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48 मौतों के बाद चेते जिम्मेदार
Updated Sat, 12 Aug 2017 02:03 AM IST
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गोरखपुर।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज प्रशासन की लापरवाही तब टूटी जब 48 जिंदगियां खत्म हो गईं। ऑक्सीजन की कमी के चलते कई मासूम वेंटिलेटर पर पड़े-पड़े मर गए। धड़ाधड़ मौतें शुरू हुईं तो लापरवाही की नींद में सोए जिम्मेदारों की आंख खुली। रात नौ बजे के बाद मेडिकल कॉलेज में जब एक ट्रक ऑक्सीजन सिलेंडर आए तब वहां मौजूद लोग बोल पड़े कि अगर जिम्मेदार थोड़ा पहले जाग जाते तो कई जानें बच जातीं।
मेडिकल कॉलेज में एक बार गुरुवार आधी रात को ऑक्सीजन सूखा तो दो घंटे में सिलेंडर लगाकर सप्लाई शुरू की गई। यह व्यवस्था भी सुबह सात बजे धोखा दे गई। एक बार फिर ऑक्सीजन सप्लाई बंद हो गई। इस बार भी करीब दो घंटे का वक्त लगा। इस बीच मासूम तड़प-तड़प कर दम तोड़ते गए। हो-हल्ला शुरू हुआ तो पहले मेडिकल कॉलेज प्रशासन अपनी लापरवाही छिपाने की भरसक कोशिश करता रहा। जब मामला सुर्खियों में आया तो आननफानन सिलेंडर मंगाने की कवायद में जिम्मेदार जुट गए। नतीजा रहा कि शुक्रवार रात नौ बजे एक ट्रक में भरे ऑक्सीजन सिलेंडर मेडिकल कॉलेज पहुंचे। हालांकि, ये सिलेंडर उनके लिए बेमानी थे जिनके घरों के चिराग ऑक्सीजन के अभाव में बुझ गए थे।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज प्रशासन की लापरवाही तब टूटी जब 48 जिंदगियां खत्म हो गईं। ऑक्सीजन की कमी के चलते कई मासूम वेंटिलेटर पर पड़े-पड़े मर गए। धड़ाधड़ मौतें शुरू हुईं तो लापरवाही की नींद में सोए जिम्मेदारों की आंख खुली। रात नौ बजे के बाद मेडिकल कॉलेज में जब एक ट्रक ऑक्सीजन सिलेंडर आए तब वहां मौजूद लोग बोल पड़े कि अगर जिम्मेदार थोड़ा पहले जाग जाते तो कई जानें बच जातीं।
मेडिकल कॉलेज में एक बार गुरुवार आधी रात को ऑक्सीजन सूखा तो दो घंटे में सिलेंडर लगाकर सप्लाई शुरू की गई। यह व्यवस्था भी सुबह सात बजे धोखा दे गई। एक बार फिर ऑक्सीजन सप्लाई बंद हो गई। इस बार भी करीब दो घंटे का वक्त लगा। इस बीच मासूम तड़प-तड़प कर दम तोड़ते गए। हो-हल्ला शुरू हुआ तो पहले मेडिकल कॉलेज प्रशासन अपनी लापरवाही छिपाने की भरसक कोशिश करता रहा। जब मामला सुर्खियों में आया तो आननफानन सिलेंडर मंगाने की कवायद में जिम्मेदार जुट गए। नतीजा रहा कि शुक्रवार रात नौ बजे एक ट्रक में भरे ऑक्सीजन सिलेंडर मेडिकल कॉलेज पहुंचे। हालांकि, ये सिलेंडर उनके लिए बेमानी थे जिनके घरों के चिराग ऑक्सीजन के अभाव में बुझ गए थे।
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