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मानसून की आहट पर जागे मंत्री-अफसर
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Fri, 23 Jun 2017 01:26 AM IST
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सिंचाई मंत्री ने बांधों का निरीक्षण किया।
- फोटो : Amar Ujala
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अब जबकि मानसून दस्तक दे चुका है तो जनप्रतिनिधियों और अफसरों को बंधों की फिक्र सताने लगी है। खामी मिलने पर बाढ़ के पहले बंधों को दुरुस्त कर लेने की सोच से ही अप्रैल, मई में ही बंधों की जांच करने का प्रावधान है, मगर जिम्मेदारों को यह जरूरत अब महसूस हुई है। शायद यही वजह है कि सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह गुरुवार सुबह अफसरों के साथ बंधों का निरीक्षण करने पहुंचे तो वहीं डीएम राजीव रौतेला दोपहर में। किसी ने नाव, स्टीमर की व्यवस्था कर लेने का निर्देश दिया तो किसी ने यह भरोसा दिलाया कि बंधों की मरम्मत और बाढ़ आने की दशा में लोगों को परेशानी से बचाने के लिए जो भी काम कराने हैं, उसमें बजट बाधा नहीं बनेगा।
यही नहीं सिंचाई विभाग के अफसरों ने भी मंत्री और डीएम को बंधों का वहीं हिस्सा दिखाया, जिसकी हालत ठीक थी। कैंपियरगंज में डीएम के साथ ऐसा ही हुआ। मातहत जब उन्हें बरगला कर वापस ले जा रहे थे तो क्षेत्र के लोगों ने शिकायत की कि गेरूई रेग्यूलेटर पर पानी का रिसाव रोकने के लिए जो प्रयास किए गए हैं वे नाकाफी हैं। डीएम ग्रामीणों की मोटरसाइकिल पर बैठ कर वहां पहुंचे और अफसरों को जल्द सभी खामियां दुरुस्त करने के निर्देश दिए। बंधों के किनारे पड़ी मिट्टी तो बिना नदी में पानी आए ही धंसती दिखाई पड़ी।
प्रदेश के सिंचाई मंत्री व जनपद के प्रभारी मंत्री ने फ्लड जोन में कई मकान दिखने पर ऐसे सभी लोगों को नोटिस देकर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। वह पहले हार्वर्ट बंधे पर पहुंचे और सिंचाई विभाग के कार्यों को देखने के साथ ही पंप स्टेशनों से पानी की निकासी के बारे में जानकारी ली। इसके बाद बोक्टा बरवार बंधे पर कटान से बचाने के लिए किए गए कामों को देखा। इसी तरह उन्होंने रामगढ़ पूर्वी कैनाल, तरकुलानी के पास प्रस्तावित नए रेग्यूलेटर स्थल का निरीक्षण किया। अफसरों ने बताया कि बरसात में गोर्रा और राप्ती नदी का जलस्तर बढ़ने पर फ सलों को भारी क्षति पहुंचती है। इससे 42 गांव प्रभावित होते हैं। 38.15 करोड़ की लागत से प्रस्तावित इस रेग्यूलेटर के बनने पर 2800 हेक्टेयर की फसल की सुरक्षा के साथ ही 32 हजार लोगों को फ ायदा मिलेगा। इसमें 10 पंप होंगे जो 300 क्यूसेक पानी को दूसरी तरफ प्रवाहित करेगा।
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मंत्री के साथ निरीक्षण के दौरान ग्रामीण विधायक विपिन सिंह समेत सिंचाई विभाग के कई अफसर मौजूद रहे। उधर डीएम ने बड़ा महुआसर गंाव में बने बंधे, करमैनी रिगौली बांध आदि का निरीक्षण किया।
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यही नहीं सिंचाई विभाग के अफसरों ने भी मंत्री और डीएम को बंधों का वहीं हिस्सा दिखाया, जिसकी हालत ठीक थी। कैंपियरगंज में डीएम के साथ ऐसा ही हुआ। मातहत जब उन्हें बरगला कर वापस ले जा रहे थे तो क्षेत्र के लोगों ने शिकायत की कि गेरूई रेग्यूलेटर पर पानी का रिसाव रोकने के लिए जो प्रयास किए गए हैं वे नाकाफी हैं। डीएम ग्रामीणों की मोटरसाइकिल पर बैठ कर वहां पहुंचे और अफसरों को जल्द सभी खामियां दुरुस्त करने के निर्देश दिए। बंधों के किनारे पड़ी मिट्टी तो बिना नदी में पानी आए ही धंसती दिखाई पड़ी।
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प्रदेश के सिंचाई मंत्री व जनपद के प्रभारी मंत्री ने फ्लड जोन में कई मकान दिखने पर ऐसे सभी लोगों को नोटिस देकर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। वह पहले हार्वर्ट बंधे पर पहुंचे और सिंचाई विभाग के कार्यों को देखने के साथ ही पंप स्टेशनों से पानी की निकासी के बारे में जानकारी ली। इसके बाद बोक्टा बरवार बंधे पर कटान से बचाने के लिए किए गए कामों को देखा। इसी तरह उन्होंने रामगढ़ पूर्वी कैनाल, तरकुलानी के पास प्रस्तावित नए रेग्यूलेटर स्थल का निरीक्षण किया। अफसरों ने बताया कि बरसात में गोर्रा और राप्ती नदी का जलस्तर बढ़ने पर फ सलों को भारी क्षति पहुंचती है। इससे 42 गांव प्रभावित होते हैं। 38.15 करोड़ की लागत से प्रस्तावित इस रेग्यूलेटर के बनने पर 2800 हेक्टेयर की फसल की सुरक्षा के साथ ही 32 हजार लोगों को फ ायदा मिलेगा। इसमें 10 पंप होंगे जो 300 क्यूसेक पानी को दूसरी तरफ प्रवाहित करेगा।
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मंत्री के साथ निरीक्षण के दौरान ग्रामीण विधायक विपिन सिंह समेत सिंचाई विभाग के कई अफसर मौजूद रहे। उधर डीएम ने बड़ा महुआसर गंाव में बने बंधे, करमैनी रिगौली बांध आदि का निरीक्षण किया।