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जलस्तर के साथ बढ़ रहीं धड़कनें
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Tue, 22 Aug 2017 01:21 AM IST
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बाढ़ में डूबा गांव।
- फोटो : Amar Ujala
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राप्ती के रौद्ररूप ने गोरखपुरियों से एक नया रिश्ता बना लिया है। पिछले कई दिनों से ये शहर राप्ती के जलस्तर के हिसाब से धड़कता है। रोजाना बढ़ते जलस्तर के साथ शहरवासियों की धड़कनें भी बढ़ रही हैं। राजघाट पुल के साथ नौसड़ से गुजरने वाले बोक्टा-बरवार बांध पर हर रोज केवल इसलिए पहुंचते हैं ताकि वे नदी के तेवर को समझ पाएं। 1998 में गोरखपुर में बाढ़ के गवाह बने लोग अपने अनुभवों के आधार पर नदी के पानी के स्तर को तौलते हैं, चर्चा करते हैं। बिछिया की सीमा ने बताती हैं कि 19 साल पहले उस बाढ़ ने उनके दोस्त के परिवार में तूफान मचा दिया था। परिवार के कई लोग बाढ़ के प्रकोप के शिकार हुए थे। राप्ती के बढ़ते जलस्तर ने उनकी उनके उस दुख को कुरेद दिया है। क्या पता इस बार भी ये क्या रंग दिखाएगी। किसकी जिंदगी में तूफान मचाएगी। सीमा हर दिन इस उम्मीद में यहां पहुंचती हैं कि आज शायद पानी कम हो गया होगा, मगर हर रोज एक उदासी उनके साथ लौटती है।
सीमा की तरह ही शहर के कई लोगों के दिलों पर राप्ती के उस रौद्ररूप की कहानियां दर्ज हैं। पिछले कुछ सालों में वे दर्द को भूल गए थे,् क्योंकि राप्ती ने संयम रखा था। लेकिन इस बार तो लगता है कि उसने गोरखपुरियों की धड़कने बढ़ाने की ठान ली है। रुस्तमपुर के पंकज बताते हैं, 1998 के बाढ़ ने शहर में जीना मुहाल कर दिया था। कई दिनों तक बुद्ध नगर, आजाद चौक, चिलमापुर, महुई सुघरपुर, फुलवरिया, रानी बाग और महेवा सहित अन्य क्षेत्रों में लोगों को खाने-पीने तक की दिक्कतें हो गई थीं। अगर ऐसे ही जलस्तर बढ़ता रहा तो शहर के रुस्तमपुर, बुद्ध विहार और तारामंडल सहित कई इलाकों में भी पानी भर जाएगा। अब ज्यादा तबाही हो सकती है क्योंकि आज इन इलाकों में आबादी 1998 के मुकाबले कई गुना है। इसकी जद में आ जाएगा। बाघागाड़ा निवासी हरिश्चंद्र त्रिपाठी ने बताया बाढ़ ने दिन का चैन और रात का सुकून छीन लिया है। घर किसके भरोसे छोड़ कर जाएं, समझ नहीं आ रहा है। पिछली बाढ़ ने पूरा मकान जद में ले लिया था। हालात दोबारा वैसे ही बन रहे हैं।
सेल्फी को लेकर बहस
राप्ती पुल के पास सोमवार दोपहर एक बजे के करीब चार युवा सैर सपाटे की नीयत से हार्वर्ट बंधे पर पहुंचे और सेल्फी लेने में मशगूल हो गए। पोज बदल-बदल कर फोटो खींचते देख बंधे पर ठहरेे बाढ़ की त्रासदी झेल रहे 70 साल के भोलानाथ उन्हें रोकने पहुंचे तो युवा बहस करने लगे। इस दौरान आसपास के और लोग भी वहां जुट गए। मामला बढ़ता देख चारों युवा वहां से निकल गए।
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सीमा की तरह ही शहर के कई लोगों के दिलों पर राप्ती के उस रौद्ररूप की कहानियां दर्ज हैं। पिछले कुछ सालों में वे दर्द को भूल गए थे,् क्योंकि राप्ती ने संयम रखा था। लेकिन इस बार तो लगता है कि उसने गोरखपुरियों की धड़कने बढ़ाने की ठान ली है। रुस्तमपुर के पंकज बताते हैं, 1998 के बाढ़ ने शहर में जीना मुहाल कर दिया था। कई दिनों तक बुद्ध नगर, आजाद चौक, चिलमापुर, महुई सुघरपुर, फुलवरिया, रानी बाग और महेवा सहित अन्य क्षेत्रों में लोगों को खाने-पीने तक की दिक्कतें हो गई थीं। अगर ऐसे ही जलस्तर बढ़ता रहा तो शहर के रुस्तमपुर, बुद्ध विहार और तारामंडल सहित कई इलाकों में भी पानी भर जाएगा। अब ज्यादा तबाही हो सकती है क्योंकि आज इन इलाकों में आबादी 1998 के मुकाबले कई गुना है। इसकी जद में आ जाएगा। बाघागाड़ा निवासी हरिश्चंद्र त्रिपाठी ने बताया बाढ़ ने दिन का चैन और रात का सुकून छीन लिया है। घर किसके भरोसे छोड़ कर जाएं, समझ नहीं आ रहा है। पिछली बाढ़ ने पूरा मकान जद में ले लिया था। हालात दोबारा वैसे ही बन रहे हैं।
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सेल्फी को लेकर बहस
राप्ती पुल के पास सोमवार दोपहर एक बजे के करीब चार युवा सैर सपाटे की नीयत से हार्वर्ट बंधे पर पहुंचे और सेल्फी लेने में मशगूल हो गए। पोज बदल-बदल कर फोटो खींचते देख बंधे पर ठहरेे बाढ़ की त्रासदी झेल रहे 70 साल के भोलानाथ उन्हें रोकने पहुंचे तो युवा बहस करने लगे। इस दौरान आसपास के और लोग भी वहां जुट गए। मामला बढ़ता देख चारों युवा वहां से निकल गए।
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