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मनरेगा से खोदे गए पोखरों में मछली पालन को मिलेगा बढ़ावा
Updated Tue, 04 Jul 2017 11:15 PM IST
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संतकबीरनगर। मनरेगा और लघु सिंचाई विभाग के बजट से खुदवाए गए पोखरों में मत्स्य पालन को बढ़ावा दिया जाएगा। जबकि निजी जलजमाव वाली जमीन में भी मत्स्य बीज उत्पादन करने पर अनुदान मिलेगा। विभाग की ओर से इसके लिए मत्स्य पालकों को प्रेरित किए जाने का निर्देश दिया गया है। वहीं तामेश्वरनाथ राजकीय मछली पालन केेंद्र से 15 जुलाई से बीज की बिक्री शुरू कर दी जाएगी।
मुख्य कार्यपालक अधिकारी वीपी सिंह ने बताया कि मनरेगा और लघु सिंचाई विभाग के बजट से खुदवाए गए पोखरों में मत्स्य पालन को बढ़ावा दिए जाने पर शासन को जोर है। प्रति हेक्टेयर पोखरे पर डेढ़ लाख की कार्ययोजना बनेगी। जिसमें 75 प्रतिशत धनराशि मत्स्य पालक को अनुदान में दी जाएगी। यदि कोई व्यक्ति अपने निचली सतह वाली जमीन में मत्स्य बीज का उत्पादन करना चाहे तो उसके लिए प्रति हेक्टेयर छह लाख का प्रपोजल होगा और उसमें भी 75 प्रतिशत धनराशि अनुदान में दिया जाएगा।
जल प्लावित क्षेत्रों में विविधिकरण योजना के तहत ऐसी जमीन जो कृषि योग्य नहीं है और उसमें कोई तालाब ,पोखरे का निर्माण करना चाहे तो उसे भी 75 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। योजना के तहत पांच हेक्टेयर का लक्ष्य मिला है। प्रति हेक्टेयर सवा लाख रुपये तालाब की खुदाई पर और डेढ़ लाख रुपये उत्पादन निवेश पर मिलेगा। खुदाई पर 75 प्रतिशत और उत्पादन पर 80 प्रतिशत धनराशि अनुदान में दी जाएगी। जनपद के तामेश्वरनाथ राजकीय मत्स्य परिक्षेत्र में मछली बीज का उत्पादन कराया गया है। 17 लाख मत्स्य बीज का लक्ष्य निर्धारित है। रोहू, भांकुर, नैन, ग्रास कार्प के बीच तैयार हो चुके है। 100 रुपये में 1000 मछली बीज दिया जाएगा। 15 जुलाई से मत्स्य बीज की बिक्री शुरू हो जाएगी। इसके लिए 30 जुलाई तक मत्स्य पालक रकम जमा कर सकते हैं।
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मुख्य कार्यपालक अधिकारी वीपी सिंह ने बताया कि मनरेगा और लघु सिंचाई विभाग के बजट से खुदवाए गए पोखरों में मत्स्य पालन को बढ़ावा दिए जाने पर शासन को जोर है। प्रति हेक्टेयर पोखरे पर डेढ़ लाख की कार्ययोजना बनेगी। जिसमें 75 प्रतिशत धनराशि मत्स्य पालक को अनुदान में दी जाएगी। यदि कोई व्यक्ति अपने निचली सतह वाली जमीन में मत्स्य बीज का उत्पादन करना चाहे तो उसके लिए प्रति हेक्टेयर छह लाख का प्रपोजल होगा और उसमें भी 75 प्रतिशत धनराशि अनुदान में दिया जाएगा।
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जल प्लावित क्षेत्रों में विविधिकरण योजना के तहत ऐसी जमीन जो कृषि योग्य नहीं है और उसमें कोई तालाब ,पोखरे का निर्माण करना चाहे तो उसे भी 75 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। योजना के तहत पांच हेक्टेयर का लक्ष्य मिला है। प्रति हेक्टेयर सवा लाख रुपये तालाब की खुदाई पर और डेढ़ लाख रुपये उत्पादन निवेश पर मिलेगा। खुदाई पर 75 प्रतिशत और उत्पादन पर 80 प्रतिशत धनराशि अनुदान में दी जाएगी। जनपद के तामेश्वरनाथ राजकीय मत्स्य परिक्षेत्र में मछली बीज का उत्पादन कराया गया है। 17 लाख मत्स्य बीज का लक्ष्य निर्धारित है। रोहू, भांकुर, नैन, ग्रास कार्प के बीच तैयार हो चुके है। 100 रुपये में 1000 मछली बीज दिया जाएगा। 15 जुलाई से मत्स्य बीज की बिक्री शुरू हो जाएगी। इसके लिए 30 जुलाई तक मत्स्य पालक रकम जमा कर सकते हैं।
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