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बाढ़ से 67 करोड़ की संपति का नुकसान
Updated Thu, 21 Sep 2017 01:39 AM IST
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गोरखपुर।
जिले में बाढ़ की विभीषिका अब भले ही खत्म हो गई हो मगर उससे मिले जख्म अभी भी ताजा हैं। तमाम लोग अभी भी बेघर हैं, तो फसल नष्ट हो जाने की वजह से कई के सामने खाने का संकट खड़ा हो गया है। कई घरों में पहले से तय मांगलिक कार्यक्रम टाल दिए गए। करीब पखवारे भर तक रही बाढ़ ने 17 जिंदगी लील ली तो दो अभी भी लापता है। जिला प्रशासन की तरफ से कराए गए प्रारंभिक आंकलन में 67 करोड़ से अधिक की संपत्तियों का नुकसान आंका गया है।
गुरुवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शहर में होंगे। ऐसे में बुधवार को पूरे दिन आपदा विभाग के अफसर और कर्मचारी बाढ़ से हुए नुकसान के आकलन की रिपोर्ट तैयार करने में जुटे रहे। जल्द ही यह रिपोर्ट राज्य सरकार को भेज दी जाएगी और फिर वहां से यह केंद्र सरकार को भेजी जाएगी। केंद्र सरकार की तरफ आपदा मोचन निधि के तहत राज्य सरकार को आर्थिक मदद मुहैया कराने के बाद यहां मुआवजे के वितरण का काम शुरू होने की उम्मीद है। फिलहाल बाढ़ में मरने वालों को प्रशासन चार-चार लाख रुपये की फौरी मदद कर चुका है। बाढ़ का असर पीपीगंज, मानीराम, चौरीचौरा, बांसगांव और बड़हलगंज क्षेत्र के करीब 659 गांव में रहा। इनमें 274 गांव तो चारो तरफ से पानी से घिरे रहे।
51 बंधे, 131 सड़कें र्हुइं क्षतिग्रस्त
जिला प्रशासन की आकलन रिपोर्ट के मुताबिक जिले में करीब 51 स्थानों पर बंधे और 131 सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। इनमें शहर के भीतर से लेकर एनएच और एनएचएआई की सड़के भी शामिल हैं। इसी तरह 122 प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों की इमारतें क्षतिग्रस्त हुई हैं । बाढ़ की वजह से 194 पक्के व 186 कच्चे मकान क्षतिग्रस्त हुए तो 1546 झोपड़ियां भी उजड़ गईं। 12 करोड़ से अधिक रुपये राहत सामग्री पर खर्च हुए । वहीं 20 करोड़ रुपये से अधिक का फसलों का नुकसान आंका गया है।
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मुंबई की कंपनी ने की दो लाख की मदद
बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए फर्टिलाइजर में स्क्रैप हटाने का काम कर रही मुंबई की अंकित इंटरनेशनल कंपनी के निदेशक सुशील अजमेरा ने बुधवार को डीएम राजीव रौतेला को दो लाख रुपये का चेक सौंपा। उन्होंने बताया कि बाढ़ के दौरान कंपनी की तरफ से खाने के आठ हजार पैकेट भी प्रभावित गांवों में वितरित किए गए। डीएम ने कंपनी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यदि कोई संस्था बाढ़ पीड़ितों की मदद करना चाहती है तो वह जन सुनवाई में आकर जानकारी दे सकती है।
जिले में बाढ़ की विभीषिका अब भले ही खत्म हो गई हो मगर उससे मिले जख्म अभी भी ताजा हैं। तमाम लोग अभी भी बेघर हैं, तो फसल नष्ट हो जाने की वजह से कई के सामने खाने का संकट खड़ा हो गया है। कई घरों में पहले से तय मांगलिक कार्यक्रम टाल दिए गए। करीब पखवारे भर तक रही बाढ़ ने 17 जिंदगी लील ली तो दो अभी भी लापता है। जिला प्रशासन की तरफ से कराए गए प्रारंभिक आंकलन में 67 करोड़ से अधिक की संपत्तियों का नुकसान आंका गया है।
गुरुवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शहर में होंगे। ऐसे में बुधवार को पूरे दिन आपदा विभाग के अफसर और कर्मचारी बाढ़ से हुए नुकसान के आकलन की रिपोर्ट तैयार करने में जुटे रहे। जल्द ही यह रिपोर्ट राज्य सरकार को भेज दी जाएगी और फिर वहां से यह केंद्र सरकार को भेजी जाएगी। केंद्र सरकार की तरफ आपदा मोचन निधि के तहत राज्य सरकार को आर्थिक मदद मुहैया कराने के बाद यहां मुआवजे के वितरण का काम शुरू होने की उम्मीद है। फिलहाल बाढ़ में मरने वालों को प्रशासन चार-चार लाख रुपये की फौरी मदद कर चुका है। बाढ़ का असर पीपीगंज, मानीराम, चौरीचौरा, बांसगांव और बड़हलगंज क्षेत्र के करीब 659 गांव में रहा। इनमें 274 गांव तो चारो तरफ से पानी से घिरे रहे।
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51 बंधे, 131 सड़कें र्हुइं क्षतिग्रस्त
जिला प्रशासन की आकलन रिपोर्ट के मुताबिक जिले में करीब 51 स्थानों पर बंधे और 131 सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। इनमें शहर के भीतर से लेकर एनएच और एनएचएआई की सड़के भी शामिल हैं। इसी तरह 122 प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों की इमारतें क्षतिग्रस्त हुई हैं । बाढ़ की वजह से 194 पक्के व 186 कच्चे मकान क्षतिग्रस्त हुए तो 1546 झोपड़ियां भी उजड़ गईं। 12 करोड़ से अधिक रुपये राहत सामग्री पर खर्च हुए । वहीं 20 करोड़ रुपये से अधिक का फसलों का नुकसान आंका गया है।
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मुंबई की कंपनी ने की दो लाख की मदद
बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए फर्टिलाइजर में स्क्रैप हटाने का काम कर रही मुंबई की अंकित इंटरनेशनल कंपनी के निदेशक सुशील अजमेरा ने बुधवार को डीएम राजीव रौतेला को दो लाख रुपये का चेक सौंपा। उन्होंने बताया कि बाढ़ के दौरान कंपनी की तरफ से खाने के आठ हजार पैकेट भी प्रभावित गांवों में वितरित किए गए। डीएम ने कंपनी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यदि कोई संस्था बाढ़ पीड़ितों की मदद करना चाहती है तो वह जन सुनवाई में आकर जानकारी दे सकती है।