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घर बैठे करा सकते हैं विवाह पंजीकरण

Thu, 03 Aug 2017 02:02 AM IST
Updated Thu, 03 Aug 2017 02:02 AM IST
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घर बैठे करा सकते हैं विवाह पंजीकरण

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गोरखपुर। विवाह पंजीकरण को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ी है। विशेषकर ऑनलाइन विवाह पंजीकरण की सुविधा शुरू होने के बाद इसमें और इजाफा देखने को मिल रहा है। रजिस्ट्री विभाग के हिंदू विवाह पंजीकरण के आंकड़े इसकी तस्दीक करते हैं। फरवरी 2016 में विवाह पंजीकरण के लिए ऑनलाइन सुविधा शुरू हुई। इसके बाद दिसंबर 2016 तक 1337 जोड़ों ने शादी का पंजीकरण कराया, जबकि इस साल जनवरी से जुलाई तक 996 लोगों ने पंजीकरण कराया। इनमें सर्वाधिक जून महीने में 161 और मई में 157 पंजीकरण हुए।
योगी सरकार के सभी का विवाह पंजीकरण अनिवार्य करने के बाद अब इसमें और बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। इसे लेकर रजिस्ट्री दफ्तर के अफसर, कर्मचारी भी खुद को तैयार कर रहे हैं। उनका मानना है कि अब संपत्ति के बैनामों के साथ ही विभाग पर इस काम का भी बोझ बढ़ेगा। एआईजी स्टांप रामशंकर सिंह के मुताबिक ऑनलाइन आवेदन करने पर रजिस्ट्री दफ्तर आने की जरूरत नहीं पड़ेगी। ऑनलाइन ही सर्टिफिकेट मिल जाएगा। इसके लिए पति-पत्नी दोनों का आधार होना जरूरी है। वहीं अगर सब रजिस्ट्रार के पास ऑनलाइन आवेदन किया जाता है तो आवेदनकर्ता को सिर्फ एक बार संबंधित सब रजिस्ट्रार के पास अपने मूल प्रमाण पत्रों की जांच के लिए आना होगा।
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आवेदन के लिए जरूरी डाक्यूमेंट-
नवीन छायाचित्र 40 केबी से कम साइज का जेपीजी फार्मेट में
पहचान प्रमाण पत्र, आयु प्रमाण पत्र एवं निवास प्रमाण पत्र का पीडीएफ फॉर्मेट
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विवाह पंजीकरण के लाभ
योगी सरकार के नए निर्णय से बाल विवाह पर लगाम लग सकती है। पति या पत्नी के जीवित रहते दूसरी शादी पर भी रोक लगने की उम्मीद है। पति की मौत के बाद पत्नी को उसका हक और क्लेम आसानी से मिल सकेगा। कोई पति, पत्नी का शोषण नहीं कर सकेगा। शादी दोनों पक्षों की रजामंदी से ही होगी।
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मुस्लिमों के मेहरनामा का होता है रजिस्ट्रेशन
एआईजी स्टांप के मुताबिक वर्तमान में सिर्फ हिंदू विवाह का ही पंजीकरण होता है। मुस्लिमों के सिर्फ मेहरनामा का रजिस्ट्रेशन होता है, निकाहनामा का नहीं। प्रदेश सरकार द्वारा सभी धर्मों के लोगों का विवाह पंजीकरण अनिवार्य करने के बाद अब मुस्लिमों के निकाह का भी पंजीकरण होगा। कै बिनेट ने इस संबंध में स्वीकृति दे दी है, जल्द ही नोटिफिकेशन के बाद पंजीकरण शुरू हो जाने की उम्मीद है।
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मुस्लिम महिलाएं बोलीं------
इस्लामिक लॉ के जरिए ही मुस्लिम शादियां मान्य
इस नियम से मुस्लिम समाज को फायदा तभी होगा जब यह शरीयत के दायरे का उल्लघंन नहीं करेगा। इस फैसले से पहले सरकार को सभी पक्षों को बुलाकर बातचीत करनी चाहिए थी। मुस्लिम विवाह तो खुद कानूनी रुप से एक संविदा हैं। मुस्लिम समाज ही इकलौता समाज हैं जो विवाह को संविदा मानता है, बाकी समाज विवाह को संस्कार। रजिस्ट्रेशन न होने का मतलब ये नहीं है कि आपकी शादी अवैध है। मुस्लिम शादियां तो इस्लामिक लॉ के जरिए ही मान्य होंगी।
-गौसिया, मदरसा शिक्षिका
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महिला उत्पीड़न की दूसरी घटनाएं भी रोके सरकार
प्रदेश सरकार का सभी धर्मों के लिए विवाह पंजीकरण अनिवार्य करना स्वागत योग्य व महत्वपूर्ण कदम है। इससे महिलाओं का शोषण कम होगा तथा सुरक्षा की भावना भी प्रबल होगी। लेकिन मुस्लिम महिलाओं के मसायल कुरआन और हदीस की रोशनी में ही हल होने चाहिए। प्रदेश में महिलाओं के उत्पीड़न की रेप, हत्या, छेड़खानी, एसिड अटैक की घटनाएं रोजाना बढ़ती जा रही हैं। सरकार को इस पर भी नियंत्रण लगाना चाहिए।
- फ रहा दीबा, गृहणी
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विवाह पंजीकरण से महिलाओं को संरक्षण मिलेगा
इस नियम से स्त्री वर्ग को संरक्षण मिलेगा। गरीबों की बेटियों को विवाह का लालच देकर उनका शारीरिक व मानसिक शोषण नहीं किया जा सकेगा। रजिस्ट्रेशन होने से कानूनी संरक्षण मिलेगा। इस नियम में कई शादियां करने वालों को भी रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इससे महिलाओं को धोखा देकर कुछ दिनों के बाद छोड़ा नहीं जा सकता। किसी प्रकार का विवाद होने की दशा में वैधानिक उपचार हो सकता हैं। इस नियम से स्त्री-पुरुष के चारित्रिक विकास की संभावना बढ़ेगी।

- फि रोज आरा, शिक्षिका
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मुस्लिम पर्सनल लॉ को नजरअंदाज नहीं कर सकते
इस फैसले से स्त्री-पुरुष ही नहीं परिवार व समाज को भी फ ायदा होगा, लेकिन मुसलमानों के मामलात मुस्लिम पर्सनल लॉ के जरिए ही हल होने चाहिए। जो भी मुस्लिम समाज से सबंधित कानून बने वह इस्लामी लॉ को फॉलो करते हुए उलमा की राय-मशविरा से बनना चाहिए। कोई भी कानून इस्लामी तरीके से हटकर होगा तो मुस्लिम समाज उसे के लिए बाध्य नहीं हैं। यह अधिकार हमें संविधान से मिला हैं।
- शबनम अमीन, सामाजिक कार्यकर्ता
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