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वातावरण के प्रति संजीदा होने की जरूरत: डॉ. सत्यनारायण
Updated Tue, 26 Sep 2017 09:39 PM IST
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गोरखपुर।
मारवाड़ बिजनेस स्कूूल में चल रहे दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का मंगलवार को समापन हुआ। मुख्य अतिथि इथोपिया स्थित हवास यूनिवर्सिटी के शिक्षक डॉ. सत्य नारायण ने कहा कि हानिकारक रसायनों का प्रयोग वातावरण के लिए बेहद घातक है। इसका असर तुरंत नजर नहीं आता मगर दीर्घकालिक होता है। वातावरण के प्रति संजीदा होने और हानिकारक रसायनों के प्रयोग से बचने की जरूरत है। समापन समारोह की अध्यक्षता करते हुए त्रिभुवन यूनिवर्सिटी, नेपाल के प्रो. एमएल शर्मा ने कहा कि पर्यावरण एवं विकास में सामंजस्य बनाने की आवश्यकता है। ग्रीन केमिस्ट्री के विभिन्न पहलू इसमें सहायक सिद्ध हो सकते हैं।
समापन समारोह के पूर्व चार तकनीकी सत्र आयोजित हुए। 24 शोध पत्र प्रस्तुत हुए। कार्यक्रम में उत्कृष्ट शोध पत्र प्रस्तुत करने के लिए प्रथम पुरस्कार अराधना, द्वितीय प्रियंका सिंह और अविनाश पांडेय को तृतीय स्थान हासिल हुआ। पोस्टर प्रजेंटेशन में पहला स्थान शोभना डार्थी फेडरिक, दूसरा स्थान अंजली और तीसरा स्थान मधुलता और हरिकेश को मिला। कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन प्राचार्य डॉ. सतोष मणि त्रिपाठी ने किया। इस अवसर पर डॉ. चंद्रमोहन त्रिपाठी, डॉ. नेत्र लाल भंडारी, प्रो. मोतीलाल शर्मा, डॉ. एमएल शर्मा आदि मौजूद थे।
मारवाड़ बिजनेस स्कूूल में चल रहे दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का मंगलवार को समापन हुआ। मुख्य अतिथि इथोपिया स्थित हवास यूनिवर्सिटी के शिक्षक डॉ. सत्य नारायण ने कहा कि हानिकारक रसायनों का प्रयोग वातावरण के लिए बेहद घातक है। इसका असर तुरंत नजर नहीं आता मगर दीर्घकालिक होता है। वातावरण के प्रति संजीदा होने और हानिकारक रसायनों के प्रयोग से बचने की जरूरत है। समापन समारोह की अध्यक्षता करते हुए त्रिभुवन यूनिवर्सिटी, नेपाल के प्रो. एमएल शर्मा ने कहा कि पर्यावरण एवं विकास में सामंजस्य बनाने की आवश्यकता है। ग्रीन केमिस्ट्री के विभिन्न पहलू इसमें सहायक सिद्ध हो सकते हैं।
समापन समारोह के पूर्व चार तकनीकी सत्र आयोजित हुए। 24 शोध पत्र प्रस्तुत हुए। कार्यक्रम में उत्कृष्ट शोध पत्र प्रस्तुत करने के लिए प्रथम पुरस्कार अराधना, द्वितीय प्रियंका सिंह और अविनाश पांडेय को तृतीय स्थान हासिल हुआ। पोस्टर प्रजेंटेशन में पहला स्थान शोभना डार्थी फेडरिक, दूसरा स्थान अंजली और तीसरा स्थान मधुलता और हरिकेश को मिला। कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन प्राचार्य डॉ. सतोष मणि त्रिपाठी ने किया। इस अवसर पर डॉ. चंद्रमोहन त्रिपाठी, डॉ. नेत्र लाल भंडारी, प्रो. मोतीलाल शर्मा, डॉ. एमएल शर्मा आदि मौजूद थे।
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