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जिम्मेदार माता-पिता का सरकार करेगी सम्मान
Updated Tue, 31 Jul 2018 01:24 AM IST
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जिम्मेदार माता-पिता का सरकार करेगी सम्मान
सही उम्र पर शादी और उचित समय पर बच्चे पैदा करने वालों को मिलेगा नकद पुरस्कार
गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वालों को मिलेगा योजना का लाभ
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। सरकार जिम्मेदार माता-पिताआें का सम्मान करके दूसरों के लिए नजीर के तौर पर पेश करेगी। इसके लिए रिस्पांसबल पैरेंटहुड स्ट्रेटजी योजना लांच की गई है। सीएमओ कार्यालय को इस संबंध में शासनादेश मिल चुका है। अब स्वास्थ्य विभाग सर्वे कराकर लाभार्थियों की सूची तैयार करेगी। इस योजना का लाभ उन्हें मिलेगा जो गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन कर रहे हैं।
सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी ने बताया कि ऐसे लोगों को नकद पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने 19 साल या इससे ज्यादा उम्र की युवती से शादी की और इसके दो वर्ष बाद पहला बच्चा पैदा किया, साथ ही दूसरी संतान में तीन वर्ष का अंतर रखा। यह योजना 2011 से लांच मानी जाएगी। मतलब, 2011 में शादी करने वाले दंपती इसमें शामिल किए जाएंगे। शासनादेश के मुताबिक शादी के दो वर्ष बाद बेटा पैदा होने पर 10 हजार और बेटी होने पर 12 हजार रुपये दिए जाएंगे। इसके तीन साल बाद दूसरी संतान होने पर भी सरकार जिम्मेदार अभिभावकों को सम्मानित करेगी। दूसरी संतान अगर बेटा है तो पांच और बेटी है तो सात हजार रुपये दिए जाएंगे।
जच्चा-बच्चा मृत्युदर काबू करने की कवायद
इस योजना के पीछे सरकार की मंशा जच्चा-बच्चा मृत्युदर पर काबू पाने के साथ ही स्वस्थ समाज के निर्माण की है। महिला अस्पताल की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. सुषमा सिन्हा के मुताबिक कम उम्र में गर्भधारण करने पर मां और बच्चे की जिंदगी भी खतरे में होती है। बच्चों के बीच उचित अंतर न होने पर स्त्री को खून की कमी समेत कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं। प्रीमेच्योर डिलेवरी भी हो सकती है। सरकार की यह योजना जनसंख्या नियंत्रण में भी सहायक होगी।
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खतरे में होती हैं 10 फीसदी गर्भवती
चिकित्सकों के मुताबिक 10 फीसदी गर्भवती प्रीमेच्योर डिलेवरी (समय पूर्व प्रसव) के खतरे में होती हैं। प्रीमेच्योर डिलेवरी में कई बार बच्चा मरा पैदा होता है या पैदा होने के बाद उसकी जान चली जाती है। जच्चा भी कई बार जान से हाथ धो देती है। चिकित्सक प्रीमेच्योर डिलेवरी का प्रमुख कारण कम उम्र में गर्भधारण, एनीमिया, दो बच्चों के बीच सही अंतर न होने आदि को मानते हैं। सरकार इस योजना के जरिए प्रीमेच्योर डिलेवरी के खतरे को कम करके स्वस्थ और सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देना चाह रही है।
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सही उम्र पर शादी और उचित समय पर बच्चे पैदा करने वालों को मिलेगा नकद पुरस्कार
गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वालों को मिलेगा योजना का लाभ
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। सरकार जिम्मेदार माता-पिताआें का सम्मान करके दूसरों के लिए नजीर के तौर पर पेश करेगी। इसके लिए रिस्पांसबल पैरेंटहुड स्ट्रेटजी योजना लांच की गई है। सीएमओ कार्यालय को इस संबंध में शासनादेश मिल चुका है। अब स्वास्थ्य विभाग सर्वे कराकर लाभार्थियों की सूची तैयार करेगी। इस योजना का लाभ उन्हें मिलेगा जो गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन कर रहे हैं।
सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी ने बताया कि ऐसे लोगों को नकद पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने 19 साल या इससे ज्यादा उम्र की युवती से शादी की और इसके दो वर्ष बाद पहला बच्चा पैदा किया, साथ ही दूसरी संतान में तीन वर्ष का अंतर रखा। यह योजना 2011 से लांच मानी जाएगी। मतलब, 2011 में शादी करने वाले दंपती इसमें शामिल किए जाएंगे। शासनादेश के मुताबिक शादी के दो वर्ष बाद बेटा पैदा होने पर 10 हजार और बेटी होने पर 12 हजार रुपये दिए जाएंगे। इसके तीन साल बाद दूसरी संतान होने पर भी सरकार जिम्मेदार अभिभावकों को सम्मानित करेगी। दूसरी संतान अगर बेटा है तो पांच और बेटी है तो सात हजार रुपये दिए जाएंगे।
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जच्चा-बच्चा मृत्युदर काबू करने की कवायद
इस योजना के पीछे सरकार की मंशा जच्चा-बच्चा मृत्युदर पर काबू पाने के साथ ही स्वस्थ समाज के निर्माण की है। महिला अस्पताल की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. सुषमा सिन्हा के मुताबिक कम उम्र में गर्भधारण करने पर मां और बच्चे की जिंदगी भी खतरे में होती है। बच्चों के बीच उचित अंतर न होने पर स्त्री को खून की कमी समेत कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं। प्रीमेच्योर डिलेवरी भी हो सकती है। सरकार की यह योजना जनसंख्या नियंत्रण में भी सहायक होगी।
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खतरे में होती हैं 10 फीसदी गर्भवती
चिकित्सकों के मुताबिक 10 फीसदी गर्भवती प्रीमेच्योर डिलेवरी (समय पूर्व प्रसव) के खतरे में होती हैं। प्रीमेच्योर डिलेवरी में कई बार बच्चा मरा पैदा होता है या पैदा होने के बाद उसकी जान चली जाती है। जच्चा भी कई बार जान से हाथ धो देती है। चिकित्सक प्रीमेच्योर डिलेवरी का प्रमुख कारण कम उम्र में गर्भधारण, एनीमिया, दो बच्चों के बीच सही अंतर न होने आदि को मानते हैं। सरकार इस योजना के जरिए प्रीमेच्योर डिलेवरी के खतरे को कम करके स्वस्थ और सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देना चाह रही है।