फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   गोरखपुर में नानाजी देशमुख का हुआ था वाजपेयी जी से परिचय

गोरखपुर में नानाजी देशमुख का हुआ था वाजपेयी जी से परिचय

Fri, 17 Aug 2018 02:18 AM IST
अमर उजाला/गाोरख्ापुर
अमर उजाला/गाोरख्ापुर Updated Fri, 17 Aug 2018 02:18 AM IST
विज्ञापन
गोरखपुर में नानाजी देशमुख का हुआ था वाजपेयी जी से परिचय
सिंधी कॉलोनी में शामन दास बलानी के घर कॉलोनी व जनसंघ के लोगों के साथ चर्चा करते पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी। - फोटो : amar ujala
राजीव रंजन
विज्ञापन

गोरखपुर। वैसे बड़े भाई की गोरखपुर में शादी के बाद अटल बिहारी वाजपेयी का यहां लगातार आना-जाना था, इस दौरान वह यहां संघ की शाखा में भी शामिल होते थे। दो दिवसीय संघ शाखा के दौरान ही भारतीय जनसंघ के आधार स्तंभ एवं दीनदयाल शोध संस्थान के संस्थापक नानाजी देशमुख की अटल बिहारी वाजपेयी से मुलाकात हुई थी।
नानाजी देशमुख ने ‘हमारे अटल जी’ नामक पुस्तक के ‘इस प्रकार बने पत्रकार से राजनीतिज्ञ’ शीर्षक अध्याय में अटल बिहारी वाजपेयी के साथ गोरखपुर में बिताए दिनों की यादें साझा की हैं। अपने संस्मरण में नानाजी देशमुख ने कहा कि द्वितीय विश्वयुद्ध का दौर चल रहा था।
विज्ञापन


अटल बिहारी वाजपेयी अपनी भाभी को पहुंचाने गोरखपुर आए थे। स्वयंसेवक होने की वजह से वो ‘संघ शाखा’ में भी पहुंचे। शाखा में ही वाजपेयी जी से परिचय हुआ था। उनका अधिकांश समय स्वयंसेवकों के साथ बीतता था। तब तक उन्होंने अनेकों कविताओं की रचना कर ली थी। शाखा के दौरान उन्हें भी कई कविताएं सुनाईं। तब तक कल्पना भी नहीं थी कि अटल बिहारी वाजपेयी राजनेता और प्रधानमंत्री हो सकते हैं, लेकिन उनके बात करने का लहजा, मुद्दों पर समझ से स्पष्ट हो चुका था कि वाजपेयी जी ऐतिहासिक व्यक्ति होने वाले हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


इस अध्याय में नानाजी ने कानपुर में भी वाजपेयी जी से मुलाकात का जिक्र किया है। साथ ही लिखा है कि मन में संघ के लिए काम करने का धुन सवार लिए वाजपेयी जी संघ के प्रचारक बन गए। बाद में राष्ट्रधर्म, पांचजन्य के संपादक बने। सन 1951 में जनसंघ का जन्म हुआ। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का उत्तरप्रदेश में दौरा था। पत्रकार होने के नाते वाजपेयी भी साथ में थे। डॉ. मुखर्जी के पहुंचने में देर होने पर लोगों को बांधे रखने की जिम्मेदारी वाजपेयी जी को दी गई। लोग उनके भाषण से मंत्रमुग्ध हो गए। कश्मीर आंदोलन के दौरान जेल जाने पर डॉ. मुखर्जी ने अपना संदेश देश के लोगों तक पहुंचाने के लिए अटल जी को अपना निजी सचिव बनाया। इस प्रकार वाजपेयी जी पत्रकार से राजनीतिज्ञ बन गए।

गोरखनाथ मंदिर से था पूर्व प्रधानमंत्री का गहरा नाता

गोरखपुर। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी का गोरखनाथ मंदिर और गोरक्ष पीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ से गहरा नाता था। प्रधानमंत्री रहते और उससे पहले भी वह गोरखनाथ मंदिर आए थे।

मंदिर के सचिव द्वारिका तिवारी बताते हैं कि अटल जी 2004 में चुनाव प्रचार के लिए महराजगंज आए थे। गोरखपुर लौटे तो घुटने में दर्द के बावजूद गुरु गोरखनाथ के दर्शन-पूजन और महंत अवेद्यनाथ से मिलने मंदिर आए। मंदिर परिसर में गाड़ी से उतर कर व्हील चेयर के जरिये मंदिर तक गए और फिर गोरक्ष पीठाधीश्वर से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया।

जलपान के दौरान बड़े महराज से रामजन्म भूमि सहित अन्य मुद्दों पर बात की। उस समय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सांसद थे लेकिन शहर में मौजूद नहीं थे। इसके पहले सांसद रहते हुए भी अटल जी गोरखनाथ मंदिर आए थे।

गोरक्ष पीठाधीश्वर और अटल करते थे एक दूसरे का सम्मान

द्वारिका तिवारी बताते हैं कि रामजन्म भूमि आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाने वाले तथा जन्मभूमि यज्ञ समिति के अध्यक्ष ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ और पूर्व प्रधानमंत्री एक दूसरे का काफी सम्मान करते थे।


1989 में जब जनता दल और भाजपा का गठजोड़ हो गया तो गोरखपुर संसदीय सीट जनता दल के खाते में चल गई। संतों ने अवेद्यनाथ से चुनाव लड़ने को कहा तो भाजपा नेताओं ने कहा कि वह लोग मदद नहीं कर पाएंगे। फिर भी अवेद्यनाथ चुनाव लड़े और भारी अंतर से जीत कर संसद में पहुंचे थे। उसके बाद भी उनका संबंध अटल बिहारी वाजपेयी से मधुर ही रहा।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed