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बीएसए दफ्तर में कैद किये गए शिक्षा मित्र
Updated Sun, 10 Sep 2017 01:32 AM IST
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गोरखपुर।
दस हजार रुपये मानदेय से असंतुष्ट शिक्षामित्र शनिवार को बीएसए दफ्तर पर धरना देने एकत्र हुए। इस दौरान उन्होंने शहर आए सीएम योगी आदित्यनाथ से मिलने का फैसला किया और मंदिर की ओर जाने लगे। सूचना पर पहुंची पुलिस ने बीएसए दफ्तर में ही उन्हें कैद कर लिया। नेतृत्व कर रहे लोगों ने पांच की संख्या में सीएम से मिलने की अनुमति मांगी लेकिन प्रशासन ने सुरक्षा का हवाला देते हुए शाम पांच बजे तक उन्हें कैद रखा। इस दौरान शिक्षामित्रों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान 11 सितंबर से दिल्ली में होने वाले धरने में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने की अपील करते हुए धरने को समाप्त किया।
शिक्षामित्र संयुक्त मोर्चा के जिलाध्यक्ष गदाधर दुबे और अजय सिंह ने कहा कि 25 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शिक्षामित्र सड़क पर हैं। कैबिनेट ने 11 माह का मानदेय दस हजार प्रति माह पास के हिसाब से भुगतान कर शिक्षामित्रों का दुख बढ़ा दिया हैं। उनके सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा है और केंद्र व प्रदेश ने सरकार चुप्पी साधी है। उन्होंने कहा कि एटा में शिक्षामित्रों के ऊपर दर्ज किया गया फर्जी मुकदमा वापस लिया जाय, नहीं तो इसके गंभीर परिणाम होगा।
उन्होंने कहा कि आज की तारीख में प्रदेश भर के सभी शिक्षामित्र बीए व बीटीसी पास है। कुछ शिक्षामित्रों ने टेट भी पास की है। इसके बाद भी प्रदेश सरकार के कुछ मंत्री और अधिकारी शिक्षामित्रों को शिक्षक के पद पर अयोग्य ठहरा रहे हैं। कहा कि शिक्षामित्रों को 10 हजार मानदेय मान्य नहीं है। प्रदेश सरकार जब तक मांगों को पूरा नहीं करेगी तब तक धरना-प्रदर्शन जारी रहेगा।
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इस दौरान सीमा सिंह, रीता मिश्रा, ऊषा, अमिता सिंह, कालिंदी, सुधा शर्मा, सीमा यादव, आशा मिश्रा, प्रेमशीला, रजनी पासवान, रामनगीना निषाद, अविनाश, मनोज यादव, अमित राय, अतुल राय, संतोष पांडेय, उत्तम राय, बृजेश मौर्य, शैलेंद्र राव, प्रवीण सिंह, अजय सिंह, जयप्रकाश शुक्ला, गौतम पांडेय, विनोद यादव, संदीप सिंह आदि मौजूद रहे।
दस हजार रुपये मानदेय से असंतुष्ट शिक्षामित्र शनिवार को बीएसए दफ्तर पर धरना देने एकत्र हुए। इस दौरान उन्होंने शहर आए सीएम योगी आदित्यनाथ से मिलने का फैसला किया और मंदिर की ओर जाने लगे। सूचना पर पहुंची पुलिस ने बीएसए दफ्तर में ही उन्हें कैद कर लिया। नेतृत्व कर रहे लोगों ने पांच की संख्या में सीएम से मिलने की अनुमति मांगी लेकिन प्रशासन ने सुरक्षा का हवाला देते हुए शाम पांच बजे तक उन्हें कैद रखा। इस दौरान शिक्षामित्रों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान 11 सितंबर से दिल्ली में होने वाले धरने में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने की अपील करते हुए धरने को समाप्त किया।
शिक्षामित्र संयुक्त मोर्चा के जिलाध्यक्ष गदाधर दुबे और अजय सिंह ने कहा कि 25 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शिक्षामित्र सड़क पर हैं। कैबिनेट ने 11 माह का मानदेय दस हजार प्रति माह पास के हिसाब से भुगतान कर शिक्षामित्रों का दुख बढ़ा दिया हैं। उनके सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा है और केंद्र व प्रदेश ने सरकार चुप्पी साधी है। उन्होंने कहा कि एटा में शिक्षामित्रों के ऊपर दर्ज किया गया फर्जी मुकदमा वापस लिया जाय, नहीं तो इसके गंभीर परिणाम होगा।
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उन्होंने कहा कि आज की तारीख में प्रदेश भर के सभी शिक्षामित्र बीए व बीटीसी पास है। कुछ शिक्षामित्रों ने टेट भी पास की है। इसके बाद भी प्रदेश सरकार के कुछ मंत्री और अधिकारी शिक्षामित्रों को शिक्षक के पद पर अयोग्य ठहरा रहे हैं। कहा कि शिक्षामित्रों को 10 हजार मानदेय मान्य नहीं है। प्रदेश सरकार जब तक मांगों को पूरा नहीं करेगी तब तक धरना-प्रदर्शन जारी रहेगा।
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इस दौरान सीमा सिंह, रीता मिश्रा, ऊषा, अमिता सिंह, कालिंदी, सुधा शर्मा, सीमा यादव, आशा मिश्रा, प्रेमशीला, रजनी पासवान, रामनगीना निषाद, अविनाश, मनोज यादव, अमित राय, अतुल राय, संतोष पांडेय, उत्तम राय, बृजेश मौर्य, शैलेंद्र राव, प्रवीण सिंह, अजय सिंह, जयप्रकाश शुक्ला, गौतम पांडेय, विनोद यादव, संदीप सिंह आदि मौजूद रहे।