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गीडा से हुआ मोह भंग, छोड़ चले प्रदेश
Updated Sat, 30 Sep 2017 01:04 AM IST
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गोरखपुर। गीडा की उद्योग विरोधी नीति से एक और उद्योगपति ने यहां से पलायन की तैयारी कर ली है। करीब 2.50 करोड़ रुपये की लागत से पैकेजिंग फैक्ट्री स्थापित कर रहे राजू गुप्ता अब इसे यहां बंद कर महाराष्ट्र में शुरू करने जा रहे हैं। राजू पांचवें उद्योगपति हैं जो यहां की गलत नीतियों की वजह से अपनी फैक्ट्री दूसरे प्रदेश में स्थापित कर रहे हैं।
इंजीनियरिंग करने के बाद राजू ने सिंगापुर में नौकरी शुरू की। इसके बाद उन्होंने एक सॉफ्टवेयर कंपनी स्थापित की। गोरखपुर के रहने वाले हैं, लिहाजा उन्होंने गीडा में एक फैक्ट्री लगाने की सोची। गीडा की स्कीम के तहत उन्होंने सेक्टर-15 में प्लॉट लिया, मगर इसके बाद उनके सामने परेशानियों का दौर शुरू हो गया। राजू ने बताया, ‘प्लॉट का आवंटन हुआ, लेकिन मूलभूत जरूरतें उपलब्ध नहीं कराई गईं और ब्याज निर्धारित किया जाने लगा। ब्याज माफी के नाम पर सीईओ और कमिश्नर ने भी हाथ खड़े कर लिए हैं। अब फैक्ट्री शुरू करें या हर दर पर मत्था टेकें। बिजली विभाग का रवैया तो इतना खराब है कि उसे बयां कर पाना मुश्किल है। बस इतना कह सकते हैं कि भ्रष्टाचार चरम पर है। इन वजहों से यहां फैक्ट्री बंद कर मुंबई में शुरुआत करने का निर्णय लिया है। वहां हर मामले में विभाग के अधिकारियों का कमिटमेंट रहता है।’
इन उद्योगपतियों ने दूसरे प्रदेशों में लगाई फैक्ट्री
- नारायण जी सरिया ने उत्तराखंड में धागे की फैक्ट्री लगाई
- पीके मसकरा ने गुजरात में धागे की फैक्ट्री लगाई
- पवन बथवाल ने अहमदाबाद में प्लास्टिक बैग बनाने की फैक्ट्री लगाई
- परमेश्वर जी सरिया ने गुजरात में फैक्ट्री लगाई
सात साल में बंद हो गई गीडा की 19 औद्योगिक इकाइयां
काशीनाथ प्लास्टिक, कमानी सिंथेटिक्स, गोरखनाथ पैकेजिंग, गोविंद आइस फैक्ट्री, नायक पॉलीटैक्स पावरलूम, नायक टेक्सटाइल, नंद टेक्सटाइल, नेचुरल मार्बल्स, महाविंध्यवासिनी टेक्सटाइल, लारी टेक्सटाइल, राजा इंडस्ट्रीज, शाही प्लास्टिक, शिव प्लास्टिक, एनटीसी, एबीआर पेट्रो प्रोडक्ट्स, एमपीआई प्लास्टिक, त्रिकोण रबर, तायल फ्यूल्स, डेजल फूड्स
इंजीनियरिंग करने के बाद राजू ने सिंगापुर में नौकरी शुरू की। इसके बाद उन्होंने एक सॉफ्टवेयर कंपनी स्थापित की। गोरखपुर के रहने वाले हैं, लिहाजा उन्होंने गीडा में एक फैक्ट्री लगाने की सोची। गीडा की स्कीम के तहत उन्होंने सेक्टर-15 में प्लॉट लिया, मगर इसके बाद उनके सामने परेशानियों का दौर शुरू हो गया। राजू ने बताया, ‘प्लॉट का आवंटन हुआ, लेकिन मूलभूत जरूरतें उपलब्ध नहीं कराई गईं और ब्याज निर्धारित किया जाने लगा। ब्याज माफी के नाम पर सीईओ और कमिश्नर ने भी हाथ खड़े कर लिए हैं। अब फैक्ट्री शुरू करें या हर दर पर मत्था टेकें। बिजली विभाग का रवैया तो इतना खराब है कि उसे बयां कर पाना मुश्किल है। बस इतना कह सकते हैं कि भ्रष्टाचार चरम पर है। इन वजहों से यहां फैक्ट्री बंद कर मुंबई में शुरुआत करने का निर्णय लिया है। वहां हर मामले में विभाग के अधिकारियों का कमिटमेंट रहता है।’
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इन उद्योगपतियों ने दूसरे प्रदेशों में लगाई फैक्ट्री
- नारायण जी सरिया ने उत्तराखंड में धागे की फैक्ट्री लगाई
- पीके मसकरा ने गुजरात में धागे की फैक्ट्री लगाई
- पवन बथवाल ने अहमदाबाद में प्लास्टिक बैग बनाने की फैक्ट्री लगाई
- परमेश्वर जी सरिया ने गुजरात में फैक्ट्री लगाई
सात साल में बंद हो गई गीडा की 19 औद्योगिक इकाइयां
काशीनाथ प्लास्टिक, कमानी सिंथेटिक्स, गोरखनाथ पैकेजिंग, गोविंद आइस फैक्ट्री, नायक पॉलीटैक्स पावरलूम, नायक टेक्सटाइल, नंद टेक्सटाइल, नेचुरल मार्बल्स, महाविंध्यवासिनी टेक्सटाइल, लारी टेक्सटाइल, राजा इंडस्ट्रीज, शाही प्लास्टिक, शिव प्लास्टिक, एनटीसी, एबीआर पेट्रो प्रोडक्ट्स, एमपीआई प्लास्टिक, त्रिकोण रबर, तायल फ्यूल्स, डेजल फूड्स
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