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ट्रांसफार्मर पर चढ़ा मजदूर, करंट से मौत
sant kabir nagar
Updated Tue, 28 Nov 2017 11:37 PM IST
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मजदूर हीरा की मौत पर रोते बिलखते परिजन ।
- फोटो : अमर उजाला
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धनघटा(संतकबीरनगर)। मुखलिसपुर में स्थित विद्युत उपकेंद्र में लगे ट्रांसफार्मर पर सोमवार रात चढ़ जाने से करंट की चपेट में आए मजदूर की मौत हो गई। मंगलवार सुबह घटना की जानकारी होने पर मौके पर भीड़ जुटी। मजदूर की पहचान प्रजापति के निवासी हीरा चौहान के रूप में हुई। मौके पर पहुंचे घर वालों ने मृतक की मानसिक ठीक न होने की जानकारी दी। घटना के बाद से ही क्षेत्र के करीब 125 गांवों की विद्युत आपूर्ति 12 घंटे ठप रही।
धनघटा क्षेत्र के प्रजापतिपुर की रहने वाली किसमती ने बताया कि उसके पति हीरा चौहान (45)पुत्र स्वर्गीय कोमल पिछले एक सप्ताह से मानसिक रूप से बीमार चल रहे थे। उनका इलाज शुरू कराया गया था। सोमवार की रात सोने से पहले पति हीरा के पैंट की बेल्ट से अपने साड़ी के पल्लू को बांध दिया था। जिससे परिजनों के नींद में होने पर वह घर से कहीं बाहर न जा सके। रात में किसी समय हीरा अपनी पत्नी का पल्लू छुड़ाकर घर से निकल गए और मुखलिसपुर विद्युत उपकेंद्र पर पहुंच गए। जहां दस एमबीए के नाथनगर-महुली आउटगोइंग ट्रांसफार्मर पर चढ़ गए और करंट की चपेट में आने से पति की मौत हो गई। विभाग के कर्मियों ने जैसे ही महुली-नाथनगर क्षेत्र की आपूर्ति चालू किया उसी समय तेज आवाज के साथ ही आपूर्ति ट्रिप होने लगी। जब एसएसओ ने बाहर निकले तो घटना की जानकारी हुई। एसएसओ ने घटना की सूचना अधिकारियों को दिया तो आपूर्ति ठप करा दी गई। इधर रात में जब हीरा के परिजनों ने हीरा को बिस्तर से गायब देखा तो आस-पास उसकी तलाश शुरू कर दी। घटना की सूचना पर घर वाले मौके पर मंगलवार की सुबह पहुंच गए। इंस्पेक्टर एसपी गौतम ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
टूटी बांउड्रीवाल की वजह से असुरक्षित है उपकेंद्र
धनघटा। विद्युत उपकेंद्र मुखलिसपुर में बाउंड्रीवाल टूट जाने की वजह से परिसर में अक्सर जानवर भी अक्सर प्रवेश कर जाते है। इसी कारण सोमवार रात भी हादसा हुआ। जेई एसडी प्रताप ने बताया कि उच्चाधिकारियों को कई बार पत्र लिखकर यहां के हालात की जानकारी दी, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नही की गई। सोमवार की रात हुई घटना की जानकारी भी अधिकारियों को दी गई है। विद्युत आपूर्ति बहाल होते ही तेज आवाज के साथ जब बिजली ट्रिप हुई तब कर्मचारियों को भी घटना की जानकारी हो पाई। फ्यूज उड़ने के कारण कोई बडी घटना नही हुई, लेकिन क्षेत्र के लगभग सौ से अधिक गांवो की विद्युत आपूर्ति 12 घंटे तक ठप रही।
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आंचल की गांठ भी नहीं रोक सकी मौत के कदम
धनघटा(खगेन्द्र प्रसाद मिश्र)। शायद पत्नी किसमति को हीरा की मौत की आहत पहले ही सुनाई दे गई थी। तभी तो वह अपनी साड़ी के आंचल से पति की बेल्ट को बांधकर सोई थी। पर, होनी को कौन टाल सकता है। पति गांठ खोलकर चल दिया और उसे आहत भी नहीं मिली। बीमारी से जूझ रहे पति हीरा को मौत ट्रांसफार्मर की ओर खींच ले गई। हीरा चौहान को दो महीने पहले बुखार और सिर दर्द की दिक्कत शुरू हुई। गरीबी के हाल में भी घरवालों ने सीएचसी नाथनगर से गोरखपुर तक उपचार कराया। बुखार और सिर दर्द तो ठीक हुआ, लेकिन मानसिक स्थिति बिगड़ गई। परिवार में पत्नी किसमती के अलावा बेटा दुर्गेश(24), बलवंत(16) और बेटी सरोजा(11) हैं। पिता की मानसिक बीमारी के चलते बच्चे उन्हें अकेले घर से नहीं निकलने देते थे। परिजनों की आंख क्या लगी मानों जिंदगी में ही अंधेरा छा गया। पत्नी और बेटी को बिलखता देख मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं थीं। मजदूरी करके परिवार का भरण पोषण करने वाले हीरा का बड़ा बेटा दुर्गेश भी पिता के साथ ही मजदूरी करता था। छोटा बेटा बलवंत पिता की बीमारी के चलते कम उम्र में ही दिल्ली में रोजगार के लिए चला गया। अब पिता की मौत के बाद दोनों बेटों के कंधों पर ही परिवार की जिम्मेदारी का बोझ उठाने का जिम्मा आ गया है। खेती के नाम पर मात्र छह बिसवा जमीन है।
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धनघटा क्षेत्र के प्रजापतिपुर की रहने वाली किसमती ने बताया कि उसके पति हीरा चौहान (45)पुत्र स्वर्गीय कोमल पिछले एक सप्ताह से मानसिक रूप से बीमार चल रहे थे। उनका इलाज शुरू कराया गया था। सोमवार की रात सोने से पहले पति हीरा के पैंट की बेल्ट से अपने साड़ी के पल्लू को बांध दिया था। जिससे परिजनों के नींद में होने पर वह घर से कहीं बाहर न जा सके। रात में किसी समय हीरा अपनी पत्नी का पल्लू छुड़ाकर घर से निकल गए और मुखलिसपुर विद्युत उपकेंद्र पर पहुंच गए। जहां दस एमबीए के नाथनगर-महुली आउटगोइंग ट्रांसफार्मर पर चढ़ गए और करंट की चपेट में आने से पति की मौत हो गई। विभाग के कर्मियों ने जैसे ही महुली-नाथनगर क्षेत्र की आपूर्ति चालू किया उसी समय तेज आवाज के साथ ही आपूर्ति ट्रिप होने लगी। जब एसएसओ ने बाहर निकले तो घटना की जानकारी हुई। एसएसओ ने घटना की सूचना अधिकारियों को दिया तो आपूर्ति ठप करा दी गई। इधर रात में जब हीरा के परिजनों ने हीरा को बिस्तर से गायब देखा तो आस-पास उसकी तलाश शुरू कर दी। घटना की सूचना पर घर वाले मौके पर मंगलवार की सुबह पहुंच गए। इंस्पेक्टर एसपी गौतम ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
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टूटी बांउड्रीवाल की वजह से असुरक्षित है उपकेंद्र
धनघटा। विद्युत उपकेंद्र मुखलिसपुर में बाउंड्रीवाल टूट जाने की वजह से परिसर में अक्सर जानवर भी अक्सर प्रवेश कर जाते है। इसी कारण सोमवार रात भी हादसा हुआ। जेई एसडी प्रताप ने बताया कि उच्चाधिकारियों को कई बार पत्र लिखकर यहां के हालात की जानकारी दी, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नही की गई। सोमवार की रात हुई घटना की जानकारी भी अधिकारियों को दी गई है। विद्युत आपूर्ति बहाल होते ही तेज आवाज के साथ जब बिजली ट्रिप हुई तब कर्मचारियों को भी घटना की जानकारी हो पाई। फ्यूज उड़ने के कारण कोई बडी घटना नही हुई, लेकिन क्षेत्र के लगभग सौ से अधिक गांवो की विद्युत आपूर्ति 12 घंटे तक ठप रही।
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आंचल की गांठ भी नहीं रोक सकी मौत के कदम
धनघटा(खगेन्द्र प्रसाद मिश्र)। शायद पत्नी किसमति को हीरा की मौत की आहत पहले ही सुनाई दे गई थी। तभी तो वह अपनी साड़ी के आंचल से पति की बेल्ट को बांधकर सोई थी। पर, होनी को कौन टाल सकता है। पति गांठ खोलकर चल दिया और उसे आहत भी नहीं मिली। बीमारी से जूझ रहे पति हीरा को मौत ट्रांसफार्मर की ओर खींच ले गई। हीरा चौहान को दो महीने पहले बुखार और सिर दर्द की दिक्कत शुरू हुई। गरीबी के हाल में भी घरवालों ने सीएचसी नाथनगर से गोरखपुर तक उपचार कराया। बुखार और सिर दर्द तो ठीक हुआ, लेकिन मानसिक स्थिति बिगड़ गई। परिवार में पत्नी किसमती के अलावा बेटा दुर्गेश(24), बलवंत(16) और बेटी सरोजा(11) हैं। पिता की मानसिक बीमारी के चलते बच्चे उन्हें अकेले घर से नहीं निकलने देते थे। परिजनों की आंख क्या लगी मानों जिंदगी में ही अंधेरा छा गया। पत्नी और बेटी को बिलखता देख मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं थीं। मजदूरी करके परिवार का भरण पोषण करने वाले हीरा का बड़ा बेटा दुर्गेश भी पिता के साथ ही मजदूरी करता था। छोटा बेटा बलवंत पिता की बीमारी के चलते कम उम्र में ही दिल्ली में रोजगार के लिए चला गया। अब पिता की मौत के बाद दोनों बेटों के कंधों पर ही परिवार की जिम्मेदारी का बोझ उठाने का जिम्मा आ गया है। खेती के नाम पर मात्र छह बिसवा जमीन है।