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शताब्दी के भीषणतम बाढ़ जैसे बन रहे हालात
टीपी शाही, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Tue, 22 Aug 2017 01:22 AM IST
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बाढ़ में फंसे लोग बाहर आते हुए।
- फोटो : Amar Ujala
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जैसे-जैसे समय बीत रहा है और नदियों का जलस्तर ऊपर की तरफ जा रहा है लोगों की धड़कने तेज हो रही हैं। उन्हें 1998 की बाढ़ की विभीषिका याद आ रही है। तब शहर का हिस्सा हो या गांव का हर तरफ पानी ही पानी था। गोरखपुर-वाराणसी एवं गोरखपुर-लखनऊ राजमार्ग कई स्थानों पर कट गया था। पानी की धार के बह गए लोगों का पता ही नहीं चला। उस तबाही की तारीख थी 23 अगस्त। आज 22 है और जलस्तर भी उसके करीब है।
1998 की बाढ़ में पूर्व के सभी मानक ध्वस्त हो गए थे। जनपद में बहने वाली सभी प्रमुख नदियां राप्ती , घाघरा, रोहिन, कुआनों, आमी, गोर्रा बाढ़ के खतरे के मानकों को एक साथ पार कर गई थीं। 23 अगस्त 1998 को रात्रि 11 बजे राप्ती का जलस्तर 77.54 मीटर तक पहुंच गया। इसके साथ ही महानगर से सटे राप्ती पर बना लहसड़ी बांध झरवा के पास टूट गया। उसका दबाव बना तो नौसड़ के पास बांध टूट गया। जिससे नौसड़ पेट्रोलपंप पानी की तेज धारा में बह गया। कहा तो यह भी जाता है कि वहां पर सोया कर्मचारी और आस पास के कई लोग पानी के वेग में बह गए। उसके साथ ही लखनऊ मार्ग पर बरौहा के पास भी बंधा टूट गया। इससे टूटने से हार्बट बांध पर पानी का दबाव कम हो गया। जिसके कारण शहर के प्रमुख मुहल्लों पर मंडरा रहा बाढ़ का खतरा थम गया था। इन तटबंधों के टूटने से शहर का रुस्तमपुर, आजाद चौक और तारामंडल इलाका पूरी तरह से जलमग्न हो गया था। लाखाें की संख्या में लोग अचानक घरों में फंस गए थे। पानी इतना हो गया कि लोगों को छतों पर शरण लेनी पड़ी थी। बाद में उन्हें सेना की मदद से निकला गया।
इसी तरह से राप्ती पर बना कोठा सेमरा बांध जो करीब 43 किलो मीटर लंबा है कोठा और सेमरा में कट गया था। जिसके चलते लाखों लोग बाढ़ में फंस गए। इस पानी का दबाव इस कदर बढ़ा की रकहट गगहा बांध कई स्थानों पर ध्वस्त हो गया। गोरखपुर वाराणसी मार्ग तीन स्थानों पर टूटा था। गोरखपुर से बड़हलगंज आने के लिए लोगों को तीन जगह नाव का सहारा लेना पड़ता था। उस समय शायद ही कोई बांध बचा होगा जो टूटा नहीं हो।
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एक तरफ मदद , दूसरी तरफ हो रही थी चोरी
1998 की बाढ़ में शहरी इलाका जलमग्न हुआ तो प्रशासन के साथ ही तमाम स्वयंसेवी संस्थाएं मदद को आगे आईं थी। दूसरी तरफ जो लोग जान बचाकर अपना घर छोड़ कर सुरक्षित स्थान पर चले गए थे उन घरों में लगातार चोरी होने लगी। बहुत से परिवार बाढ़ की बजाए चोरी की वजह से बर्बाद हो गए थे।
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1998 की बाढ़ में पूर्व के सभी मानक ध्वस्त हो गए थे। जनपद में बहने वाली सभी प्रमुख नदियां राप्ती , घाघरा, रोहिन, कुआनों, आमी, गोर्रा बाढ़ के खतरे के मानकों को एक साथ पार कर गई थीं। 23 अगस्त 1998 को रात्रि 11 बजे राप्ती का जलस्तर 77.54 मीटर तक पहुंच गया। इसके साथ ही महानगर से सटे राप्ती पर बना लहसड़ी बांध झरवा के पास टूट गया। उसका दबाव बना तो नौसड़ के पास बांध टूट गया। जिससे नौसड़ पेट्रोलपंप पानी की तेज धारा में बह गया। कहा तो यह भी जाता है कि वहां पर सोया कर्मचारी और आस पास के कई लोग पानी के वेग में बह गए। उसके साथ ही लखनऊ मार्ग पर बरौहा के पास भी बंधा टूट गया। इससे टूटने से हार्बट बांध पर पानी का दबाव कम हो गया। जिसके कारण शहर के प्रमुख मुहल्लों पर मंडरा रहा बाढ़ का खतरा थम गया था। इन तटबंधों के टूटने से शहर का रुस्तमपुर, आजाद चौक और तारामंडल इलाका पूरी तरह से जलमग्न हो गया था। लाखाें की संख्या में लोग अचानक घरों में फंस गए थे। पानी इतना हो गया कि लोगों को छतों पर शरण लेनी पड़ी थी। बाद में उन्हें सेना की मदद से निकला गया।
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इसी तरह से राप्ती पर बना कोठा सेमरा बांध जो करीब 43 किलो मीटर लंबा है कोठा और सेमरा में कट गया था। जिसके चलते लाखों लोग बाढ़ में फंस गए। इस पानी का दबाव इस कदर बढ़ा की रकहट गगहा बांध कई स्थानों पर ध्वस्त हो गया। गोरखपुर वाराणसी मार्ग तीन स्थानों पर टूटा था। गोरखपुर से बड़हलगंज आने के लिए लोगों को तीन जगह नाव का सहारा लेना पड़ता था। उस समय शायद ही कोई बांध बचा होगा जो टूटा नहीं हो।
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एक तरफ मदद , दूसरी तरफ हो रही थी चोरी
1998 की बाढ़ में शहरी इलाका जलमग्न हुआ तो प्रशासन के साथ ही तमाम स्वयंसेवी संस्थाएं मदद को आगे आईं थी। दूसरी तरफ जो लोग जान बचाकर अपना घर छोड़ कर सुरक्षित स्थान पर चले गए थे उन घरों में लगातार चोरी होने लगी। बहुत से परिवार बाढ़ की बजाए चोरी की वजह से बर्बाद हो गए थे।