबंध कार्रवाई में तेजी कर दी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, लखनऊ की ओर से गीडा समेत गोरखपुर की 18 फैक्ट्रियों को बंद करने का नोटिस भेजा गया है। वहीं क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से गीडा की 28 और फैक्ट्रियों आमी नदी को प्रदूषित करने के संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट करने संबंधी नोटिस भेजा है।
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नोटिस ने बढ़ाई परेशानी
छोटी सी फैक्टरी है। इसमें बमुश्किल 100 लीटर पानी भी नहीं निकलता है। ऐसे में ट्रीटमेंट प्लांट लगाना बहुत मुश्किल है। ऐसे में नोटिस परेशानी का सबब है।
राजेश यादव, मालिक, आरती रबर प्रोडक्ट्स
नोटिस का जवाब तैयार कर रहे
प्रदूषण नियंत्रण विभाग की ओर से कारण बताओ नोटिस मिली है। नोटिस का जवाब तैयार किया जा रहा है। देखते हैं आगे क्या होता है।
अरुण कुमार दुबे, मालिक, जीडी प्लास्टो प्रोडक्ट्स
आमी को प्रदूषित करने वाली गीडा की 28 और फैक्ट्रियों को कारण बताओ नोटिस भेजा गया है। इसके बाद इनके खिलाफ कार्रवाई होगी।
टीएन सिंह, एआरओ, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, गोरखपुर
जल अधिनियम 1974 के तहत भेजा गया नोटिस
इस अधिनियम के तहत कोई व्यक्ति या संस्था जो जानबूझ कर जहरीले या प्रदूषण फैलाने वाले तत्वों को पानी में प्रवेश करने देता है, वह अपराधी है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण विभाग ऐसी फैक्ट्रियों के खिलाफ मुकदमा भी चला सकता है।
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गीडा की इन 28 उद्योगों को मिला नोटिस
एवन कार्ड बोर्ड, आदित्य इंडस्ट्रीज, हिंदुस्तान स्टील, स्टार इंटरप्राइजेज, अन्नपूर्णा प्लास्टिक प्रोडक्ट्स, राम एग्रो इंडस्ट्रीज, डिवाइन पॉलीमर्स, सचिन इंडस्ट्रीज, जीडी प्लास्टिक प्रोडक्ट्स, अल अहमद इंटरप्राइजेज, कपिल इंडस्ट्रीज, खुशबू पैकेजिंग, शुभ सत्य इंडस्ट्रीज, आनंदी इंडस्ट्रीज, रानी सती पैकर्स, कुसुम प्लास्टिक उद्योग, मां विंध्यवासिनी इंजीनियरिंग, राम जानकी पेंट्स, विनायक उद्योग, नवीन इंडिया, उर्मिला पैक इंडिया, स्वास्तिक प्लास्टिक, एके सुपर प्लास्टो, भगवती इंडस्ट्रीज, आरती रबर प्रोडक्ट्स, हनुमान केमिकल्स, रानी सती इंटरप्राइजेज, सावित्री इंडस्ट्रीज
गीडा सीईओ के समक्ष रखेंगे परेशानी
चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के उपाध्यक्ष आरएन सिंह ने कहा कि 18 फैक्ट्रियों की बंदी के आदेश के बाद 28 और फैक्ट्रियों को प्रदूषण फैलाने की बात कहते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। गीडा की फैक्ट्रियों के लिए यह बहुत ही खराब स्थिति है। गीडा के उद्योगों को अगर बचाना है तो सरकार को अपनी तरफ से कोशिश करनी होगी। अगर 115 करोड़ का ट्रीटमेंट प्लांट के लिए बजट नहीं मिल पा रहा है तो छोटे छोटे दो ट्रीटमेंट प्लांट लगाने पर गीडा प्रशासन को विचार करना चाहिए। सोमवार को गीडा सीईओ के साथ बैठक में इस मसले को रखा जाएगा। सरकार और गीडा प्रशासन चाहे तो उद्योगों को इस स्थिति से उबारा जा सकता है।
उद्योगों को बचाने को जिम्मेदार गीडा प्रशासन बेबस
गीडा की स्थापना की शर्तों में उद्योगों से निकलने वाले कचरे और दूषित पानी के ट्रीटमेंट के लिए कॉमन इंफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) लगाना भी था, लेकिन गीडा की स्थापना के ढाई दशक बाद भी गीडा प्रशासन सीईटीपी नहीं लगा सका है। ऐसे में गीडा के पास से गुजर रही आमी का पानी पूरी तरह से जहरीला हो चुका है। ऐसे में आमी बचाओ मंच के संयोजक की अपील पर एनजीटी ने सख्त रुख अपनाया है। इसके बाद गीडा प्रशासन ने सीईटीपी लगाने का प्रयास शुरू किया, लेकिन यहां के उद्योगों के लिए करीब 115 करोड़ की लागत से प्रस्तावित सीईटीपी प्लांट के प्रस्ताव को केंद्र सरकार से मंजूरी नहीं मिल पा रही है।