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मेडिकल कालेज को आठ वार्मर और मिले
Updated Sat, 02 Sep 2017 02:19 AM IST
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गोरखपुर।
आक्सीजन की कमी के बीच हुई मौतों से सबक लेते हुए शासन, प्रशासन मेडिकल कॉलेज के नियो नेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (एनआईसीयू) की खामियां दुरुस्त करने के साथ ही वहां नई सुविधाएं बढ़ाने में जुट गया है। यहां पर वार्मर (नवजात के शरीर का तापमान नियंत्रित करने वाला उपकरण) की कमी को देखते हुए शासन ने लखनऊ से 15 वार्मर भेजा है, वहीं डीएम ने जिला महिला अस्पताल से आठ वार्मर मुहैया कराया है।
महिला अस्पताल के निरीक्षण के दौरान डीएम ने पाया कि वहां पर 12 वार्मर हैं, मगर स्टाफ कम होने की वजह से सभी का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा था। डीएम का कहना है कि स्टाफ की तैनाती के बाद मेडिकल कॉलेज से सभी आठ वार्मर वापस मंगा लिए जाएंगे। कहा कि चिकित्सीय सुविधाओं के लिए शासन ने संसाधनों को बढ़ाया है।
महिला अस्पताल की व्यवस्था जांची
डीएम राजीव रौतेला ने शुक्रवार को जिला महिला अस्पताल में स्थापित एसएनसीयू (सिक न्यू बार्न केयर यूनिट) आदि वार्ड का निरीक्षण किया। इस दौरान पाया कि वहां 100 बेड के निर्माणाधीन महिला प्रसूति अस्पताल का काम 15 सितंबर तक पूरा हो जाना था मगर अभी काफी काम बाकी है। डीएम ने इसको लेकर कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम को तलब कर स्पष्टीकरण मांगने के निर्देश दिए। कहा कि जल्द ही अगर अस्पताल का निर्माण पूरा नहीं होता है, तो कार्यदायी संस्था के जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी।
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एक सप्ताह में मानदेय के भुगतान का निर्देश
समीक्षा में डीएम ने पाया कि जिला अस्पताल के पीडियाट्रिक एनसी यूनिट के चार आपरेटर तथा एक टेक्नीशियन को पिछले 4 माह से मानदेय नहीं मिल रहा है। उन्होंने सीएमओ को एक सप्ताह के भीतर सभी के मानदेय का भुगतान करने का निर्देश दिया। चारों आपरेटरों ने डीएम को बताया कि सर्विस प्रदाता संस्था की ओर से उन्हें पूर्व में 10 हजार के स्थान 4 हजार रुपये ही दिए गए है। इसपर एसआईसी डॉ. राजकुमार गुप्ता को मामले की जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि सेवा प्रदाता संस्था 12 प्रतिशत से अधिक की कटौती नही कर सकती है। सोमवार से मानदेय के बकाये का भुगतान शुरू हो जाएगा और शुक्रवार तक सभी के खाते में मानदेय चला जाएगा।
इंसेफेलाइटिस की परीक्षा में अस्पताल पास
जिला अस्पताल के इंसेफे लाइटिस वार्ड की समीक्षा में डीएम ने पाया कि एक जनवरी 17 से अब तक कुल 426 मरीज वहां भर्ती हुए। इनमें से 126 एईएस के मरीजों में केवल 8 को ही बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफ र किया गया। बाकी का इलाज इंसेफेलाइटिस वार्ड में हुआ। इनमें से सिर्फ तीन मरीजों की मृत्यु हुई। प्रभारी डॉ एस.के. जैन ने डीएम को बताया कि सभी जरूरी दवाएं उपलब्ध हैं। इस दौरान सीएमओ डॉ रवीन्द्र कुमार, डॉ राजकुमार गुप्ता, डॉ दिनेश सोनकर समेत कई डॉक्टर उपस्थित रहे।
आक्सीजन की कमी के बीच हुई मौतों से सबक लेते हुए शासन, प्रशासन मेडिकल कॉलेज के नियो नेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (एनआईसीयू) की खामियां दुरुस्त करने के साथ ही वहां नई सुविधाएं बढ़ाने में जुट गया है। यहां पर वार्मर (नवजात के शरीर का तापमान नियंत्रित करने वाला उपकरण) की कमी को देखते हुए शासन ने लखनऊ से 15 वार्मर भेजा है, वहीं डीएम ने जिला महिला अस्पताल से आठ वार्मर मुहैया कराया है।
महिला अस्पताल के निरीक्षण के दौरान डीएम ने पाया कि वहां पर 12 वार्मर हैं, मगर स्टाफ कम होने की वजह से सभी का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा था। डीएम का कहना है कि स्टाफ की तैनाती के बाद मेडिकल कॉलेज से सभी आठ वार्मर वापस मंगा लिए जाएंगे। कहा कि चिकित्सीय सुविधाओं के लिए शासन ने संसाधनों को बढ़ाया है।
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महिला अस्पताल की व्यवस्था जांची
डीएम राजीव रौतेला ने शुक्रवार को जिला महिला अस्पताल में स्थापित एसएनसीयू (सिक न्यू बार्न केयर यूनिट) आदि वार्ड का निरीक्षण किया। इस दौरान पाया कि वहां 100 बेड के निर्माणाधीन महिला प्रसूति अस्पताल का काम 15 सितंबर तक पूरा हो जाना था मगर अभी काफी काम बाकी है। डीएम ने इसको लेकर कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम को तलब कर स्पष्टीकरण मांगने के निर्देश दिए। कहा कि जल्द ही अगर अस्पताल का निर्माण पूरा नहीं होता है, तो कार्यदायी संस्था के जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी।
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एक सप्ताह में मानदेय के भुगतान का निर्देश
समीक्षा में डीएम ने पाया कि जिला अस्पताल के पीडियाट्रिक एनसी यूनिट के चार आपरेटर तथा एक टेक्नीशियन को पिछले 4 माह से मानदेय नहीं मिल रहा है। उन्होंने सीएमओ को एक सप्ताह के भीतर सभी के मानदेय का भुगतान करने का निर्देश दिया। चारों आपरेटरों ने डीएम को बताया कि सर्विस प्रदाता संस्था की ओर से उन्हें पूर्व में 10 हजार के स्थान 4 हजार रुपये ही दिए गए है। इसपर एसआईसी डॉ. राजकुमार गुप्ता को मामले की जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि सेवा प्रदाता संस्था 12 प्रतिशत से अधिक की कटौती नही कर सकती है। सोमवार से मानदेय के बकाये का भुगतान शुरू हो जाएगा और शुक्रवार तक सभी के खाते में मानदेय चला जाएगा।
इंसेफेलाइटिस की परीक्षा में अस्पताल पास
जिला अस्पताल के इंसेफे लाइटिस वार्ड की समीक्षा में डीएम ने पाया कि एक जनवरी 17 से अब तक कुल 426 मरीज वहां भर्ती हुए। इनमें से 126 एईएस के मरीजों में केवल 8 को ही बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफ र किया गया। बाकी का इलाज इंसेफेलाइटिस वार्ड में हुआ। इनमें से सिर्फ तीन मरीजों की मृत्यु हुई। प्रभारी डॉ एस.के. जैन ने डीएम को बताया कि सभी जरूरी दवाएं उपलब्ध हैं। इस दौरान सीएमओ डॉ रवीन्द्र कुमार, डॉ राजकुमार गुप्ता, डॉ दिनेश सोनकर समेत कई डॉक्टर उपस्थित रहे।